चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): पंजाब में भीषण गर्मी और चिपचिपे मौसम का दौर लगातार जारी है क्योंकि पूरे राज्य में मानसून की गतिविधियां धीमी पड़ी हुई हैं। पिछले कुछ दिनों से बारिश न होने के कारण तापमान मौसमी औसत से ऊपर चला गया है, जिसके चलते मौसम विभाग को कई जिलों में गर्मी और उमस के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी करना पड़ा है।
यह एडवाइजरी बठिंडा, मानसा, बरनाला, मोगा, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट और श्री मुक्तसर साहिब के लिए जारी की गई है, जहां दिन के समय मौसम विशेष रूप से असुविधाजनक रहने की आशंका है। हालांकि उत्तरी और पूर्वी पंजाब के कुछ हिस्सों में छिटपुट बौछारें पड़ने की संभावना है, लेकिन मौसम अधिकारियों का कहना है कि इनसे कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
गुरुवार को पंजाब में अधिकतम तापमान में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो सामान्य से लगभग तीन डिग्री सेल्सियस ऊपर रहा। पारा 41.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने के साथ बठिंडा राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जबकि कई अन्य जिलों में भी जुलाई के मध्य के हिसाब से असामान्य रूप से गर्म स्थिति देखी गई।
कमजोर मानसूनी हवाओं से प्रभावित हुई बारिश
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून की रफ्तार में आई मौजूदा सुस्ती का कारण इसके सक्रिय वेदर सिस्टम (मौसम प्रणाली) का पूर्वी भारत की ओर खिसक जाना है। कम दबाव का चक्रवाती परिसंचरण (low-pressure circulation), जो आमतौर पर उत्तर-पश्चिमी राज्यों में नमी लाता है, वर्तमान में पूर्वी क्षेत्र में बना हुआ है, जिससे पंजाब में बारिश लाने वाले बादलों की आवाजाही कम हो गई है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हालांकि वायुमंडल में पहले से मौजूद नमी के कारण उमस का स्तर ऊंचा बना हुआ है, लेकिन किसी मजबूत वेदर सिस्टम के न होने से व्यापक बारिश नहीं हो पा रही है।
अगले सप्ताह से सुधार की उम्मीद
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग को उम्मीद है कि 19 जुलाई से मौसम के मिजाज में बदलाव आएगा, क्योंकि उत्तर-पश्चिम भारत में नई मानसूनी हवाएं मजबूत होंगी। 20 जुलाई से 22 जुलाई के बीच बारिश की गतिविधियों में काफी वृद्धि होने की संभावना है, और कई जिलों में मध्यम से भारी बौछारें पड़ने की उम्मीद है।
बारिश की इस वापसी से दिन के तापमान में कई डिग्री की गिरावट आने और राज्य भर में उमस के स्तर से राहत मिलने की उम्मीद है।
ऊंचे तापमान से बढ़ी बिजली की मांग
लगातार जारी गर्मी के इस दौर ने बिजली की खपत को भी बढ़ा दिया है। राज्य की बिजली उपयोगिताओं (पावर यूटिलिटीज) ने 14,571 मेगावाट (MW) की मांग दर्ज की, जिसके कारण स्थानीय उत्पादन और खपत के बीच के अंतर को पाटने के लिए राष्ट्रीय ग्रिड से भारी सहायता की आवश्यकता पड़ी। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि बढ़ा हुआ लोड होने के बावजूद बिजली की आपूर्ति स्थिर बनी रही।
जलाशयों का जलस्तर नियंत्रण में
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि भाखड़ा और पोंग दोनों बांध अपने खतरे के निशान से काफी नीचे बने हुए हैं, जबकि उन्हें ऊपरी जलग्रहण (कैचमेंट) क्षेत्रों से लगातार पानी की आवक मिल रही है। जलाशयों के जलस्तर को सुरक्षित बनाए रखने और निचले इलाकों में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पानी की निकासी को नियंत्रित किया जा रहा है।
मौसम विशेषज्ञों ने निवासियों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने (हाइड्रेटेड रहने), दोपहर की धूप में लंबे समय तक निकलने से बचने और आधिकारिक पूर्वानुमानों से अपडेट रहने की सलाह दी है, क्योंकि मानसून की बदलती स्थितियां आने वाले दिनों में मौसम में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
