जालंधर(गुरप्रीत सिंह): उस उम्र में जब ज्यादातर बच्चे अभी भी माता-पिता की देखरेख में पल रहे होते हैं, जगशेर सिंह खंगुड़ा पहले ही खेल के सपने को घर से दूर रहकर पूरा करने का मतलब सीख रहे थे।
जब वे 11 साल के थे, उनके माता-पिता—मनप्रीत सिंह और रशपाल कौर—ने उन्हें पंजाब के नाभा से दिल्ली के पास बहादुरगढ़ स्थित एक बैडमिंटन अकादमी भेज दिया। परिवार के लिए यह फैसला मुश्किल था, लेकिन उन्हें विश्वास था कि बेहतर ट्रेनिंग माहौल में जाना उनके बेटे की प्रगति के लिए जरूरी है।
पांच साल बाद, उस कुर्बानी ने जगशेर को जूनियर बैडमिंटन के सबसे बड़े मंचों में से एक तक पहुंचा दिया है। उन्हें 5 से 17 अक्टूबर तक मिस्र के कैरो में होने वाले विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है।
यह युवा शटलर पहले ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से छह पदक जीत चुका है और पंजाब के उभरते बैडमिंटन खिलाड़ियों में से एक माना जाता है।
करियर बदलने वाला कठिन फैसला
जगशेर के दोनों माता-पिता सरकारी स्कूल के शिक्षक हैं। उनके पिता याद करते हैं कि अपने छोटे बेटे को दूर भेजना कितना दर्दनाक था, लेकिन परिवार उनकी खेल महत्वाकांक्षाओं के प्रति प्रतिबद्ध रहा।
दूरी का मतलब यह नहीं था कि वे उनकी यात्रा से दूर रहे। उनके माता-पिता नियमित रूप से दिल्ली जाते थे, खासकर वीकेंड पर, ताकि उनकी ट्रेनिंग देख सकें और प्रगति पर नजर रख सकें।
जगशेर ने सात साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया। परिवार में कोई पेशेवर खेल पृष्ठभूमि नहीं होने के कारण, उनका शुरुआती विकास पूरी तरह से माता-पिता के समर्थन पर निर्भर था। उनके पिता हर शाम उन्हें ट्रेनिंग के लिए नाभा से पटियाला ले जाते थे।
उनके प्रदर्शन ने जल्द ही ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया। जगशेर स्टेट चैंपियन बने और 2019 से इस खिताब को बरकरार रखा हुआ है।
उनके शुरुआती कोचों में से एक, सुरेश कुमार, ने बाद में परिवार को सलाह दी कि अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए जरूरी स्तर की ट्रेनिंग पाने के लिए युवा खिलाड़ी को पंजाब से बाहर जाना होगा।
तीन शहरों में ट्रेनिंग
जगशेर के विकास ने उन्हें कई प्रमुख बैडमिंटन केंद्रों में पहुंचाया।
11 साल की उम्र में: बहादुरगढ़ की अकादमी में शामिल हुए।
14 साल की उम्र में: मुंबई चले गए और वहां एक साल ट्रेनिंग की।
पिछले दो साल से: बेंगलुरु में स्थित हैं, जहां वे सेंटर फॉर बैडमिंटन एक्सीलेंस में ट्रेनिंग कर रहे हैं।
वे कोच सागर चोपड़ा और मुनि रामू को उनके विकास में अहम भूमिका निभाने के लिए श्रेय देते हैं।
जगशेर के लिए इतनी कम उम्र में परिवार से दूर जीवन के अनुकूल होना चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, बड़े खिलाड़ियों को टूर्नामेंट के लिए यात्रा करते देखने से उन्हें जारी रखने की प्रेरणा मिली।
परिवार द्वारा किए गए त्याग धीरे-धीरे आसान होते गए क्योंकि उनके परिणाम बेहतर हुए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर सामने आने लगे।
कठिन दैनिक दिनचर्या
जगशेर का जीवन अब ट्रेनिंग, रिकवरी और प्रतियोगिता के इर्द-गिर्द बना है। उनका दिन सुबह करीब 5.30 बजे योग के साथ शुरू होता है। नाश्ते के बाद वे अपनी बैडमिंटन ट्रेनिंग शुरू करते हैं।
दोपहर के भोजन के बाद वे करीब दो घंटे आराम करते हैं, फिर शाम 3 बजे से 4 बजे तक फिटनेस सेशन के लिए जाते हैं। इसके बाद एक और बैडमिंटन सेशन होता है।
इस मांगपूर्ण शेड्यूल ने एक पारंपरिक किशोर दिनचर्या के लिए बहुत कम जगह छोड़ी है, लेकिन जगशेर अपनी दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा पर केंद्रित हैं।
उनका तत्काल लक्ष्य स्पष्ट है: वे कैरो में मजबूती से प्रतिस्पर्धा करना और विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक का लक्ष्य रखना चाहते हैं।
पंजाब का बैडमिंटन टैलेंट उभर रहा है
पंजाब बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव रितिन खन्ना ने भारतीय जूनियर स्क्वॉड में जगशेर के चुने जाने पर उन्हें बधाई दी। खन्ना के अनुसार, जगशेर पंजाब से एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप की भारतीय टीम के लिए चुना गया है।
खन्ना ने राज्य के भारतीय बैडमिंटन में बढ़ते प्रतिनिधित्व पर भी जोर दिया। होशियारपुर की तन्वी शर्मा और लुधियाना के ध्रुव कपिला जापान में एशियाई खेलों के लिए भारत के बैडमिंटन दस्ते का हिस्सा हैं।
जगशेर के लिए, हालांकि, वह यात्रा जो सात साल के बच्चे के रैकेट उठाने और 11 साल के बच्चे के घर छोड़ने से शुरू हुई थी, अब एक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। विश्व जूनियर चैंपियनशिप के लिए उनका चयन उन्हें दुनिया भर के प्रमुख युवा खिलाड़ियों के खिलाफ खुद को परखने का मौका देता है।
