चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बेटे रिदमजीत सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पंजाब कांग्रेस के आंतरिक सियासी समीकरणों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
रिदमजीत ने हाल ही में एक वीडियो साझा किया, जिसमें 2021 में उनके पिता के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के 111 दिनों के कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों और पहलों को दर्शाया गया है। यह वीडियो प्रशासन के अपेक्षाकृत संक्षिप्त कार्यकाल के कार्यों को रेखांकित करता है और प्रस्तुति के साथ एक गाना भी जोड़ा गया है।
इस पोस्ट के समय ने विशेष रूप से ध्यान खींचा है, जिसका कारण इसमें प्रयुक्त “गुड्डा-गुड्डी” शब्द है। यह संदर्भ पूर्व में भी पंजाब कांग्रेस के भीतर की सियासी बयानबाजी में सामने आ चुका है।
यह वाक्यांश इस साल की शुरुआत में पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रभारी भूपेश बघेल द्वारा की गई टिप्पणियों की याद दिलाता है। उस समय जब प्रदेश पार्टी नेतृत्व में संभावित बदलाव को लेकर अटकलें चल रही थीं, बघेल ने कहा था कि यह कोई “गुड्डा-गुड्डी का खेल” नहीं है और कोई भी निर्णय विचार-विमर्श व सलाह-मशविरे के बाद ही लिया जाएगा।
उनकी यह टिप्पणी बाद में प्रदेश कांग्रेस इकाई के भीतर के मतभेदों को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन गई थी।
यह नया घटनाक्रम पंजाब कांग्रेस संगठन के शीर्ष स्तर पर हुए एक और बदलाव के तुरंत बाद सामने आया है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटने के बाद परगट सिंह को इस पद पर नियुक्त किया गया है। नेतृत्व परिवर्तन के इस दौर के बीच वड़िंग और चन्नी खेमों से जुड़े समर्थकों के आपसी मतभेदों की खबरें भी सामने आती रही हैं।
इसी पृष्ठभूमि में रिदमजीत की इस पोस्ट ने राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी हलकों का ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, वीडियो स्वयं चन्नी नीत सरकार के कार्यों पर केंद्रित है और इसमें सीधे तौर पर किसी राजनीतिक नेता का नाम नहीं लिया गया है और न ही वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व को लेकर कोई स्पष्ट बयान दिया गया है।
चन्नी सरकार के कामकाज पर ध्यान केंद्रित
चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सितंबर 2021 में सत्ता में आई थी और 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले लगभग 111 दिनों तक पद पर रही।
उस अवधि के दौरान सरकार ने बिजली दरों से जुड़े फैसलों और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं सहित कई कदमों की घोषणा की थी। चन्नी बाद के राजनीतिक संदेशों में भी अपने उस संक्षिप्त कार्यकाल के प्रदर्शन का उल्लेख करते रहे हैं।
लिहाजा, उनके बेटे की इस ताजा पोस्ट ने ऐसे समय में उस कार्यकाल की ओर फिर से ध्यान खींचा है, जब पंजाब कांग्रेस संगठनात्मक बदलाव के एक और दौर से गुजर रही है।
यह संदर्भ किसी राजनीतिक संदेश के इरादे से दिया गया था या महज एक सोशल मीडिया प्रस्तुति का हिस्सा था, यह अभी भी राजनीतिक व्याख्या और चर्चा का विषय बना हुआ है।
