आइची-नागोया(राजीव शर्मा): भारतीय निशानेबाज नीरू धांडा ने चुनौतीपूर्ण बारिश के बीच शानदार संयम का परिचय देते हुए 2026 एशियाई खेलों में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत लिया। यह ऐची-नागोया एशियाई खेलों में भारत का पांचवां स्वर्ण पदक है।
धांडा ने क्वालिफिकेशन राउंड और फाइनल—दोनों में शीर्ष स्थान हासिल किया। आठ निशानेबाजों वाले पदक मुकाबले में उन्होंने 26 अंक अर्जित किए। चीन की सुन युनोंग और कुवैत की हाजर अब्दुलमलिक ने 21-21 अंक के साथ रजत पदक साझा किया, जबकि कतर की रे बेसिल 16 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहीं।
फाइनल की शुरुआत धांडा ने शानदार अंदाज में की और पहले सीरीज में पांचों निशाने सही लगाए। दूसरी सीरीज में एक निशाना चूकने के बाद उन्होंने तुरंत लय हासिल की और तीसरी सीरीज में फिर सभी निशाने सटीक लगाकर बढ़त बना ली।
चार सीरीज के बाद धांडा ने 20 में से 19 निशाने सफलतापूर्वक लगाए थे। अंतिम दौर में भी वह सुन युनोंग से आगे रहीं और अंततः धैर्य बनाए रखते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
यह जीत भारतीय निशानेबाज के लिए उपलब्धियों से भरे वर्ष में एक और बड़ी कामयाबी है। धांडा ने जुलाई में इटली के लोनाटो में महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा में अपना पहला आईएसएसएफ विश्व कप स्वर्ण पदक जीता था। इससे पहले वह एशियाई चैंपियनशिप का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं।
भारतीय सेना की मार्क्समैनशिप यूनिट में नायब सूबेदार धांडा ने मंगलवार को इससे पहले भी भारत के पदक खाते में योगदान दिया था। उन्होंने आशीमा अहलावत और मानिषा कीर के साथ महिलाओं की ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। चीन ने स्वर्ण और कुवैत ने कांस्य पदक हासिल किया।
टीम स्पर्धा में धांडा भारत की सबसे प्रभावी निशानेबाज रहीं। उन्होंने 125 में से 118 निशाने सफलतापूर्वक लगाए।
उनके व्यक्तिगत स्वर्ण पदक के साथ भारत की कुल पदक संख्या 47 हो गई है, जिसमें पांच स्वर्ण, 21 रजत और 21 कांस्य पदक शामिल हैं।
धांडा की इस उपलब्धि को भारतीय शॉटगन निशानेबाजी के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश ने ऐतिहासिक रूप से राइफल और पिस्टल स्पर्धाओं की तुलना में शॉटगन में बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में कम पदक जीते हैं।
धांडा को इस खेल में आने की प्रेरणा अपने चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण से मिली, जिन्होंने 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में पुरुषों की ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीता था। अब धांडा ने एशियाई खेलों के मंच पर उनसे एक कदम आगे बढ़ते हुए भारतीय निशानेबाजी के यादगार दिन को स्वर्णिम सफलता में बदल दिया।
