03
Nov
नई दिल्ली(राजीव शर्मा):खदान बंद करना खनन जीवनचक्र का एक अभिन्न अंग है। हालांकि खनन क्षेत्र के प्रति जिम्मेदारी खनन कार्यों के पूरा होने के साथ समाप्त नहीं होती है। खनन के बाद की भूमि का उत्पादक उपयोग, पर्यावरण का अनुकूलन और टिकाऊ सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए खदान पुनर्प्रयोजन के लिए एक सुव्यवस्थित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। इस आवश्यकता को पहचानते हुए, भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के तहत कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) ने सुविकल्प- माइन रिपर्पोजिंग टूल विकसित किया है, जो कोयला और लिग्नाइट खदान के लिए खनन योजना दिशानिर्देश, 2025 के साथ जुड़ा एक डिजिटल निर्णय-समर्थन…
