नई दिल्ली (राजीव शर्मा):नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के सदस्यों ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के मुख्यालय के बाहर बड़ा प्रदर्शन किया, जिससे NEET परीक्षा और कथित पेपर लीक मामलों को लेकर जारी विवाद पर केंद्र सरकार पर दबाव और बढ़ गया।
“NTA हल्ला बोल” के बैनर तले किए गए इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने किया। सैकड़ों छात्र कार्यकर्ता और NEET अभ्यर्थी इस आंदोलन में शामिल हुए, जिन्होंने परीक्षा एजेंसी के खिलाफ नारे लगाए और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने NTA पर प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि बार‑बार होने वाली अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच अनिश्चितता पैदा कर दी है।
प्रदर्शन के दौरान प्रतिभागियों ने अभ्यर्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव और चिंता के मुद्दे को भी उठाया, कई वक्ताओं ने अकादमिक दबाव और परीक्षा‑संबंधी अनिश्चितता से कथित तौर पर जुड़े छात्र आत्महत्याओं की खबरों का ज़िक्र किया।
सभा को संबोधित करते हुए जाखड़ ने कहा कि कथित प्रशासनिक विफलताओं और जवाबदेही के अभाव के कारण देशभर के छात्र परीक्षा प्रणाली से भरोसा खो रहे हैं।
उनका कहना था कि लाखों छात्र, जो वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, अब बार‑बार होने वाले परीक्षा‑संबंधी विवादों की वजह से असुरक्षा और भावनात्मक तनाव झेल रहे हैं।
सिर्फ NEET परीक्षा तक सीमित न बताते हुए, NSUI नेता ने कहा कि यह आंदोलन देश की शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बचाने और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए चलाया जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान उठाई गई मुख्य मांगों में NTA पर तत्काल प्रतिबंध, केंद्र के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, NEET में कथित अनियमितताओं की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच, और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल थी।
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार अभ्यर्थियों और युवा संगठनों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर शीघ्र कार्रवाई नहीं करती, तो इस आंदोलन को देशव्यापी स्तर तक विस्तारित किया जा सकता है।
