दिल्ली (राजीव शर्मा):भारत का पटसन क्षेत्र जूट फसल सूचना प्रणाली (जेसीआईएस) के कार्यान्वयन के साथ निर्णायक नए चरण में पहुंच गया है। प्रौद्योगिकी-आधारित यह पहल फसल की उपग्रह द्वारा निगरानी, मौसम विश्लेषण और कृषि कार्य जानकारी एकीकृत तौर पर प्रदान करती है। इस परिवर्तन के केंद्र में राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी) है, जो संस्थागत नेतृत्व और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन से इस प्रणाली को अवधारणा से व्यावहारिता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जूट फसल सूचना प्रणाली राष्ट्रीय जूट बोर्ड-भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारतीय पटसन निगम के सहयोग से 2023 से जूट फसल सूचना प्रणाली परियोजना कार्यान्वित कर रहा है, जिसका उद्देश्य रिमोट सेंसिंग (सुदूर संवेदन) और फील्ड डेटा के उपयोग द्वारा पटसन की खेती की निगरानी करना है। इस पहल के अंतर्गत, दो प्रमुख उपकरण विकसित किए गए हैं:
ए) जूट की खेती की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप-भुवन जंप और
बी) वेब-आधारित प्लेटफॉर्म पीएटीएसएएन (मोबाइल ऐप-आधारित फील्ड ऑब्जर्वेशन का उपयोग कर जूट का संभावित मूल्यांकन) है। यह अधिकारियों और हित पक्षों को सूचित निर्णय लेने में सहायता के लिए लगभग वास्तविक समय में जूट की निगरानी और विश्लेषण प्रदान करता है।
जूट फसल सूचना प्रणाली के इस्तेमाल से पहले, जूट पारिस्थितिकी तंत्र संरचनात्मक सीमाओं से बंधा था, जिसमें योजना और उत्पादकता दोनों बाधित थीं। फसल क्षेत्र और उपज का अनुमान मुख्य रूप से खंडित स्रोतों और विशेषज्ञ आकलन पर आधारित था, जिसमें अक्सर विसंगतियां और देरी होती थी। क्षेत्रवार डेटा संग्रह शारीरिक रूप से किया जाता था, जिसमें सीमित मानकीकरण था और भू-संदर्भ का भी अभाव था। उस दौरान उपग्रह, मौसम और जमीनी स्तर के डेटा अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त होते थे, जिनकी वैज्ञानिक सत्यापन की गुंजाइश बहुत कम थी। इसके अलावा, बाढ़, सूखा, कीटों या तापमान में बदलाव से फसल को नकारात्मक रूप से पडने वाले प्रभाव का पता लगाने में वास्तविक समय तंत्र की कमी के कारण इस पर कदम उठाने में देरी होती थी और फसल का अधिक नुकसान होता था। सीमित सूक्ष्म दृश्यता से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान सीमित थी और लक्षित हस्तक्षेपों और नीति निर्माण बाधित हो रहा है।
इस संदर्भ में, जूट फसल सूचना प्रणाली- पटसन फसल की निगरानी के लिए अधिक संरचित और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण संबंधी बडा बदलाव है। बहु-स्रोत सूचना प्रणाली के रूप में परिकल्पित, यह उपग्रह-आधारित मानचित्रण, मौसम विश्लेषण, वनस्पति सूचकांक, ऐतिहासिक डेटासेट और मोबाइल-आधारित क्षेत्र इनपुट को एक ही प्लेटफॉर्म पर समेकित करता है। यह प्रणाली फसल क्षेत्र और उत्पादन का लगभग वास्तविक समय में अनुमान सक्षमता प्रदान करती है। यह फसल की स्थिति की निरंतर निगरानी में सहायता और समय पर सावधान के साथ स्वचालित रिपोर्टिंग (विभिन्न डेटा स्रोतों से जानकारी एकत्र कर वास्तविक समय में सटीक और सुसंगत रिपोर्ट की सुविधा प्रदान करती है। इससे अनुमानों की विश्वसनीयता और समग्र निगरानी ढांचे की अनुक्रियाशीलता दोनों में सुधार हुआ है।
राष्ट्रीय जूट बोर्ड की जूट फसल सूचना प्रणाली के संचालन में केंद्रीय भूमिका रही है। अपने आई-केयर फील्ड नेटवर्क और कार्यान्वयन एजेंसियों के तालमेल द्वारा बोर्ड ने भुवन जंप मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग कर भू-टैग किए गए फील्ड डेटा के व्यापक संग्रह को सुगम बनाया है। इस प्रयास की व्यापकता और निरंतरता से जमीनी स्तर पर सत्यापन सुदृढ हुआ है। राष्ट्रीय जूट बोर्ड ने उपग्रह से प्राप्त फसल मानचित्रों को सांख्यिकीय रूप से मजबूत नमूनाकरण तकनीकों के साथ एकीकृत कर भू-स्थानिक स्मार्ट-सैंपलिंग फ्रेमवर्क के उपयोग से फसल कटाई प्रयोगों (सीसीई) के संचालन में भी सहयोग दिया है। इस नजरिए ने उपज अनुमान की सटीकता में सुधार किया है और उत्पादन मॉडलिंग मजबूत हुआ है।
संस्थागत स्तर पर जूट फसल सूचना प्रणाली के निष्कर्षों को इस क्षेत्र में योजना और निगरानी प्रक्रियाओं में एकीकृत किया गया है। सुसंगत, भौगोलिक संदर्भ वाले आंकडों की उपलब्धता से राज्य और राष्ट्रीय अनुमानों के बीच बेहतर तालमेल और अधिक सटीक हस्तक्षेप संभव हुआ है। हाल के वर्षों के उपग्रह-आधारित आकलन से प्रमुख पटसन उत्पादक राज्यों में इसकी खेती की सुसंगत स्थिति दिखी है, जो कार्यप्रणाली में बेहतर स्थिरता दर्शाती है।
जूट फसल सूचना प्रणाली ने जोखिम मूल्यांकन क्षमताओं को भी मजबूत किया है। उपग्रह प्रेक्षणों और क्षेत्र सत्यापन द्वारा समर्थित एक मात्रात्मक बाढ़ प्रभाव मॉडल के विकास ने प्रभावित क्षेत्रों में उपज और गुणवत्ता के नुकसान का निष्पक्ष अनुमान आकलन संभव बनाया है। इसके साथ ही मौसम विश्लेषण शामिल करने से प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली मजबूत हुई है, जिसमें वर्षा के पैटर्न, सूखे की अवधि और तापमान में बदलाव से संबंधित चेतावनी जिला-स्तरीय योजना और प्रतिक्रिया में सहायक होती हैं।
कुल मिलाकर, जूट फसल सूचना प्रणाली ने एक ही विश्लेषणात्मक ढांचे के अंतर्गत कई डेटा स्रोतों को एकीकृत कर फसल निगरानी का समेकित दृष्टिकोण संभव बनाया है। प्रणाली की उपयोगी जानकारी उत्पन्न करने की क्षमता ने विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने की गुणवत्ता में भी सुधार सुधार के साथ ही प्रतिक्रिया और क्षमता निर्माण के माध्यम से निरंतर सुधार का आधार भी तैयार किया है।
राष्ट्रीय जूट बोर्ड के आगामी मार्ग
अतिरिक्त जिलों और उच्च जूट उत्पादक क्षेत्रों में जूट फसल सूचना प्रणाली का विस्तार।
फसलों पर विषम और मौसम की स्थिति के बारे में मोबाइल और एसएमएस आधारित चेतावनी के माध्यम से किसान परामर्श प्रणालियों को सुदृढ बनाना।
योजना के डिजाइन, लक्ष्यीकरण और संसाधन आवंटन में जूट फसल सूचना प्रणाली के परिणामों का गहन एकीकरण
जल संसाधन मानचित्रण और कार्बन संबंधी हस्तक्षेपों सहित सतत विकास पहल के लिए उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों का उपयोग।
मानकीकृत डेटा संग्रह और प्रणाली अपनाने के लिए क्षेत्रीय कर्मियों और संस्थागत हितधारकों का क्षमता निर्माण जारी रखना।
जूट फसल सूचना प्रणाली का कार्यान्वयन पटसन उत्पादन क्षेत्र में अधिक डेटा-संचालित और एकीकृत दृष्टिकोण की ओर क्रमिक तथा महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाता है, जिसमें राष्ट्रीय जूट बोर्ड मौजूदा संस्थागत और जमीनी स्तर की संरचनाओं के अंतर्गत इस बदलाव को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण पटसन की फसल के क्षेत्र फसल उत्पादन, उपज और कच्चे जूट के उत्पादन के अधिक सटीक आंकड़ों का अनुमान लगाने में सहायक बन रहा है, जो पटसन क्षेत्र के लिए नीतिगत निर्णय लेने में उपयोगी है।
