चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरु नानक देव जी के गुरपुरब से पहले पाकिस्तान की संभावित यात्रा के लिए भारत सरकार से राजनीतिक मंजूरी मांगने की अपनी इच्छा व्यक्त की है और कहा कि कोई औपचारिक निमंत्रण मिलने के बाद आवश्यक आधिकारिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।
इस अवसर पर पाकिस्तान की यात्रा की संभावना पर बोलते हुए मान ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) भी सीमा पार स्थित सिख धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए जत्थे, यानी तीर्थयात्रियों के समूह, आयोजित करती है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि कोई औपचारिक निमंत्रण प्राप्त होता है, तो वे आवश्यक राजनीतिक मंजूरी के लिए केंद्र का दरवाजा खटखटाएंगे।
मुख्यमंत्री के ये बयान उस समय आए हैं, जब आगामी गुरपुरब को लेकर तैयारियां और चर्चाएं भारत-पाकिस्तान सीमा के दोनों ओर बसे समुदायों के बीच साझा धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों पर फिर से ध्यान खींच रही हैं।
पारिवारिक संबंध मुख्यमंत्री की भावनाओं को आकार देते हैं
अपने बयानों के दौरान मान ने पाकिस्तान से अपने भावनात्मक जुड़ाव को समझाने के लिए अपने परिवार के इतिहास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके नाना-नानी पाकिस्तान से पलायन करके आए थे, जबकि उनके ससुराल वालों की जड़ें भी उस देश में थीं।
इन व्यक्तिगत संबंधों को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे कई परिवारों की यादें और संबंध हैं, जिनका इतिहास सीमा के पार तक फैला हुआ है।
उनके बयान विभाजन के स्थायी प्रभाव को दर्शाते हैं, जिसने लाखों लोगों को विस्थापित किया और परिवारों को भारत तथा पाकिस्तान के बीच अलग कर दिया। कई पंजाबियों के लिए ये संबंध आज भी पैतृक घरों, सांस्कृतिक परंपराओं और साझा विरासत से गहराई से जुड़े हुए हैं।
मान ने भारत-पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंधों की मांग की
पंजाब के मुख्यमंत्री ने दोनों देशों के लोगों के बीच शांति और सद्भाव की इच्छा के बारे में भी बात की। पहले चलने वाले परिवहन संपर्कों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सीमा पार संपर्क बनाए रखने के प्रयासों के उदाहरण के रूप में समझौता एक्सप्रेस और दिल्ली-लाहौर बस सेवा का जिक्र किया।
उन्होंने सुझाव दिया कि पड़ोसी देशों के बीच संबंधों में सुधार होना चाहिए और कूटनीतिक जुड़ाव के साथ-साथ लोगों से लोगों के संबंधों के महत्व की ओर इशारा किया।
सिख समुदाय के लिए सीमा पार आवागमन का विशेष महत्व है, क्योंकि पाकिस्तान में कई महत्वपूर्ण सिख धार्मिक स्थल स्थित हैं, जिनमें गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान ननकाना साहिब शामिल है।
राजनीतिक मंजूरी आवश्यक होगी
मान ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार से अनुमति मांगने से पहले औपचारिक निमंत्रण एक महत्वपूर्ण कदम होगा। कोई भी प्रस्तावित यात्रा लागू स्वीकृति प्रक्रिया के अधीन रहेगी।
गुरु नानक देव जी के गुरपुरब से पहले उनके बयान ने धार्मिक यात्रा और द्विपक्षीय संबंधों के सवाल को केंद्र में ला दिया है। इस अवसर पर देश-विदेश से सिख श्रद्धालु आते हैं और कई लोग सिख धर्म के संस्थापक से जुड़े ऐतिहासिक गुरुद्वारों की यात्रा के अवसर तलाशते हैं।
क्या औपचारिक निमंत्रण प्राप्त होता है और केंद्र आवश्यक मंजूरी देता है, यही मुख्यमंत्री की प्रस्तावित यात्रा की संभावना तय करेगा।
फिलहाल, मान के बयान सिख तीर्थयात्रा, साझा पंजाबी विरासत और भारत-पाकिस्तान के बीच अधिक शांतिपूर्ण संबंधों की उम्मीद के निरंतर महत्व को रेखांकित करते हैं।
संपादकीय टिप्पणी: यह रिपोर्ट दी गई बयानबाजी पर आधारित है। प्रकाशन से पहले मुख्यमंत्री के बयानों की सटीक तारीख, स्थान और संदर्भ को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना चाहिए।
