मानसा। नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जांच में सीबीआई ने बुधवार को एक बार फिर घटनास्थल पर कार्रवाई की। सीबीआई की टीम स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ रेलवे फाटक के पास स्थित आरोपी अश्विनी कुमार के ढहाए गए मेडिकल स्टोर पर पहुंची। यहां जेसीबी मशीन की मदद से दुकान का मलबा हटाने का काम शुरू किया गया, ताकि वारदात से जुड़े अहम सबूत जुटाए जा सकें।
जांच एजेंसी के लिए दुकान का मलबा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब तक पुलिस और सीबीआई को आरोपी अश्विनी कुमार की ओर से चलाई गई पहली गोली से संबंधित कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। इसी कारण पूरे मलबे को हटाकर घटनास्थल की बारीकी से जांच की जा रही है। कार्रवाई के दौरान विभिन्न विभागों की टीमें और पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। सुरक्षा के मद्देनजर दुकान की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया गया और आम लोगों की आवाजाही सीमित रखी गई।
पिता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
सीबीआई की कार्रवाई की जानकारी मिलने पर परविंदर झोटा के पिता भीम सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर नाराजगी जताई और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। भीम सिंह ने कहा कि यदि पुलिस समय रहते उनके बेटे की शिकायतों और नशे के खिलाफ उसकी मुहिम पर ध्यान देती तो शायद आज उनका बेटा जिंदा होता। उन्होंने एसएसपी के मौके पर नहीं पहुंचने पर भी ऐतराज जताया।
13 अक्टूबर को हुई थी हत्या
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर 2026 को मानसा के एक मेडिकल स्टोर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के दौरान चार अन्य लोग भी घायल हुए थे। आरोप है कि झोटा मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार से प्रतिबंधित नशीली दवाओं की कथित बिक्री को लेकर सवाल कर रहे थे। इसी दौरान गोलीबारी हुई, जिसमें झोटा की मौत हो गई।
मामले में अश्विनी कुमार को मुख्य आरोपी बनाया गया है। उसके अलावा उसकी पत्नी नीलम रानी, विपिन गर्ग और लाडी को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद नई एफआईआर दर्ज की और आरोपियों से पूछताछ की। चारों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
हाईकोर्ट ने भी मांगी स्टेटस रिपोर्ट
इस मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से अब तक की कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने यह भी पूछा है कि आरोपियों की संपत्तियों या मकानों को गिराने के संबंध में क्या कार्रवाई की गई और इसके लिए कौन-सी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।
सीबीआई अब मेडिकल स्टोर के मलबे की जांच के जरिए गोलीबारी से जुड़े भौतिक और फोरेंसिक सबूत जुटाने में लगी है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि घटनास्थल से कौन-कौन से अहम सुराग मिले हैं।
