चंडीगढ़ (बलविंदर सिंह): हरियाणा के सहकारिता, कारागार, पर्यटन, निर्वाचन एवं विरासत मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा आगामी दो वर्षों के लिए गन्ने के भाव में बढ़ोतरी की घोषणा किए जाने पर उनका आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की इस घोषणा से प्रदेश के हजारों गन्ना उत्पादक किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। साथ ही गन्ने की खेती का दायरा बढ़ाने और सहकारी चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध करवाने में भी मदद मिलेगी।
सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वर्ष 2026-27 के गन्ना पेराई सत्र के लिए गन्ने का भाव 415 रुपये से बढ़ाकर 430 रुपये प्रति क्विंटल करने की घोषणा की है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 15 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अगले पेराई सत्र 2027-28 में गन्ने का भाव बढ़ाकर 450 रुपये प्रति क्विंटल करने की घोषणा की है। इस प्रकार दो वर्षों में गन्ने के भाव में कुल 35 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी होगी।
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार गन्ने के भाव में इस बढ़ोतरी से किसानों की प्रति एकड़ आय में प्रति सीजन 10 हजार से 11 हजार 500 रुपये तक का इजाफा होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य मिलने से गन्ने की खेती के प्रति रुझान बढ़ेगा। इससे प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों को पर्याप्त गन्ना उपलब्ध होने के साथ उनकी कार्यक्षमता और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार गन्ना उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा और सहकारी चीनी मिलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। चीनी मिलों के आधुनिकीकरण, एथेनॉल प्लांट स्थापित करने, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गन्ने के भाव में बढ़ोतरी का निर्णय किसानों को आर्थिक मजबूती देने के साथ प्रदेश के चीनी उद्योग को भी नई गति प्रदान करेगा। सरकार का प्रयास है कि गन्ना उत्पादक किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और उनकी उपज की खरीद तथा भुगतान की व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
