यूसीआईएल ने मनाया हीरक जयंती वर्ष, यूरेनियम खनन में भारत की छह दशक लंबी यात्रा का जश्न

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम(पीएसयू), यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड(यूसीआईएल) ने अपना हीरक जयंती वर्ष मनाया, 4 अक्टूबर 1967 को इसके गठन और भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में इसके योगदान के छह दशक पूरे होने का प्रतीक है।
परमाणु ऊर्जा आयोग की सदस्य-वित्त, सुश्री सीमा जैन ने जादूगोड़ा में हुए समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं; उन्होंने प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पायलट संयंत्र तथा परमाणु ऊर्जा विभाग(डीएई) से सहायता प्राप्त संस्थान, साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स, के प्रस्तावित नई डार्क मैटर प्रयोगशाला के स्थल का दौरा किया।
अपनी तरह की पहली पत्रकार कार्यशाला ने मीडिया प्रतिनिधियों को यूसीआईएल के कार्यकलापों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया।
स्कूली छात्रों के लिए एक विशेष डीएई प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी ने परमाणु ऊर्जा के औद्योगिक और सामाजिक अनुप्रयोगों को प्रदर्शित किया।
इस समारोह के दौरान यूरेनियम खनन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में यूसीआईएल की विकसित होती क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया तथा भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में इसके ऐतिहासिक और निरंतर योगदान पर प्रकाश डाला गया।
परमाणु ऊर्जा विभाग(डीएई) के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड(यूसीआईएल) ने 4 अक्टूबर 2026 को अपना हीरक जयंती वर्ष मनाया। यह अवसर यूरेनियम के खनन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में इसकी छह दशकों की यात्रा तथा भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में अग्रणी भूमिका निभाते हुए इसके योगदान को दिखलाता है।

जादूगोड़ा में आयोजित हीरक जयंती वर्ष समारोह में वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीकी कर्मियों, कर्मचारियों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा अन्य हितधारकों ने एक साथ भाग लिया। इस अवसर पर यूसीआईएल की संस्थागत यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव का स्मरण किया गया तथा भविष्य की संभावनाओं और साझा जिम्मेदारियों पर भी विचार किया गया।

हीरक जयंती वर्ष समारोह में परमाणु ऊर्जा आयोग की सदस्य-वित्त सुश्री सीमा जैन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जादूगोड़ा स्थित सी, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) केंद्र में प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पायलट संयंत्र(टीडीपीपी) तथा जादूगोड़ा की भूमिगत खदान के 815 मीटर के स्तर पर डार्क मैटर प्रयोगशाला के प्रस्तावित नए स्थल का भी दौरा किया।

इस अवसर पर बोलते हुए, परमाणु ऊर्जा आयोग की सदस्य-वित्त सुश्री सीमा जैन ने कहा, “यूसीआईएल का हीरक जयंती वर्ष वैज्ञानिक क्षमता, संस्थागत अनुभव और राष्ट्र के प्रति छह दशकों की समर्पित सेवा का उत्सव है। यह डॉ. होमी जहांगीर भाभा और उन अग्रणियों को सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करने का भी अवसर है, जिन्होंने भारत की यूरेनियम खनन एवं प्रसंस्करण क्षमताओं की नींव रखी। धरती की गहराइयों से लेकर व्यापक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तक, यूसीआईएल ने यूरेनियम खनन एवं प्रसंस्करण में स्वदेशी क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण और जिम्मेदार भूमिका निभाई है। इन छह दशकों के दौरान, यूसीआईएल के कर्मियों की पीढ़ियों ने कठिन परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण वातावरण में कार्य करते हुए इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रयास को निरंतर बनाए रखने के लिए उल्लेखनीय समर्पण और दृढ़ता का परिचय दिया है। जैसे-जैसे भारत परमाणु ऊर्जा की एक विस्तारित भूमिका की ओर देख रहा है, यह महत्वपूर्ण पड़ाव उन लोगों, प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों को पहचानने का भी अवसर है, जिन्होंने इस यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाया है और भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ देखने का अवसर प्रदान करता है।”

परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजित कुमार मोहंती ने इस अवसर पर अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा, “हीरक जयंती वर्ष यूसीआईएल के योगदान को मान्यता देने तथा भारत के परमाणु ऊर्जा मिशन की दिशा में आगे बढ़ते हुए निरंतर नवाचार और क्षमता निर्माण के महत्व की पुनः पुष्टि करने का अवसर है।”

हीरक जयंती वर्ष कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता नरवापहाड़ स्थित सूचना केंद्र में आयोजित पत्रकार कार्यशाला थी। इसके साथ ही, डीएई की इकाइयों और संस्थानों से विकसित हो रही प्रौद्योगिकियों एवं उनके अनुप्रयोगों को प्रदर्शित करने वाली डीएई प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला ने इसमें भाग लेने वाले मीडिया प्रतिनिधियों को भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के पीछे कार्यरत विज्ञान, प्रौद्योगिकी और लोगों के और करीब आने का अवसर प्रदान किया। इसने मीडिया प्रतिनिधियों को वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ संवाद करने तथा उन प्रौद्योगिकियों, प्रणालियों और अनुप्रयोगों की गहन समझ प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया, जो व्यापक परमाणु एवं विकिरण प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं।

मीडिया प्रतिनिधियों ने यूसीआईएल की यूरेनियम खनन एवं मिलिंग सुविधाओं का दौरा किया। इस दौरान उन्हें खनन कार्यों, अयस्क के रखरखाव एवं प्रसंस्करण प्रणालियों तथा परिचालन स्थलों पर अपनाई जाने वाली प्रौद्योगिकियों और कार्य-पद्धतियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।

यूसीआईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. कचम आनंद राव ने कहा, “हीरक जयंती वर्ष यूसीआईएल परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए गर्व का महत्वपूर्ण पड़ाव है। छह दशकों से अधिक की अवधि में यूसीआईएल ने यूरेनियम खनन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में लगातार विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचे का विकास किया है तथा प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को मजबूत किया है। इस अवसर पर हमें अपनी परिचालन गतिविधियों और सुविधाओं को मीडिया के लिए खोलकर विशेष प्रसन्नता हुई। पत्रकार कार्यशाला और डीएई प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी ने हमारे परिचालन के पीछे कार्यरत विज्ञान, प्रौद्योगिकी और लोगों के साथ-साथ डीएई के व्यापक योगदान से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।”

वर्ष 1967 में स्थापित यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड(यूसीआईएल) भारत की स्वदेशी यूरेनियम खनन एवं प्रसंस्करण क्षमताओं के विकास का अभिन्न हिस्सा रहा है और देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए आवश्यक संसाधन आधार उपलब्ध कराता रहा है। हीरक जयंती वर्ष समारोह भूमिगत एवं खुले खनन से लेकर अयस्क प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी विकास, व्यावसायिक सुरक्षा, विकिरण संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन तक एक विशेष राष्ट्रीय क्षमता के विकास का प्रतीक है।

By Rajeev Sharma

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