भारत का वित्तीय समावेशन सूचकांक 67 तक पहुंचा, डिजिटल योजनाओं ने बदली तस्वीर

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): भारत का फाइनेंशियल इनक्लूज़न सूचकांक पिछले आठ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कर चुका है, 2018 में 53.9 से बढ़कर 2026 में 67 हो गया है, जो देशभर में बैंकिंग, बीमा, बचत और डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक व्यापक पहुँच को दर्शाता है।

सरकार ने सोमवार को इस प्रगति को डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के विस्तार और प्रधान मंत्री जन धन योजना (PMJDY) तथा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी प्रमुख पहलों से जुड़ी एक बड़ी उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया।

अधिकारियों ने कहा कि देश की वित्तीय समावेशन यात्रा अब केवल बैंक खाते खोलने से कहीं आगे बढ़ चुकी है। भारत की डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को अब समावेशी विकास और सार्वजनिक सेवा वितरण के मॉडल के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचाना जा रहा है।

प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY) के 12 साल पूरे होने के अवसर पर सरकार ने कहा कि विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग पहुँच में बड़ा रूपांतरण देखा गया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल जन धन खातों की संख्या 58.15 करोड़ से भी अधिक हो चुकी है, जिनमें जमा राशि 3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर है। सरकार ने यह भी कहा कि इन खातों में लगभग 55 प्रतिशत महिलाओं के नाम हैं, जबकि लगभग 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के निवासियों के पास हैं।

विशेषज्ञों ने इस विकास को पिछले दशक में देश के वित्तीय परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने JAM त्रिमूर्ति — जन धन, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी — को उन लाखों लोगों तक बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करने का प्रमुख कारण बताया जो पहले औपचारिक वित्तीय प्रणाली के बाहर थे।

विश्लेषकों का मानना है कि वित्तीय समावेशन का अगला चरण विशेषकर महिलाओं में दीर्घकालिक वित्तीय भागीदारी में सुधार पर केन्द्रित होना चाहिए। जहां बैंक खातों तक पहुंच में पर्याप्त उन्नति हुई है, वहीं कई खाताधारक अब भी संपत्ति निर्माण, निवेश के अवसरों और वित्तीय स्वतंत्रता का पूरा लाभ नहीं उठा पाए हैं।

वित्तीय पर्यवेक्षकों ने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं, जिनमें 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का दृष्टिकोण शामिल है, को पूरा करने के लिए संपत्ति स्वामित्व, वित्तीय साक्षरता और निवेश प्रणालियों में सक्रिय भागीदारी पर अधिक जोर देने की आवश्यकता होगी।

वित्तीय विशेषज्ञ अरुण मेनन ने कहा कि देश ने महिलाओं में बैंकिंग पहुंच का सफल विस्तार किया है, पर अगला चुनौतीपूर्ण कदम उन्हें बचत, निवेश और संपत्ति के स्वामित्व के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा व दीर्घकालिक समृद्धि बनाने में सक्षम बनाना है।

सरकार का मानना है कि डिजिटलीकरण का जारी विस्तार और लक्षित कल्याण पहलकदमियाँ आने वाले वर्षों में वित्तीय भागीदारी और आर्थिक समावेशन को और मजबूत करेंगी।

By Rajeev Sharma

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