मोगा की AAP विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा के ठिकानों पर ED की रेड, 7 जगहों पर तलाशी

पंजाब के मोगा से आम आदमी पार्टी (AAP) की विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा के ठिकानों पर बुधवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की। ED की टीमों ने विधायक के दोनों आवासों सहित पंजाब में कुल सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई सरकारी जमीन के कथित फर्जी इंतकाल और मुआवजे की रकम के गलत भुगतान से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई। अधिकारियों के मुताबिक, जांच विधायक के पति डॉ. राकेश अरोड़ा, परिवार के सदस्यों, सहयोगियों और उनसे जुड़े अन्य परिसरों तक भी पहुंची। इनमें डॉ. राकेश अरोड़ा से संबंधित एक नशा मुक्ति केंद्र भी शामिल है।

जानकारी के अनुसार, ED की टीमें बुधवार सुबह करीब 6 बजे कई वाहनों में विधायक के आवासों पर पहुंचीं। तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। कार्रवाई के समय विधायक अपने आवास पर मौजूद थीं और अधिकारियों ने उनसे पूछताछ भी की। मोगा में उनके आवासों के अलावा अन्य संपत्तियों और एक फ्लैट पर भी तलाशी ली गई। कार्रवाई की खबर फैलने के बाद AAP समर्थक और कार्यकर्ता विधायक के आवास के बाहर एकत्र हुए तथा केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया।

ED की जांच पंजाब पुलिस की 16 जून 2024 को दर्ज FIR पर आधारित है। यह मामला मोगा जिले के धर्मकोट क्षेत्र में नेशनल हाईवे-754A के निर्माण के लिए अधिग्रहित सरकारी जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का फर्जी इंतकाल दर्ज कराकर मुआवजे की रकम गलत तरीके से हासिल की गई। ED ने इसी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच शुरू की है।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस FIR में किशनपुरा कलां राजस्व सर्कल के पटवारी नवदीप सिंह और निजी लाभार्थी बताई गई दिलखुश कुमारी के नाम दर्ज हैं। शिकायत में कहा गया है कि धर्मकोट तहसील के अद्रमन गांव में अधिग्रहित जमीन के बदले दिलखुश कुमारी को 1,00,65,724 रुपये का मुआवजा दिया गया था। बाद की जांच में संबंधित जमीन पंजाब सरकार की बताई गई। आरोप है कि फर्जी इंतकाल और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर के जरिए सरकारी मुआवजे की रकम हासिल की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी, मोहाली ने इंतकाल से जुड़े दस्तावेजों पर तत्कालीन तहसीलदार के हस्ताक्षरों को कथित तौर पर जाली पाया। जांच में यह भी सामने आया कि पटवारी ने सॉफ्टवेयर में दर्ज एंट्री को पीछे की तारीख में दिखाया था और रिकॉर्ड में 6 कनाल 18 मरले अतिरिक्त जमीन भी शामिल की गई थी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में दर्ज मूल FIR में विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा और उनके परिवार के सदस्यों के नाम शामिल नहीं थे।

फिलहाल ED की तलाशी और जांच जारी है। एजेंसी की ओर से तलाशी के दौरान किसी नकदी या दस्तावेज की बरामदगी को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। विधायक या उनके परिवार की ओर से भी इस कार्रवाई पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया था।

By Gurpreet Singh

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