प्रधानमंत्री ने सुव्यवस्थित मानकों से मानवीय आचरण के मार्गदर्शन को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया

दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका अभिप्राय है कि श्रेष्ठ आचरण एक दीपक की तरह है जो न केवल एक व्यक्ति को बल्कि पूरे समाज को आलोकित करता है। श्री मोदी ने कहा कि इसी आदर्श को अपनाकर हमारे देश के लोग आज पूरे संयम, क्षमता और कर्तव्य परायणता के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा:

“श्रेष्ठ आचरण वह दीपक है, जिससे व्यक्ति के साथ-साथ समाज भी आलोकित होता है। इसी आदर्श को अपनाते हुए हमारे देशवासी आज पूरे संयम, सामर्थ्य और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।”

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।

ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि।।”

क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसका निर्धारण व्यक्तिपरक राय या क्षणिक आवेग पर नहीं, बल्कि शास्त्र आधारित एक सुव्यवस्थित मानक के अनुसार होना चाहिए, जो आचरण को दिशा और अनुशासन प्रदान करता है। इसलिए, व्यक्ति को स्थापित मानकों की उस प्रणाली के अनुसार कार्य करना चाहिए, ताकि उसका आचरण संतुलित, मान्य और सार्थक हो सके।

By Rajeev Sharma

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