सौर ऊर्जा, जल सुरक्षा और ऊर्जा भंडारण के लिए ग्रीन फाइनेंसिंग पर जोर

चंडीगढ़(बलविंदर सिंह): हरियाणा सरकार ने सिंचाई, सड़कों, पेयजल आपूर्ति तथा भंडारण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2,295.27 करोड़ रुपये की ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार किए हैं। इनमें से 2,180.50 करोड़ रुपये की ऋण सहायता नाबार्ड के ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (आरआईडीएफ) के तहत प्रस्तावित है।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां एक बैठक में राज्य में नाबार्ड की सहायता से चल रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा संबंधित विभागों द्वारा ऋण निकासी के दावे समय पर प्रस्तुत करने पर जोर दिया। वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली छह प्रमुख परियोजनाओं में सिंचाई, पेयजल, सड़क और वेयरहाउसिंग बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश प्रस्तावित है।

नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती निवेदिता तिवारी ने बताया कि नए प्रस्तावों में 315.36 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली सिंचाई परियोजना शामिल है, जिसके लिए 299.59 करोड़ रुपये की आरआईडीएफ सहायता प्रस्तावित है। इसके अलावा, सड़कों के सुधार, चैड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण से संबंधित 57 परियोजनाओं की कुल लागत 495.71 करोड़ रुपये है, जिनके लिए 470.92 करोड़ रुपये की आरआईडीएफ सहायता प्रस्तावित है। दोनों प्रस्ताव आरआईडीएफ पोर्टल पर प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

नूंह और पलवल जिलों के पांच महाग्रामों-बिछोर, बिसरू, नई, सिंगार और पिंगवां को कवर करने वाली एक बड़ी ग्रामीण पेयजल परियोजना की कुल लागत 744.59 करोड़ रुपये है। इसमें 707.36 करोड़ रुपये की आरआईडीएफ सहायता प्रस्तावित है। इस परियोजना के तहत यमुना के बाढ़ क्षेत्र में रैनी वैल तथा संबंधित बुनियादी ढांचे का निर्माण करके जल स्रोतों की क्षमता बढ़ाने की योजना है। आरआईडीएफ के तहत अपेक्षित मानक आवंटन को देखते हुए परियोजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है। इसके प्रथम चरण के लिए 299 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता संबंधी प्रस्ताव को हरियाणा वित्त विभाग द्वारा स्वीकृति दी जानी है।

एक अन्य प्रस्ताव के तहत हरियाणा राज्य भंडारण निगम (एचएसडब्ल्यूसी) के पास उपलब्ध खाली भूमि पर 2,30,508 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता वाले गोदामों के निर्माण तथा निचले क्षेत्रों में स्थित परिसरों में 1,23,664 मीट्रिक टन गोदाम क्षमता के पुनर्निर्माण के लिए 290.74 करोड़ रुपये का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। इसमें 276.20 करोड़ रुपये का ऋण घटक प्रस्तावित है। वित्त विभाग ने इस परियोजना को नाबार्ड की अवसंरचना विकास सहायता (एनआईडीए) योजना के तहत वित्तपोषण के लिए भी विचार किए जाने की स्वीकृति दी है।

मुख्य सचिव ने सोनीपत के गन्नौर स्थित इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट (आईआईएचएम) की भी समीक्षा की। इसके लिए नाबार्ड ने एनआईडीए के तहत 1,850 करोड़ रुपये का सावधि ऋण स्वीकृत किया है। परियोजना का वित्तीय चरणबद्ध क्रियान्वयन वर्ष 2025-26 से 2027-28 तक तीन वर्षों के लिए निर्धारित है। वर्ष 2025-26 में 740 करोड़ रुपये के निर्धारित चरण के मुकाबले 451 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे 289 करोड़ रुपये का वितरण अंतर रहा। वर्ष 2026-27 के लिए चरणबद्ध वितरण 740 करोड़ रुपये है। एचआईएचएमसीएल को परियोजना की भौतिक प्रगति के अनुरूप ऋण निकासी के दावे प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जा सके।

बैठक में सूक्ष्म सिंचाई को भी प्रमुखता से समीक्षा के दायरे में रखा गया। समिति द्वारा सूक्ष्म सिंचाई कोष (एमआईएफ) के तहत 264.24 करोड़ रुपये के ऋण घटक वाली चार नई परियोजनाओं की संचालन सिफारिश की गई है। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने भी हरियाणा सरकार के मिकाडा के ऋण आवेदन को एमआईएफ के तहत नाबार्ड से वित्तीय सहायता की स्वीकृति हेतु विचार किए जाने की सिफारिश की है।

बैठक में विभिन्न विभागों के अंतर्गत चल रही आरआईडीएफ परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। वित्तीय चरणबद्धता के अनुसार 17 अगस्त, 2026 तक आरआईडीएफ की 28वीं से 31वीं किस्त के तहत चल रही परियोजनाओं में 962.81 करोड़ रुपये के वितरण अंतर की जानकारी दी गई। संबंधित विभागों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के अनुरूप नियमित रूप से ऋण निकासी के दावे प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। सिंचाई, सड़क, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, शिक्षा, पशुपालन, कृषि विपणन, वेयरहाउसिंग तथा अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की विभागवार प्रगति की भी समीक्षा की गई।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2026-27 के दौरान हरियाणा के लिए नाबार्ड से 2,300 करोड़ रुपये की उधार सीमा को मंजूरी दी है। आरआईडीएफ और एमआईएफ के तहत लगभग 1,600 करोड़ रुपये के संभावित वितरण को देखते हुए राज्य के पास उपलब्ध उधार सीमा का बेहतर उपयोग करने के लिए आरआईएएस, एनआईडीए तथा नाबार्ड ग्रीन लेंडिंग फैसिलिटी (एनजीएलएफ) के तहत अतिरिक्त बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की पहचान की जा सकती है।

बैठक में हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (हरेडा) द्वारा सरकारी एवं सार्वजनिक भवनों के सोलराइजेशन के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। प्रथम चरण में लगभग 100 मेगावाट क्षमता के सोलराइजेशन का प्रस्ताव है, जिसकी अनुमानित लागत 470 करोड़ रुपये है। इसके लिए लगभग 423 करोड़ रुपये की नाबार्ड सहायता प्रस्तावित है। पात्रता एवं लागू दिशा-निर्देशों के अधीन इस पहल को नाबार्ड की उपयुक्त वित्तीय सहायता योजना के तहत विचार किया जा सकता है।

‘वॉटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ को भी नाबार्ड की वित्तीय सहायता के लिए एक महत्वपूर्ण संभावित क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम की कुल अनुमानित लागत लगभग 5,714 करोड़ रुपये है। इसमें करीब 4,000 करोड़ रुपये विश्व बैंक सहायता तथा 1,714 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा शामिल है। कार्यक्रम का उद्देश्य भूजल पुनर्भरण, सिंचाई एवं जल उपयोग दक्षता में सुधार, जल निकायों एवं जलधाराओं का पुनरुद्धार, सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने तथा उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग के माध्यम से जल सुरक्षा और जलवायु अनुकूलता को मजबूत करना है। राज्य सरकार के महत्वपूर्ण वित्तीय हिस्से को देखते हुए पात्रता एवं लागू दिशा-निर्देशों के अधीन आरआईएएस के तहत राज्य के हिस्से के वित्तपोषण के लिए नाबार्ड से सहायता की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया।

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने आरआईएएस/एनआईडीए के तहत संभावित वित्तपोषण के लिए 2,068.33 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चार परियोजनाओं की भी पहचान की है।

बैठक में चल रही आरआईडीएफ और एमआईएफ परियोजनाओं के क्रियान्वयन एवं वित्तीय वितरण में तेजी लाने के साथ-साथ राज्य की उभरती जरूरतों के लिए नाबार्ड की व्यापक वित्तीय सहायता योजनाओं का लाभ उठाने पर विशेष जोर दिया गया। इनमें जल सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, टिकाऊ बुनियादी ढांचा तथा अन्य पात्र हरित एवं जलवायु-अनुकूल परियोजनाएं शामिल हैं।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण कुमार गुप्ता, लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अपूर्व कुमार सिंह, पशुपालन विभाग के प्रधान सचिव श्री विजय सिंह दहिया तथा राज्य सरकार और नाबार्ड के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

By Balwinder Singh

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