नई दिल्ली(राजीव शर्मा): परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) ने एक बार फिर से देश की वैज्ञानिक प्रतिभाओं के संवर्धन में अपनी गहरी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया है। राष्ट्रीय ओलंपियाड कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षित विद्यार्थियों ने 2026 के अंतर्राष्ट्रीय भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड में देश के इतिहास का सर्वोत्तम प्रदर्शन किया है। यह सफलता भारतीय युवाओं की अद्वितीय क्षमताओं का प्रमाण है और दशकों से सृजित राष्ट्रीय इकोसिस्टम की शक्ति को दर्शाता है, जो देश के प्रतिभाशाली युवाओं की पहचान, मार्गदर्शन और प्रेरणा के लिए समर्पित है। ओलंपियाड टीमों की इस अद्वितीय सफलता से स्पष्ट होता है कि भारत की युवा शक्ति और प्रतिभाशाली छात्रों की वैश्विक मंच पर उनकी पूरी क्षमता को पहचान दिलाने के लिए लगातार निवेश किया जा रहा है।
वर्ष 2026 का ओलंपियाड सत्र अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाड में भारत के प्रदर्शन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ। चार ओलंपियाड में भारतीय दल ने 12 स्वर्ण और 7 रजत पदक जीते, जिनमें भौतिकी और रसायन विज्ञान में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक शामिल हैं। इसके अलावा, जीव विज्ञान और गणित में भी भारत ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विश्व के उत्कृष्ट युवा प्रतिभाओं के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए, भारतीय छात्रों ने असाधारण वैज्ञानिक क्षमता, दृढ़ता एवं नवाचार का प्रदर्शन किया। इससे देश को अपार गौरव प्राप्त हुआ और विज्ञान एवं गणित के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति के रूप में पहचान मिली।
परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने छात्रों की असाधारण उपलब्धियों पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाड में भारतीय छात्रों का उत्कृष्ट प्रदर्शन राष्ट्रीय गौरव का विषय है और भारत की वैज्ञानिक भावना का उत्सव है। ये उपलब्धियां छात्रों के समर्पण, मार्गदर्शकों और शिक्षकों के अमूल्य मार्गदर्शन और दशकों से अथक परिश्रम से निर्मित संस्थागत व्यवस्था की मजबूती को दर्शाती हैं।
इस सफलता का मूल आधार होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र (एचबीसीएसई) है, जो परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन एक सहायता प्राप्त संस्थान, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) का एक राष्ट्रीय केंद्र है। भारत के विज्ञान और गणित ओलंपियाड कार्यक्रमों के राष्ट्रीय नोडल केंद्र के रूप में, होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र प्रतिभा की पहचान, मार्गदर्शन, उन्नत प्रशिक्षण और परामर्श की एक कठोर, बहु-स्तरीय प्रक्रिया संचालित करता है, जिससे देश के सबसे प्रतिभाशाली प्री-यूनिवर्सिटी स्तर के छात्रों को उच्चतम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार किया जाता है। परमाणु ऊर्जा विभाग के निरंतर संस्थागत समर्थन और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के माध्यम से यह कार्यक्रम विश्व के सबसे सम्मानित ओलंपियाड प्रणालियों में से एक के रूप में विकसित हुआ है।
भारत के ओलंपियाड कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में परमाणु ऊर्जा विभाग के निरंतर समर्थन की सराहना करते हुए, एचबीसीएसई के केंद्र निदेशक प्रोफेसर अर्नब भट्टाचार्य ने कहा कि वे इस विभाग के बहुमूल्य समर्थन और देश में वैज्ञानिक प्रतिभाओं को विकसित करने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के लिए अत्यंत आभारी हैं। हमारे छात्रों का उत्कृष्ट प्रदर्शन हमारी अगली पीढ़ी के युवा विद्वानों की पहचान करने, उनका पोषण करने और उन्हें प्रेरित करने के मिशन को सिद्ध करता है, साथ ही पूरे देश में विज्ञान और गणित के प्रति उत्कृष्टता की संस्कृति को प्रोत्साहित करता है।
परमाणु ऊर्जा विभाग का ओलंपियाड में योगदान केवल प्रायोजन तक सीमित नहीं रहता है। टीआईएफआर और एचबीसीएसई को समर्थन देकर, विभाग ने एक मजबूत राष्ट्रीय तंत्र के विकास में योगदान दिया है, जिससे वैज्ञानिक प्रतिभाओं के विकास के लिए देशभर के वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों और विषय विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया जा रहा है। इस सहयोगात्मक ढांचे से कई पीढ़ियों के ओलंपियन उभरे हैं जो भारत और विदेशों में उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक नेतृत्व में अपनी पहचान बना रहे हैं।
परमाणु ऊर्जा विभाग सभी पदक विजेताओं, टीम लीडरों, मेंटरों, वैज्ञानिक पर्यवेक्षकों, एचबीसीएसई के ओलंपियाड सेलों, शिक्षक संगठनों और देशव्यापी विशेषज्ञ के नेटवर्क को उनके समर्पण के लिए बधाई देता है, जिनके प्रयासों से ये उपलब्धियां संभव हो पाई हैं। विभाग विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, अंतरिक्ष विभाग और भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की साझेदारी की भी सराहना करता है, जिनकी सहायता से भारत का राष्ट्रीय ओलंपियाड कार्यक्रम और मजबूत हो सका है।
2026 में भारतीय ओलंपियाड टीमों की सफलताएं यह प्रमाणित करती हैं कि वैज्ञानिक शिक्षा और प्रतिभा संवर्धन में किए गए निरंतर निवेश का कितना गहरा असर होता है। जैसे-जैसे राष्ट्र वैश्विक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है, परमाणु ऊर्जा विभाग युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित करने, उत्कृष्टता के संस्थानों को सशक्त बनाने और विज्ञान, नवाचार एवं मानवीय क्षमता से पोषित भविष्य की निर्माण प्रक्रिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है।
