पंजाब से मानसून की विदाई शुरू; राज्य में दर्ज हुई 12 वर्षों की सबसे कम बारिश

Punjab

चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): पंजाब अब एक लंबे शुष्क दौर की ओर बढ़ रहा है क्योंकि राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संकेत दिया है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर पंजाब और चंडीगढ़ से मानसून की पूर्ण विदाई हो सकती है।

मानसून वापसी की रेखा राज्य के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुकी है, जो वर्तमान में पटियाला और गुरदासपुर से होकर गुजर रही है। मौसम की मौजूदा स्थितियां मानसून के पूरी तरह से लौटने के अनुकूल बनी हुई हैं, वहीं 22 सितंबर को पंजाब भर में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।

यह बदलाव भारी बारिश की कमी से जूझ रहे एक पूरे मौसम के बाद सामने आया है। मानसून 1 जुलाई को पंजाब पहुंचा था और लगभग 82 दिनों तक सक्रिय रहा। 1 जून से 22 सितंबर के दौरान, राज्य में 267.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य आंकड़ा 419.2 मिमी का है—यानी बारिश में लगभग 36% की कमी रही।

मौसम विभाग के अनुसार, यह पिछले 12 वर्षों में पंजाब में दर्ज की गई सबसे कम बारिश है, जो इस सीजन के असामान्य रूप से शुष्क होने को उजागर करती है।

शुष्क हवाओं के चलने से तापमान में उछाल

बारिश की गतिविधियों में कमी आने के साथ ही तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। पंजाब का औसत अधिकतम तापमान लगभग 0.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है और अब यह मौसमी सामान्य स्तर के करीब पहुंच गया है।

पटियाला में राज्य का सर्वाधिक तापमान 35.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण पूरे क्षेत्र में आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) के स्तर में भी गिरावट आ रही है।

हालांकि बंगाल की खाड़ी के पास बन रहा गहरा डिप्रेशन मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश लाने की संभावना रखता है, लेकिन इसके चलते पंजाब में बारिश होने की फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है। आईएमडी ने 22 से 28 सितंबर की अवधि के लिए राज्य हेतु कोई मौसम चेतावनी भी जारी नहीं की है।

बिजली की मांग 12,000 मेगावाट के पार

शुष्क मौसम और अपेक्षाकृत ऊंचे तापमान के इस गठजोड़ ने पंजाब में बिजली की खपत को भी काफी बढ़ा दिया है।

बिजली की अधिकतम मांग 12,334 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि राज्य में 5,229 मेगावाट का उत्पादन हुआ। शेष 7,106 मेगावाट बिजली की आपूर्ति ग्रिड के जरिए की गई।

निर्धारित ड्रॉवल (Scheduled Drawal) 6,672 मेगावाट था, जिसका अर्थ है कि वास्तविक खपत निर्धारित आंकड़े से 434 मेगावाट अधिक रही। इस दौरान ग्रिड फ्रीक्वेंसी 49.99 हर्ट्ज दर्ज की गई।

प्रमुख बांधों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे

राज्य के प्रमुख बांधों में पानी के स्तर पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।

भाखड़ा बांध में जलस्तर 1,643.44 फीट दर्ज किया गया। बांध में पानी की आवक 13,891 क्यूसेक रही, जबकि 27,617 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। खतरे का निशान 1,680 फीट होने के कारण जलाशय का स्तर वर्तमान में इस सीमा से 36.56 फीट नीचे बना हुआ है।

वहीं पौंग बांध में जलस्तर 1,370.96 फीट दर्ज किया गया। बांध में 10,794 क्यूसेक पानी आ रहा था और 17,365 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। इसका खतरे का स्तर 1,390 फीट है, जिससे वर्तमान स्तर निशान से 19.04 फीट नीचे है।

मानसून के अब वापसी चरण में प्रवेश करने के साथ ही, पंजाब में आने वाले दिनों में मुख्य रूप से शुष्क मौसम रहने की संभावना है, जबकि राज्य प्रशासन तापमान, बिजली की खपत और जल संसाधनों की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।

By Gurpreet Singh

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