रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण पर राजनाथ सिंह का जोर, 2029 तक ₹3 लाख करोड़ उत्पादन का लक्ष्य

जैसलमेर(राजीव शर्मा): रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बदलती सुरक्षा चुनौतियों और युद्ध की बदलती प्रकृति का जवाब देने में सक्षम, प्रौद्योगिकीय रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर सेना विकसित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया है।

मंगलवार को राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की सलाहकारी समिति की बैठक को संबोधित करते हुए सिंह ने जोर दिया कि आधुनिक संघर्षों में प्रौद्योगिकीय प्रगति तेजी से निर्णायक भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि भारत की संचालन तैयारी बनाए रखने और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सतत सैन्य आधुनिकीकरण आवश्यक है।

‘भारतीय रक्षा बलों का आधुनिकीकरण’ विषय पर आयोजित इस बैठक के दौरान रक्षा मंत्री ने 2029 तक ₹3 लाख करोड़ का रक्षा उत्पादन और ₹50,000 करोड़ का रक्षा निर्यात हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा।

सिंह ने सशस्त्र बलों को मजबूत करने के लिए छह प्रमुख प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। इनमें अगली पीढ़ी के हथियारों और सैन्य मंचों का तेजी से समावेश, थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय, स्वदेशी रक्षा निर्माण का विस्तार, उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाना, अनुसंधान और नवाचार में अधिक निवेश तथा उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग शामिल है।

उन्होंने भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए सेना को तैयार करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों, मानवरहित मंचों, साइबर क्षमताओं, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और उन्नत संचार प्रणालियों के महत्व पर भी जोर दिया।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की पहलों की समीक्षा तीन प्रमुख क्षेत्रों में की: आत्मनिर्भरता के साथ बजट और पूंजीगत अधिग्रहण, प्रौद्योगिकीय प्रगति और मानव पूंजी विकास।

रक्षा के लिए बढ़ी वित्तीय आवंटन को रेखांकित करते हुए मंत्री ने बताया कि 2026-27 के केंद्रीय बजट में रक्षा आवंटन बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ किया गया है। इस राशि में से ₹2.19 लाख करोड़ पूंजीगत व्यय के लिए आवंटित किए गए हैं, जिसमें सैन्य आधुनिकीकरण और खरीद शामिल है।

उन्होंने भारत के घरेलू रक्षा निर्माण क्षेत्र के उल्लेखनीय विस्तार की ओर भी ध्यान दिलाया। रक्षा उत्पादन, जो 2014-15 में ₹46,429 करोड़ था, 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुँच गया। इसी प्रकार, रक्षा निर्यात 2014 में ₹2,000 करोड़ से कम से बढ़कर लगभग ₹40,000 करोड़ हो गया है।

सरकार की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षाओं को पुनः दोहराते हुए सिंह ने कहा कि भारत एक प्रमुख वैश्विक रक्षा निर्माण और निर्यात केंद्र बनने की दिशा में काम करता रहेगा।

उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिकीकरण को एक बार का अभ्यास नहीं माना जा सकता, क्योंकि बदलती प्रौद्योगिकियाँ और सुरक्षा आवश्यकताएँ सैन्य क्षमताओं में नियमित उन्नयन की मांग करती हैं। उन्होंने मजबूत अनुसंधान एवं विकास, स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने तथा निजी निर्माताओं, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के साथ गहन जुड़ाव की अपील की।

मंत्री ने तकनीकी नवाचारों को व्यावहारिक सैन्य क्षमताओं में बदलने के लिए सशस्त्र बलों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा लोक उद्यमों और निजी उद्योग के बीच निकट सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्व सैनिक कल्याण सचिव सुकृति लिखी, रक्षा वित्त सचिव विश्वजीत सहाय तथा अन्य वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया।

By Rajeev Sharma

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