दिल्ली का जीरो-टॉलरेंस: अवैध निर्माणों पर कड़ा एक्शन

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):हौज़ रानी में एक बेड-एंड-ब्रेकफ़ास्ट सुविधा में हुई घातक आग में 21 लोगों की मौत के बाद राजधानी भर में अवैध निर्माणों और असुरक्षित वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ दिल्ली सरकार ने आक्रामक अभियान शुरू किया है।

प्राधिकरणों ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कार्रवाई तेज़ हुई है, नगर निकायों ने कई जिलों में ढाहों (demolitions), सीलिंग और निरीक्षण किए हैं। 1 जून से, नगर निगम दिल्ली (MCD) ने बिल्डिंग मानदंडों और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने के लिए 94 अनधिकृत संरचनाएँ ध्वस्त कीं और 114 संपत्तियों को सील किया।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रशासन ने अवैध निर्माणों, अतिक्रमणों और अग्नि सुरक्षा की चूकों के प्रति “ज़ीरो-टॉलरेंस” नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि सरकार एक स्थायी निगरानी तंत्र पर काम कर रही है ताकि असुरक्षित इमारतें शहर में चलती न रहें।

राजस्व विभाग के अधिकारियों ने दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में 120 से अधिक संपत्तियों का निरीक्षण किया। कई जिलों में अनधिकृत वाणिज्यिक उपयोग से लेकर स्वीकृत बिल्डिंग योजनाओं की अनुपस्थिति तक उल्लंघन पाए गए। केवल साउथ दिल्ली में ही 30 साइटों के निरीक्षण से 11 परिसरों को सील किया गया और कई नोटिस जारी किए गए।

MCD ने कहा कि हौज़ रानी, खिड़की एक्सटेंशन, सैद-उल-आजैब, सावित्री नगर, खानपुर और गौतम नगर जैसे इलाकों में जहाँ अवैध गेस्ट हाउस और वाणिज्यिक गतिविधियाँ वर्षों से बढ़ी हैं, वहीं पुलिस समर्थन के साथ प्रवर्तन अभियान चलाए जा रहे हैं।

अधिकारी उन आवासीय इमारतों को भी निशाना बना रहे हैं जिन्हें अवैध रूप से B&Bs में बदला जा रहा है और जिनके बेसमेंट से लाइब्रेरी बिना अनुमति या सुरक्षा व्यवस्था के चल रही हैं। बिल्डिंग बायलॉज़ का उल्लंघन करने के आरोप में संपत्ति मालिकों को 150 से अधिक नोटिस और ध्वस्तीकरण आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

समानांतर कदम में, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने उन इमारतों की पहचान शुरू कर दी है जो स्वीकृत निर्माण योजनाओं से काफी भिन्न हैं। अधिकारियों ने संकेत दिया कि बड़े उल्लंघनों में शामिल आर्किटेक्ट्स को ब्लैकलिस्ट करके प्राधिकरण की स्वीकृत पैनल से हटाया जा सकता है।

दिल्ली सरकार सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार के लिए दीर्घकालिक सुधारों पर भी विचार कर रही है। समीक्षा के अन्तर्गत प्रस्तावों में गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों के लिए थर्ड-पार्टी बीमा प्रणाली शामिल है। अधिकारियों ने कहा कि बीमा मंज़ूरी को संरचनात्मक और अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन से जोड़ सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, दिल्ली फायर सर्विस के पारदर्शिता और प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार के लिए एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने की योजनाएँ भी चल रही हैं।

पूरे शहर में यह प्रवर्तन अभियान 3 जून को हौज़ रानी में हुई आग त्रासदी के बाद गति पकड़ गया, जिसने घनी आबादी वाले इलाकों में अवैध निर्माण और खराब सुरक्षा अनुपालन को लेकर गंभीर चिंताएँ उजागर कीं।

By Rajeev Sharma

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