हिमाचल में केमिस्ट हड़ताल से दवाइयों की किल्लत, अस्पतालों में भारी भीड़

हिमाचल (राजीव शर्मा):हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में बुधवार को केमिस्ट और ड्रग होलसेलरों की एक दिवसीय हड़ताल के कारण दवा आपूर्ति बाधित हुई, जिससे आम मरीजों को दवाइयों की उपलब्धता में कठिनाई का सामना करना पड़ा। राज्य भर के विभिन्न कस्बों और ग्रामीण इलाकों में करीब 10,000 केमिस्ट हड़ताल में शामिल हुए, बताते हैं ट्रेड प्रतिनिधि, और उन्होंने ई-फार्मेसी कंपनियों के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ आवाज उठाई।

हड़ताल में शामिल ट्रेड संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन दवा विक्रेताओं की नीतियां पारंपरिक खुदरा फार्मेसियों के हितों के खिलाफ हैं। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि बड़े ई-फार्मेसी प्लेटफार्मों द्वारा दी जा रही भारी छूट और आक्रामक विपणन रणनीतियों के कारण छोटे फार्मेसी व्यवसायों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत स्वतंत्र दवा दुकानों के लिए यह स्थिति टिके रहना मुश्किल कर रही है।

प्रदर्शनकारियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान लागू किए गए उन प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई, जिनके तहत पंजीकृत फार्मेसियों को होम डिलीवरी की अनुमति दी गई थी। संगठनों का कहना है कि यह व्यवस्था आपातकाल के बाद भी जारी रही और इसने बड़ी ई-फार्मेसी कंपनियों की पहुंच को मजबूत कर दिया। जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में ट्रेड प्रतिनिधियों ने “असमान प्रतिस्पर्धा” का हवाला देते हुए कहा कि ऑनलाइन प्लेटफार्मों की गहरी छूट योजनाएँ मोहल्ला स्तर की दवा दुकानों की जीविकोपार्जन क्षमता को प्रभावित कर रही हैं।

केमिस्ट संघों ने चेतावनी दी कि वर्तमान रुझान जारी रहा तो कई छोटी मेडिकल स्टोर बंद हो सकती हैं, जिससे रोजगार पर प्रभाव पड़ेगा और अर्ध-शहरी व ग्रामीण इलाकों में दवाइयों तक पहुंच सीमित हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने मरीज सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी उठाया। संघ नेताओं का आरोप था कि कुछ ऑनलाइन पोर्टल्स प्रिस्क्रिप्शन की उचित जाँच नहीं करते और एंटीबायोटिक्स तथा अन्य प्रतिबंधित दवाइयों की आपूर्ति कर देते हैं। उनका कहना है कि ऐसी प्रथाएँ दवाओं के दुरुपयोग और प्रतिरोधक क्षमता (antimicrobial resistance) बढ़ाने के जोखिम को बल देती हैं, जो वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है।

हड़ताल के चलते कई जिलों में सरकारी अस्पतालों की दवा दुकानें भारी भीड़ देख रही थीं। मरीजों ने बताया कि दिन भर के शटडाउन में उन्हें सामान्य और कुछ आपातकालीन दवाइयां प्राप्त करने में कठिनाई हुई। कुछ रोगियों ने कहा कि वे जरूरी दवाइयों के लिए दूसरे शहर जाना मजबूर हुए या इंतजार करना पड़ा।

केमिस्ट एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन मुख्यतः राज्य और केंद्र सरकारों का ध्यान पारंपरिक फार्मेसी व्यवसायों की चुनौतियों की ओर आकर्षित करने के लिए था, ताकि ई-फार्मेसी प्लेटफार्मों के विनियमन और स्थानीय दुकानों के हितों की सुरक्षा हेतु ठोस कदम उठाए जाएं। व्यापारियों ने सरकार से अपील की है कि डिजिटल प्लेटफार्मों के लिये समान नियम-कानून और निगरानी सुनिश्चित की जाए, तथा महामारी के दौरान लागू किए गए अस्थायी प्रावधानों की समीक्षा की जाए।

सरकारी अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे चिंताओं को सुनेंगे और आवश्यक समाधान पर विचार करेंगे, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दवा आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिये वैकल्पिक व्यवस्थाएँ लागू की जाएंगी। मामले पर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इसको लेकर अगले कुछ दिनों में प्रशासन और स्टेकहोल्डर्स के बीच वार्ता की उम्मीद है।

By nishuthapar1

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