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Sep
नई दिल्ली (राजीव शर्मा):बिजली की हर इकाई के पीछे एक यात्रा होती है। किसी भी घर में रोशनी पहुंचने से पहले, कारखाने में मशीनरी शुरू होती है, या किसी इस्पात अथवा सीमेंट संयंत्र में उत्पादन शुरू होता है, कार्यों की एक अधिक व्यापक श्रृंखला सक्रिय हो चुकी होती है। भारत में बिजली की बढ़ती मांग के पीछे एक और समान रूप से महत्वपूर्ण कहानी है—खदान से उपभोक्ता तक कोयले की यात्रा और वह वितरण प्रणाली, जो इस पूरी यात्रा को निरंतर गतिशील बनाए रखती है। पिछले एक दशक में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने इस यात्रा को नया स्वरूप दिया…
