नई दिल्ली(राजीव शर्मा): यूरोपीय संघ ने अपने संशोधित नियामक ढांचे के तहत सितंबर 2026 के बाद भी भारतीय एक्वाकल्चर उत्पाद, अंडे, शहद और पशु केसिंग्स के आयात जारी रखने की मंज़ूरी दे कर भारत के कृषि और समुद्री निर्यात को बड़ा समर्थन दिया है।
यह निर्णय यूरोपीय आयोग द्वारा एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) को लेकर वैश्विक चिंताओं के बीच अपने खाद्य सुरक्षा और पशु-उत्पत्ति उत्पाद नियमों में संशोधन लागू करने के बाद लिया गया है। अद्यतन नियम सितंबर 2026 से लागू होंगे और यूरोपीय बाजारों में चयनित पशु-आधारित उत्पादों का निर्यात करने वाले देशों पर कड़ी शर्तें लगाएंगे।
कठोर मानदंडों के बावजूद, भारत उन देशों में बना रहा है जिन्हें EU सदस्य देशों को इन उत्पादों की आपूर्ति जारी रखने के लिए अधिकृत किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह विकास विशेष रूप से भारत के समुद्री खाद्य उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मछली और मत्स्य उत्पादों का यूरोपीय संघ को निर्यात वर्तमान में वार्षिक लगभग USD 1.59 बिलियन का है।
सरकारी सूत्रों ने इस निर्णय को भारतीय निर्यातकों और नियामक एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया, यह कहते हुए कि यूरोपीय बाजार तक निर्बाध पहुँच प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में वृद्धि बनाए रखने में मदद करेगी।
वाणिज्य मंत्रालय और निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) अनुपालन मानकों, प्रमाणन प्रणालियों और खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं पर यूरोपीय अधिकारियों के साथ निरंतर वार्ताओं में लगे रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि भारत ने विकसित हो रहे EU नियमों के अनुरूप अपने निरीक्षण और परीक्षण ढांचे को हाल के वर्षों में मजबूत किया है।
अधिकारियों ने निर्यात खेपों की निगरानी और प्रमाणन प्रक्रियाओं में सुधार करने का भी काम किया है ताकि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।
वाणिज्य मंत्रालय मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA), निर्यात इकाइयों और EU-मान्यता प्राप्त संस्थाओं के साथ समन्वय जारी रखेगा ताकि नए नियामक शर्तों के लागू होने पर सुचारु क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
उद्योग के हितधारक मानते हैं कि यह निर्णय निर्यातकों को स्थिरता प्रदान करेगा और भारत को प्रतिस्पर्धी यूरोपीय बाजार में अपनी स्थिति बनाए रखने में मदद करेगा। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि EU बाजारों तक निरंतर पहुँच मत्स्य पालन, मधु-पालन और संसाधित पशु-उत्पाद क्षेत्रों में वृद्धि के नए अवसर पैदा कर सकती है।
यह नवीनतम विकास उस समय भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है जब खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों से जुड़ी वैश्विक व्यापार नियमावली और कड़ी होती जा रही है।
