नोबेल शांति पुरस्कार की चर्चा: मार्क कार्नी का नाम क्यों बना हुआ है सुर्खियों में

ओटावा (राजीव शर्मा): 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से पहले कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का नाम काफी ध्यान आकर्षित कर रहा है। इस बात को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या उनकी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक सहयोग की वकालत उन्हें संभावित दावेदारों में शामिल कर सकती है।

प्रधानमंत्री बनने के बाद से कार्नी का अंतरराष्ट्रीय कद काफी बढ़ा है, खासकर ऐसे समय में जब कनाडा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जटिल होते रिश्तों के बीच संतुलन साध रहा है। उनकी सरकार ने कनाडा की संप्रभुता पर जोर देने के साथ-साथ मध्य शक्तियों (मिडिल पावर्स) के बीच घनिष्ठ सहयोग को बढ़ावा दिया है और बहुपक्षीय संस्थाओं की पैरवी की है।

इन रणनीतियों ने इस चर्चा को हवा दी है कि क्या कार्नी का राजनयिक दृष्टिकोण पारंपरिक रूप से नोबेल शांति पुरस्कार से जुड़े सिद्धांतों के अनुरूप देखा जा सकता है।

उनकी संभावनाओं को लेकर अटकलें प्रेडिक्शन मार्केट्स (सट्टा व पूर्वानुमान बाजारों) पर भी देखी गई हैं, जहां व्यापारियों द्वारा विचार किए जा रहे नामों में उनका नाम कुछ समय के लिए तेजी से उभरा। हालांकि, ऐसे बाजार नॉर्वेजियन नोबेल समिति के विचारों या निर्णयों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं और इन्हें किसी वास्तविक शॉर्टलिस्ट के प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

नोबेल समिति नामांकित व्यक्तियों या शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के नामों का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं करती है। नामांकनों से जुड़े विवरण दशकों तक गोपनीय रहते हैं, जिसका अर्थ है कि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि कार्नी को 2026 के पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है।

इसके बावजूद, इस पुरस्कार के साथ कनाडा के ऐतिहासिक जुड़ाव को देखते हुए कार्नी की संभावित दावेदारी उल्लेखनीय है। कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री लेस्टर बी. पियर्सन को 1957 में स्वेज संकट को सुलझाने और संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन बल की स्थापना में उनकी राजनयिक भूमिका के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

कार्नी के संदर्भ में, कोई भी सम्मान उनके आर्थिक करियर के बजाय उनके अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों से जुड़ा माना जाएगा। राजनीति में आने से पहले, उन्होंने कनाडा के केंद्रीय बैंक में वरिष्ठ पदों पर कार्य किया था और बाद में बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर के रूप में भी सेवाएं दी थीं।

2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा 9 अक्टूबर को ओस्लो में होने वाली है। तब तक संभावित विजेताओं को लेकर कयासों का दौर जारी रहने की संभावना है, जिसमें सार्वजनिक ध्यान आकर्षित करने वाले कई नामों में कार्नी भी एक बने हुए हैं।

हालांकि, वर्तमान अटकलों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि उन्हें अंततः यह पुरस्कार मिलेगा या नहीं। इसका अंतिम फैसला नॉर्वेजियन नोबेल समिति के हाथ में है, और केवल सार्वजनिक रूप से नाम चर्चा में आने से किसी के आधिकारिक रूप से नामांकित होने की पुष्टि नहीं होती।

फिलहाल, कार्नी को नोबेल शांति पुरस्कार का एक पुष्ट फाइनलिस्ट मानने के बजाय सार्वजनिक चर्चाओं में शामिल एक संभावित दावेदार ही कहा जा सकता है।

By Rajeev Sharma

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