NEET-UG पेपर लीक आरोपों के बीच रद्द, CBI ने देशभर में जांच शुरू की

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को सवालिया पेपर लीक के आरोपों के बाद मंगलवार को रद्द कर दिया है। नई तिथि अगले एक सप्ताह के भीतर घोषित किए जाने की संभावना है। यह फैसला पूरे देश के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए बड़ा झटका बना है, जिनमें गुस्सा और चिंता दोनों देखी जा रही है।

पेपर लीक जांच और CBI की एंट्री
राजस्थान पुलिस ने सवालिया पेपर लीक मामले में 16 संदिग्धों को हिरासत में लेने के कुछ दिन बाद यह कदम उठाया गया। आरोप है कि परीक्षा से पहले 150 पन्नों का एक “गेस पेपर” घूम रहा था, जिसमें दिए गए करीब 410 सवालों में से लगभग 120 सवाल कथित तौर पर असली NEET-UG पेपर से मिलते-जुलते थे।

मामले की आगे की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। एजेंसी ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, चोरी, साक्ष्य नष्ट करने से जुड़े कई प्रावधानों के साथ, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस टीमों ने सीकर के हॉस्टलों पर छापे मारे और राजस्थान व देहरादून के कई संदिग्धों से पूछताछ की। इसी कड़ी में नासिक पुलिस ने महाराष्ट्र के नांदगांव क्षेत्र के 30 वर्षीय छात्र को भी हिरासत में लिया।

NTA का पक्ष और दोबारा परीक्षा पर स्थिति
NTA के प्रमुख अभिषेक सिंह ने कहा कि एजेंसी को 7 मई को एक व्हिसलब्लोअर से जानकारी मिली कि कुछ सवाल लीक हुए दस्तावेज़ से मिलते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एजेंसी अभी इसे “पेपर लीक” का निर्णायक निष्कर्ष नहीं कह रही, लेकिन यह स्वीकार किया कि आंशिक मिलान भी NTA की “ज़ीरो-एरर” नीति के खिलाफ है।

उनके अनुसार, 1 और 2 मई को उपलब्ध PDF में कई सवाल परीक्षा में पूछे गए सवालों से मिलते-जुलते थे। एजेंसी ने कहा कि एक भी सवाल मैच होना परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करता है, इसलिए परीक्षा रद्द कर दी गई, ताकि राष्ट्रीय परीक्षा तंत्र पर सार्वजनिक भरोसा बना रहे। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं करना होगा, पहले भरी गई फीस वापस की जाएगी और पुरानी कैंडिडेचर व परीक्षा केंद्र की पसंद दोबारा परीक्षा के लिए वैध रहेगी।

राजनीतिक विवाद और छात्रों का गुस्सा
मामला जल्द ही राजनीतिक रंग भी ले गया। विपक्षी दलों ने केंद्र पर बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रबंधन में विफल रहने के आरोप लगाए और NTA के पुनर्गठन या उसे बदलने की मांग उठाई।

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) समेत कई छात्र संगठनों ने विभिन्न शहरों में प्रदर्शन किए, यह आरोप लगाते हुए कि सिस्टम में लापरवाही और जवाबदेही की कमी है। कई अभ्यर्थियों ने मांग की कि भविष्य में मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं NTA के बजाय सीधे AIIMS दिल्ली के ज़रिए कराई जाएं।

By Rajeev Sharma

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