जालंधर में एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर कहा कि वह दिल्ली के नेताओं के सामने अपनी बात नहीं रख पाते। हरभजन सिंह ने पंजाब के प्रशासन में दिल्ली से अधिकारियों को लाकर तैनात किए जाने को लेकर भी सवाल उठाया।
हरभजन सिंह ने कहा कि पंजाब में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां ऐसे अधिकारियों को दी जा रही हैं, जिनका संबंध दिल्ली से रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पंजाब में अधिकारियों और योग्य लोगों की कमी है। उन्होंने कहा कि पंजाबियों को भी काम आता है और उन्हें प्रशासन में जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।
अपने संबोधन में हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान दिल्ली के नेतृत्व के सामने खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते। हालांकि, यह हरभजन सिंह का राजनीतिक आरोप है और इस पर संबंधित नेताओं की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
हरभजन सिंह ने पंजाब में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने पंजाब में स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अधिक जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही।
हरभजन सिंह पहले आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद रहे हैं। 2026 में उन्होंने AAP छोड़कर भाजपा का दामन थामा। इसके बाद से वह पंजाब से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर AAP सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। अगस्त 2026 में उन्होंने पंजाब में नशे के मुद्दे पर सोशल मीडिया के जरिए सरकार से सवाल किए थे। उस समय AAP नेताओं ने उनके कुछ दावों पर आपत्ति जताई थी और पंजाब पुलिस ने भी एक वीडियो के पंजाब से संबंधित नहीं होने की बात कही थी।
हरभजन सिंह के ताजा बयान ऐसे समय में आए हैं जब पंजाब में प्रशासनिक नियुक्तियों और दिल्ली से जुड़े नेताओं-अधिकारियों की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। हाल की एक रिपोर्ट में भी पंजाब में दिल्ली से जुड़े AAP नेताओं और प्रशासनिक प्रभाव को लेकर राजनीतिक चर्चा का जिक्र किया गया है।
वहीं, पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह अभी देखना बाकी है। हरभजन सिंह के बयान के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर सरकार के कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।
