भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक संकट के समय में सुदृढ़ता दिखाई: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने सीआईआई के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में कहा

दिल्ली (राजीव शर्मा ):केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मजबूत बुनियादी सिद्धांतों और भारत के प्रति बढ़ते वैश्विक विश्वास के साथ वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने निरंतर सुदृढ़ता दिखाई है।

श्री गोयल ने कहा कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 11 महीनों के आयात करने की क्षमता है। भारत के निर्यात प्रदर्शन का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश इस वर्ष लगभग 863 अरब अमेरिकी डॉलर के अब तक के उच्चतम निर्यात आंकड़े को हासिल करने के लिए तैयार है। उन्होंने आगे कहा कि वस्तुओं और सेवाओं दोनों में भारत का व्यापार घाटा देश के वार्षिक रैमिटेंस से काफी कम है, जो मजबूत आर्थिक प्रदर्शन को दर्शाता है।

मंत्री महोदय ने कहा कि भारत ने हमेशा संकटों को अवसरों में परिवर्तित किया है और देश विपरीत परिस्थितियों में हमेशा और भी मजबूत होकर उभरा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक स्थिति को भारत के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए, ताकि वह अधिक कुशल, उत्पादक और आत्मनिर्भर बन सके।

आत्मनिर्भर भारत के विजन का जिक्र करते हुए श्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भरता और भारतीय क्षमताओं पर विश्वास का सिद्धांत लगातार कायम रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की विकास गाथा को मजबूत करने के लिए सरकार और उद्योग जगत को मिलकर काम करना होगा।

श्री गोयल ने भारतीय उद्योगों के आपसी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि भारतीय उद्योगों का सामूहिक विकास देश के भविष्य को मजबूत करेगा। उन्होंने आत्मनिर्भरता, गुणवत्ता, उत्पादकता, नवाचार और सामूहिक कार्रवाई के संबंध में पिछले वर्षों में दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सिद्धांत सरकार की आर्थिक सोच का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

श्री गोयल ने दक्षता में सुधार और अपव्यय को कम करने के उद्देश्य से की गई कई पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें 2015 में शुरू किया गया एलईडी लाईटिंग कार्यक्रम भी शामिल है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा दक्षता के उपायों ने सालाना लगभग 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर की ऊर्जा लागत बचाने में मदद की है, साथ ही सततता और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया है।

श्री गोयल ने सभी क्षेत्रों में अधिक दक्षता लाने का आह्वान करते हुए उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे अपव्यय को कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और आयात लागत को हर संभव तरीके से घटाने पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि मेट्रो और रैपिड रेल प्रणाली सहित सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना में निवेश, साथ ही उद्योग और नागरिकों के सचेत प्रयासों से सामूहिक रूप से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

भारत के मुक्त व्यापार समझौतों पर श्री गोयल ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में 38 देशों के साथ हस्ताक्षरित नौ मुक्त व्यापार समझौते विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ हैं और इनसे भारत को निवेश आकर्षित करने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ये देश भारत के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बजाय पूरक की भूमिका निभाती है और महत्वपूर्ण आयात मांग वाले बड़े वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करते हैं।

श्री गोयल ने कहा कि स्विट्जरलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ के देशों जैसे देशों की प्रति व्यक्ति आय भारत से कहीं अधिक है और वे भारत की तुलना में कम लागत पर उत्पादों का निर्माण नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि हालांकि इन अर्थव्यवस्थाओं के पास मजबूत प्रौद्योगिकीय और औद्योगिक क्षमताएं हैं, लेकिन भारत के पास प्रतिस्पर्धी विनिर्माण और प्रतिभा का लाभ है, जो देश को इन बड़े बाजारों का अधिक प्रभावी ढंग से लाभ उठाने में मदद कर सकता है।

मंत्री महोदय ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों का उद्देश्य भारत की निर्यात क्षमताओं को मजबूत करना, निवेश बढ़ाना और वैश्विक बाजारों में भारतीय व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा करना है। उन्होंने उद्योग जगत से इन समझौतों का लाभ उठाकर अपनी अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति का विस्तार करने और निर्यात वृद्धि को गति देने का आग्रह किया।

वैश्विक व्यापार के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए श्री गोयल ने कहा कि आधुनिक व्यापार समझौतों में कुशल पेशेवरों और सेवाओं की आवाजाही के बढ़ते महत्व को दर्शाते हुए गतिशीलता साझेदारी के मजबूत घटक तेजी से शामिल किए जा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वर्तमान में 10 मिलियन से अधिक भारतीय खाड़ी देशों में कार्यरत हैं, जबकि अकेले संयुक्त अरब अमीरात में कार्यरत भारतीयों की संख्या पिछले 12-13 वर्षों में लगभग 1.8 मिलियन से बढ़कर 4.5 मिलियन हो गई है, जो वैश्विक सेवा अर्थव्यवस्था में भारत के बढ़ते योगदान को रेखांकित करता है।

श्री गोयल ने उद्योग जगत से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग का लाभ उठाने का आग्रह किया, ताकि वे विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा दे सकें। उन्होंने कहा कि एआई को केवल लागत कम करने के साधन के रूप में नहीं, बल्कि व्यापार विस्तार, दक्षता और बाजार विकास के साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। श्री गोयल ने सीआईआई जैसे उद्योग संगठनों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी क्षमता पर गहराई से विचार करने और उन क्षेत्रों की जांच करने का आह्वान किया जहां एआई व्यवसायों को अधिक स्मार्ट, अधिक उत्पादक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकता है।

मंत्री महोदय ने उद्योग जगत को सलाह दी कि वे कर्मचारियों को एआई के बेहतर उपयोगों में प्रशिक्षित करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाएं और कहा कि कंपनियों को एआई का उपयोग उत्पादकता बढ़ाने, बड़े बाजारों पर कब्जा करने और कारोबार को बढ़ाने के लिए करना चाहिए, न कि केवल कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि कुछ क्षेत्रों को प्रोद्योगिकीय व्यवधान का सामना करना पड़ सकता है, भारत ने कॉल सेंटरों से बीपीओ, सॉफ्टवेयर सेवाओं और उच्च स्तरीय व्यावसायिक समाधानों की ओर बढ़ते हुए लगातार बदलती प्रौद्योगिकियों के अनुरूप खुद को ढाला है।

उन्होंने आगे कहा कि आतिथ्य, आभूषण और कई जन-केंद्रित उद्योग जैसे क्षेत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भी मानवीय रचनात्मकता और कौशल पर बहुत अधिक निर्भर रहना जारी रखेंगे।

वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) की तीव्र वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए श्री गोयल ने कहा कि भारत में लगभग 1,800 जीसीसी पहले से ही कार्यरत हैं और आने वाले वर्षों में 500 और स्थापित होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि जीसीसी से निर्यात में प्रतिवर्ष लगभग 40-50 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है और वर्तमान में यह लगभग 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है, जो सीधे तौर पर लगभग 2 मिलियन लोगों को रोजगार देता है।

श्री गोयल ने प्रयोगशाला में उत्पादित हीरे, नवीकरणीय ऊर्जा आधारित विनिर्माण और कृत्रिम आभूषण जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि ये क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर सकते हैं और निर्यात के नए अवसर बना सकती है।

श्री गोयल ने उद्योग जगत से अगले पांच से छह वर्षों में 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम करने का आह्वान करते हुए कहा कि लगभग 15 प्रतिशत की वार्षिक निर्यात वृद्धि के साथ यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने भारतीय उद्योग की क्षमताओं पर विश्वास व्यक्त किया और कहा कि ऑटोमोबाइल, इस्पात और स्टार्टअप सहित अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में नवाचार, प्रतिस्पर्धा और वैश्विक बाजारों में विस्तार के माध्यम से इस वृद्धि को गति देने की क्षमता है।

मंत्री महोदय ने उद्योग जगत के लिए चार सूत्रीय आह्वान के साथ अपना भाषण समाप्त किया और व्यवसायों से “असेंबल्‍ड इन इंडिया” से “डिज़ाइन्‍ड, इंजीनियर्ड और मैन्‍युफैक्‍चर्ड इन इंडिया” की ओर बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने उद्योग जगत से मूल्य श्रृंखला में ऊपर उठने, गहरी मूल्य श्रृंखलाओं में प्रवेश करने, उच्च मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित करने और महत्वपूर्ण घटकों में आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। श्री गोयल ने सुझाव दिया कि उद्योग निकाय और कंपनियां आने वाले वर्षों में स्वदेशीकरण, स्थानीयकरण, आयात की तुलना में निर्यात और शुद्ध विदेशी मुद्रा आय जैसे क्षेत्रों में प्रगति को मापने के लिए स्कोरकार्ड बना सकती हैं।

गुणवत्ता पर समझौता न करने पर जोर देते हुए श्री गोयल ने “शून्य दोष, शून्य प्रभाव” वाले विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया और कहा कि सततता और जलवायु चेतना भारत की विनिर्माण विकास गाथा का अभिन्न अंग होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रांड इंडिया को उच्च गुणवत्ता मानकों को प्रतिबिंबित करना चाहिए और भविष्य में एक वैश्विक बेंचमार्क बनना चाहिए।

मंत्री महोदय ने अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार में निवेश बढ़ाने के महत्व पर भी बल दिया और भारत में अनुसंधान एवं विकास के लिए वैश्विक निवेश आकर्षित करने का आह्वान किया। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे घरेलू मानकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाएं और अधिक वैश्विक प्रतिस्पर्धी दृष्टिकोण अपनाएं।

श्री गोयल ने उद्योग जगत से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति के दौरान विश्व का नेतृत्व किया था, उसी प्रकार भारतीय प्रतिभा नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के युग में भी विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम है।

By Rajeev Sharma

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