अमृतसर (गुरप्रीत सिंह): पंजाबी मेकअप आर्टिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मैड संधू की हत्या की जांच में उस समय एक नया मोड़ आ गया, जब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में इस कत्ल की जिम्मेदारी ली गई।
इस ऑडियो में गोल्डी ढिल्लों, लकी जोहल और मनी पड्डा के नाम हत्या के सिलसिले में लिए गए हैं। हालांकि, इस ऑडियो की सत्यता और इसमें सुनाई दे रही आवाजों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
रिकॉर्डिंग की शुरुआत सिख धार्मिक अभिवादन (फतेह) से होती है, जिसके बाद बोलने वाला व्यक्ति कथित तौर पर दावा करता है कि संधू की हत्या के पीछे उनका समूह था। वक्ता घटना को लेकर चल रहे अन्य दावों को खारिज करता है और कहता है कि उनके दावे के समर्थन में सबूत मौजूद हैं।
ऑडियो के अनुसार, हत्या का मकसद कथित तौर पर कोई आर्थिक लाभ नहीं था। इसके बजाय, बोलने वाले ने संधू की गतिविधियों पर आरोप लगाए और दावा किया कि उनके तौर-तरीके पंजाब में अवांछनीय माहौल पैदा कर रहे थे।
रिकॉर्डिंग में अरुप्रीत नामक एक व्यक्ति को भी धमकी दी गई है, जिसमें कथित तौर पर चेतावनी दी गई है कि अगला निशाना वह हो सकता है।
पुलिस की गिरफ्त से बाहर आरोपी
गौरतलब है कि अमृतसर में हाल ही में हुए एक हमले में मैड संधू को गोलियों से भून दिया गया था और अस्पताल ले जाते समय उन्होंने दम तोड़ दिया था। इस हत्याकांड से उनके प्रशंसकों और पंजाब के मनोरंजन व सोशल मीडिया जगत में गहरी चिंता और रोष फैल गया था।
मामले की जांच जारी है और पुलिस ने वायरल ऑडियो में किए गए दावों की अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की है। केवल रिकॉर्डिंग के आधार पर आधिकारिक रूप से किसी संदिग्ध को हत्या का जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
जांच अधिकारियों द्वारा अपनी तफ्तीश के हिस्से के रूप में इस ऑडियो की फॉरेंसिक जांच कराने और यह पता लगाने की उम्मीद है कि जिम्मेदारी लेने वाले लोगों का गोलीकांड से कोई वास्तविक संबंध है या नहीं।
यह घटनाक्रम इस क्षेत्र में हथियारों से जुड़ी हिंसक घटनाओं पर बढ़े ध्यान के बीच सामने आया है। हाल ही में एक अलग गोलीबारी की घटना में एक एएसआई (सहायक उप-निरीक्षक) की भी हत्या कर दी गई थी, जिससे इस तरह के हमलों को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
फिलहाल, पुलिस संधू की मौत से जुड़े सबूत जुटाने और परिस्थितियों की जांच में लगी हुई है। हत्या के पीछे के चेहरों और वास्तविक कारणों के बारे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वायरल रिकॉर्डिंग में किए गए दावों का सत्यापन किया जाना बाकी है।
