चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): राज्य भर में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी परिणामों को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से पंजाब सरकार के सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग (डब्ल्यू.सी.डी.) ने 27,000 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से दिए जाने वाले पूरक पोषण में व्यापक बदलाव किया है।
पहला सुधार:27,000 आंगनवाड़ियों में 3 से 6 वर्ष की आयु के 1.1 लाख बच्चों को अब “पकाने के लिए तैयार” भोजन की बजाय स्वस्थ और पका हुआ गर्म भोजन दिया जा रहा है।
पहले पंजाब के आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को पैक किए गए पकाने के लिए तैयार भोजन को “पका हुआ भोजन” के रूप में दिया जाता था। विभाग द्वारा भोजन तैयार करने की प्रक्रिया को पूरी तरह विकेंद्रीकृत किया गया है, जिसके तहत केंद्रीय रूप से आपूर्ति किए गए पैक किए गए भोजन की जगह अब मौके पर तैयार किया जाने वाला ताजा, रोजाना पकाया जाने वाला भोजन दिया जा रहा है।
इस उद्देश्य के लिए, सरकार द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को हर दिन ताजा, स्थानीय उत्पाद प्राप्त करने और अपने क्षेत्र के अनुसार बच्चों के लिए भोजन तैयार करने हेतु आवश्यक संसाधन, धनराशि के साथ-साथ सुविधाएं और सहायता प्रदान की जा रही है। इस सहायता से फ्रंटलाइन कार्यकर्ता बेहतर पोषण और स्वच्छता सुनिश्चित करते हुए बच्चों के लिए ताजा एवं स्वस्थ भोजन उपलब्ध करवाएंगे।
पोषण के दृष्टिकोण से ताजा तैयार किया गया भोजन पैक किए गए भोजन की तुलना में अधिक लाभ प्रदान करता है। इसमें प्राकृतिक पोषक तत्व अधिक मात्रा में होते हैं और भोजन को बच्चों की पसंद के अनुसार तैयार किया जा सकता है। इसके साथ ही बड़े स्तर पर तैयार किए जाने वाले पैकेट वाले खाद्य पदार्थों में मौजूद प्रिजर्वेटिव्स, लंबे समय तक खाने योग्य बनाए रखने तथा गुणवत्ता में अस्थिरता जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
इस आयु वर्ग में पोषण के महत्व, विशेषकर मस्तिष्क और शारीरिक विकास के संदर्भ में, को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने इस व्यवस्था में बुनियादी सुधार करने का निर्णय लिया।
दूसरा सुधार:
गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए बनाई गई व्यवस्था में भी बड़े सुधार किए गए हैं, जिसके तहत प्रत्येक जिले में स्थानीय उत्पादन संयंत्र स्थापित किए गए हैं, सामुदायिक निगरानी की व्यवस्था की गई है और ‘टेक होम राशन’ के वितरण चक्र को 45 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
वितरण चक्र 45 दिन से घटाकर 15 दिन किया गया: ‘टेक होम राशन’, जो पहले हर 45 दिन बाद वितरित किया जाता था, उसे भी केंद्रीकृत व्यवस्था से अलग कर दिया गया है। इस कदम के तहत अब राशन 45 दिन की बजाय हर 15 दिन बाद वितरित किया जाएगा। इससे गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों का आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क बना रहेगा, जो उन्हें राशन के उचित उपयोग के बारे में बता सकेंगे, उनके सवालों के जवाब दे सकेंगे और समय-समय पर पोषण संबंधी सलाह भी दे सकेंगे।
स्थानीय उत्पादन और विकेंद्रीकृत मॉडल: विभाग ने किसी भी अन्य राज्य से एक कदम आगे बढ़ते हुए प्रत्येक जिले में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की पहल की है।
सामुदायिक निगरानी: देश में पहली बार सीधे लाभार्थियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों की माताओं के साथ-साथ इन इकाइयों की प्रबंधन समितियों की भागीदारी को अनिवार्य किया गया है।
यह अभूतपूर्व कदम समुदायों को इस बात की सीधी निगरानी करने का अधिकार देता है कि उनके बच्चों के लिए क्या तैयार और आपूर्ति किया जा रहा है। इसके साथ ही यह प्रत्येक जिले में स्थानीय रोजगार के अवसर भी पैदा करता है।
शुरुआत से पहले कड़ी जांच
गुणवत्ता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि ‘टेक होम राशन’ के टेंडर के लिए बोलीदाताओं द्वारा प्रस्तुत प्रत्येक व्यंजन और सामग्री की प्रयोगशालाओं में जांच की जाए। इसके अलावा, पहली बार आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के साथ वास्तविक टेस्ट-टेस्टिंग सत्र भी आयोजित किए गए हैं, ताकि केवल उन्हीं व्यंजनों को अंतिम मंजूरी के लिए चुना जाए, जिन्हें बच्चे वास्तव में पसंद करते हैं।
बदलाव के दौरान आने वाली चुनौतियों का समाधान
किसी भी बड़े स्तर के प्रणालीगत सुधार की तरह इस बदलाव के दौरान भी शुरुआती चरण में कुछ कठिनाइयां सामने आई हैं। बोलीदाताओं की ओर से बड़ी संख्या में प्रस्ताव आने के कारण व्यंजनों की जांच में शुरुआती अनुमान से अधिक समय लगा, जिसके चलते टेंडर को अंतिम रूप देने में थोड़ी देरी हुई। सरकार ने आज बठिंडा जिले के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है और आगामी सप्ताह के दौरान बाकी सभी जिलों के लिए भी इसे पूरा कर लिया जाएगा।
इस संबंध में महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा, “इन सुधारों के साथ पंजाब ने आंगनवाड़ी पोषण सुधारों में देश भर में अग्रणी स्थान हासिल किया है, जहां सुविधा की बजाय जवाबदेही और सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है। भगवंत मान सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि आंगनवाड़ी नेटवर्क के माध्यम से जिन बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं तक पहुंच बनाई जाती है, उन्हें ऐसा भोजन मिले जो आवश्यक मात्रा में होने के साथ-साथ पौष्टिक और सुरक्षित भी हो।”
