चंडीगढ़(बलविंदर सिंह):हरियाणा के सहकारिता, कारागार, पर्यटन, विरासत एवं निर्वाचन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर शाहाबाद, करनाल और पानीपत की सहकारी चीनी मिलों को विभिन्न श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार मिलना हरियाणा के लिए गौरव की बात है। प्रदेश सहकारी चीनी मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक और बहुउत्पादक बायो-एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
डॉ. अरविंद शर्मा मंगलवार को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज द्वारा आयोजित नेशनल शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्क्लेव, इंडस्ट्री एग्जीबिशन एंड इनोवेशन एक्सपो को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, कृष्ण पाल गुर्जर तथा फेडरेशन के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
शाहाबाद, करनाल और पानीपत मिलों ने बढ़ाया हरियाणा का गौरव
डॉ. शर्मा ने बताया कि शाहाबाद सहकारी चीनी मिल को पेराई सत्र 2024-25 के लिए ‘अन्य रिकवरी क्षेत्र’ में तकनीकी दक्षता का प्रथम पुरस्कार मिला है। करनाल सहकारी चीनी मिल ने तकनीकी दक्षता और गन्ना विकास के क्षेत्र में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया, जबकि पानीपत सहकारी चीनी मिल को तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में प्रथम पुरस्कार मिला है। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार किसानों, मिल कर्मचारियों, अभियंताओं और प्रबंधन के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं।
690 KLPD एथेनॉल परियोजनाओं पर करीब 1200 करोड़ रुपये का निवेश
डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रदेश में 690 KLPD क्षमता से जुड़े एथेनॉल प्रोजेक्ट्स पर करीब 1200 करोड़ रुपये के निवेश की दिशा में काम किया जा रहा है। पानीपत में 90 KLPD क्षमता की एथेनॉल परियोजना पर करीब 200 करोड़ रुपये के निवेश की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। भविष्य में चीनी के साथ एथेनॉल, बिजली, शीरा, बगास, प्रेसमड, बायो-सीबीजी और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों पर जोर दिया जाएगा।
285.92 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई, 12.20 करोड़ यूनिट बिजली ग्रिड को दी
सहकारिता मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सहकारी चीनी मिलों को किसान हितैषी होने के साथ आर्थिक रूप से सक्षम और आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। हरियाणा शुगरफेड से जुड़ी सहकारी चीनी मिलों ने 285.92 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर करीब 26.24 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। मिलों ने को-जनरेशन के माध्यम से करीब 12.20 करोड़ यूनिट बिजली ग्रिड को निर्यात की, जिससे लगभग 76.60 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
किसान रहेगा पूरी व्यवस्था के केंद्र में
डॉ. शर्मा ने कहा कि गन्ना किसान इस पूरी व्यवस्था के केंद्र में है। गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने के लिए चार फुट की दूरी पर बिजाई, उन्नत किस्मों, टिश्यू कल्चर और मशीनी कटाई को प्रोत्साहित किया जा रहा है। चार फुट की दूरी पर बिजाई करने वाले किसानों को 5,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य प्रदेश की सभी 10 सहकारी चीनी मिलों को आधुनिक, बहुउत्पादक, पारदर्शी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर संस्थानों के रूप में विकसित करना है। गन्ना किसान मजबूत होगा तो मिल मजबूत होगी और मिल मजबूत होगी तो सहकारिता तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
