श्री आनंदपुर साहिब से जुड़े विवाद में गठित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की चार सदस्यीय जांच कमेटी मंगलवार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट SGPC प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी को सौंपेगी। कमेटी ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, तथ्यों और विभिन्न पक्षों के बयानों की जांच की है। SGPC सचिव और जांच कमेटी के समन्वयक बलविंदर सिंह कहलवां ने कहा कि कमेटी का उद्देश्य किसी व्यक्ति या पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि मामले से जुड़े वास्तविक तथ्यों को सामने रखना है।
यह मामला SGPC के पूर्व सदस्य और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के केस से जुड़ा है। एक महिला की शिकायत पर आनंदपुर साहिब थाने में 21 अगस्त को FIR दर्ज की गई थी। इसमें दुष्कर्म, गलत तरीके से बंधक बनाने और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। चावला ने आरोपों को गलत और साजिश का हिस्सा बताते हुए खारिज किया है।
मामला सामने आने के बाद SGPC प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी में SGPC सदस्य बलदेव सिंह कायमपुरी, गुरमीत सिंह बुह, बीबी गुरिंदर कौर भोलूवाला और गुरबख्श सिंह खालसा शामिल हैं। SGPC सचिव बलविंदर सिंह कहलवां को कमेटी के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी गई थी। धामी ने पहले कहा था कि घटना की जानकारी मिलते ही विभागीय जांच शुरू कर दी गई थी। उन्होंने महिला के SGPC सराय में ठहरने या मामले की पहले से जानकारी होने से इनकार किया था।
दूसरी ओर, पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान तकत श्री केसगढ़ साहिब में तैनात ड्राइवर मोहान सिंह से पूछताछ की गई है। पुलिस के अनुसार, उसने महिला के कई महीनों तक आसपास की सरायों में ठहरने और कुछ मौकों पर सरकारी वाहन से उसे आसपास के गुरुद्वारों तक ले जाने की जानकारी दी है। पुलिस इन बयानों और अन्य तथ्यों का सत्यापन कर रही है।
इस मामले में अभी तक अमरजीत सिंह चावला की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया है। चावला के विदेश में होने की जानकारी सामने आई है। मामले की जांच में पुलिस यह भी पता लगा रही है कि महिला के ठहरने की व्यवस्था किसने की थी और SGPC की सुविधाओं के इस्तेमाल को लेकर किन लोगों को जानकारी थी।
SGPC सचिव बलविंदर सिंह कहलवां ने जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने और एकतरफा बयानबाजी से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मामले में तथ्यों की पुष्टि के बिना धारणा बनाना उचित नहीं है। अब चार सदस्यीय कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि SGPC की आंतरिक जांच में मामले से जुड़े किन तथ्यों और दस्तावेजों को सामने रखा गया है।
मामले को लेकर SGPC ने पंजाब पुलिस की जांच के अलावा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच की मांग भी उठाई है। SGPC प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने इस संबंध में राज्यपाल से मिलने की बात कही थी। वहीं, विभिन्न सिख संगठनों की ओर से भी मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है।
