नई दिल्ली(राजीव शर्मा): दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद तीन एफआईआर दर्ज की हैं। ये मामले नई दिल्ली जिले में लगाए गए निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन से जुड़े हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, इनमें से दो एफआईआर संसद स्ट्रीट थाने में दर्ज की गईं, जबकि एक कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 लगाई गई है, जो किसी सार्वजनिक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवमानना से संबंधित है।
पुलिस ने कहा कि एफआईआर में अभी तक किसी व्यक्ति या संगठन को औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया गया है। हालांकि, दस्तावेजों में आयोजकों, छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों का विवरण शामिल है, जो प्रस्तावित प्रदर्शनों या उनमें भागीदारी से जुड़े हैं।
प्रदर्शन जंतर मंतर पर होने वाला था, जहां प्रतिभागियों ने निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े आरोपों के मद्देनजर कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन आरोपों पर चुनाव आयोग की दी गई प्रतिक्रियाओं को एफआईआर में शामिल नहीं किया गया है।
पुलिस द्वारा उद्धृत निषेधाज्ञा
दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत पूरे नई दिल्ली जिले में लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन किया था।
ये प्रतिबंध प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले लगाए गए थे। पुलिस ने इसका कारण जन-सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और बिना रुकावट यातायात संचालन सुनिश्चित करना बताया।
आदेश में बिना पूर्व लिखित अनुमति के पांच या अधिक लोगों का जमावड़ा, जुलूस, प्रदर्शन, धरना, पिकेटिंग, नारेबाजी और भाषण पर रोक लगाई गई थी। प्रतिबंध में हथियार, बैनर, प्लेकार्ड, लाठियां, तलवारें, डंडे, ईंटें और इसी तरह की अन्य वस्तुएं रखने को भी शामिल किया गया था।
पुलिस ने कहा कि निर्धारित प्रदर्शन से कई घंटे पहले इन प्रतिबंधों को सार्वजनिक रूप से सूचित किया गया था और उल्लंघन करने पर बीएनएस की धारा 223 के तहत कार्रवाई हो सकती थी।
बीएनएस की धारा 223 क्या प्रावधान करती है
धारा 223 के तहत किसी सार्वजनिक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवमानना करने पर छह महीने तक की जेल, ₹2,500 तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
यदि ऐसी अवमानना से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा के लिए खतरा पैदा होता है या होने की संभावना होती है, या इससे दंगा या झड़प होती है या होने की संभावना होती है, तो सजा एक साल तक की जेल, ₹5,000 तक का जुर्माना या दोनों तक बढ़ सकती है।
लगभग 1,000 लोग हिरासत में
जंतर मंतर और आसपास के इलाकों में पुलिस की कार्रवाई के दौरान लगभग 1,000 लोग हिरासत में लिए गए, क्योंकि सुरक्षाकर्मियों ने समूहों को निर्धारित प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोका। बाद में हिरासत में लिए गए कई लोगों को छोड़ दिया गया।
हिरासत में लिए गए लोगों में आप नेता सौरभ भारद्वाज, आतिशी, संजय सिंह, कुलदीप कुमार, जरनैल सिंह और संजीव झा शामिल थे। एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, नागरिक समाज कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, आरजेडी सांसद मनोज झा, सीपीआई राज्यसभा सांसद पी. संदेश और इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब भी हिरासत में लिए गए।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और डीवाईएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. ए. रहीम भी पुलिस कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए अन्य प्रतिभागियों में शामिल थे।
पुलिस अभियान से मिले विवरण के अनुसार, कई हिरासत में लिए गए लोगों को दिल्ली के विभिन्न थानों में ले जाया गया। आतिशी, अनुराग ढांडा और कुलदीप कुमार को फतेहपुर बेरी ले जाया गया, जबकि संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और संजीव झा को द्वारका सेक्टर 23 थाने ले जाया गया।
एफआईआर फिलहाल निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन पर केंद्रित हैं, जबकि प्रदर्शन को प्रेरित करने वाले राजनीतिक और चुनावी आरोप पुलिस द्वारा लगाए गए अपराधों से अलग बने हुए हैं।
