चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): पंजाब में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव एक बार फिर बढ़ गया है। कोयले की कमी के चलते थर्मल प्लांटों में उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिसके कारण तीन यूनिटों को बंद करना पड़ा है। इस वजह से राज्य को केंद्रीय पूल से खरीदी जाने वाली बिजली पर अपनी निर्भरता और अधिक बढ़ानी पड़ी है।
तलवंडी साबो और राजपुरा स्थित निजी थर्मल पावर प्लांटों की एक-एक यूनिट ठप पड़ी है, जबकि एक सरकारी प्लांट की यूनिट पर भी असर पड़ा है। कई उत्पादन इकाइयों के बंद होने और दिन के समय बिजली की मांग में आए तेज उछाल के चलते राज्य के विभिन्न हिस्सों से उपभोक्ताओं द्वारा बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं।
विशेष रूप से रात के समय स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण बन जाती है, जब सौर ऊर्जा का उत्पादन शून्य हो जाता है और पूरा भार थर्मल व अन्य वैकल्पिक स्रोतों पर आ जाता है।
दिन के समय मांग में भारी उछाल
हाल के दिनों में पंजाब में बिजली की खपत सामान्य से काफी अधिक बनी हुई है। गुरुवार आधी रात को बिजली की मांग 11,655 मेगावाट दर्ज की गई, जबकि शुक्रवार सुबह 6:30 बजे यह आंकड़ा 11,116 मेगावाट था।
सुबह 8:30 बजे तक मांग तेजी से बढ़कर 14,195 मेगावाट पर पहुंच गई। पिछले कुछ दिनों के दौरान दिन के पीक आवर्स में मांग लगातार 16,500 मेगावाट के पार जा रही है।
इसके विपरीत, रात और सुबह के समय पंजाब के भीतर कुल उत्पादन महज 4,000 मेगावाट के आसपास ही सिमटा रहा। इस बड़े अंतर की भरपाई मुख्य रूप से केंद्रीय पूल से बिजली खरीदकर की गई, जिसके तहत राज्य के बाहर से लगभग 7,100 मेगावाट बिजली मंगवाई गई। सुबह 8:30 बजे तक पंजाब के भीतर कुल उत्पादन थोड़ा सुधरकर करीब 4,200 मेगावाट तक पहुंचा।
पूरी क्षमता से काफी नीचे चल रहे निजी प्लांट
पंजाब की कुल स्थापित थर्मल उत्पादन क्षमता में निजी संयंत्रों की बड़ी हिस्सेदारी है, लेकिन कोयले की तंगी के चलते वे पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं।
राजपुरा और तलवंडी साबो के दो प्रमुख निजी संयंत्रों की कुल क्षमता 3,380 मेगावाट है। इसमें राजपुरा की क्षमता 1,400 मेगावाट और तलवंडी साबो की 1,980 मेगावाट है।
दोनों प्लांटों में एक-एक यूनिट बंद होने के कारण गुरुवार देर रात से सुबह तक दोनों संयंत्र मिलकर केवल 1,500 मेगावाट के करीब ही बिजली पैदा कर सके, जो उनकी संयुक्त क्षमता से काफी कम है। सुबह 8:30 बजे तक उत्पादन में मामूली सुधार हुआ और यह लगभग 1,700 मेगावाट दर्ज किया गया।
सरकारी संयंत्र भी प्रभावित
पंजाब के सरकारी थर्मल संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता करीब 2,300 मेगावाट है।
गुरुवार को रोपड़ और गोइंदवाल साहिब थर्मल प्लांट की एक-एक यूनिट के बंद रहने की सूचना मिली थी। हालांकि, रात के समय बंद रही गोइंदवाल की यूनिट को बाद में दोबारा चालू कर लिया गया, जिससे उत्पादन में कुछ सुधार दर्ज हुआ।
सुबह 6:30 बजे तक सरकारी थर्मल संयंत्र लगभग 1,600 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहे थे।
कोयले की किल्लत बनी हुई है मुख्य वजह
यह ताजा व्यवधान पंजाब के बिजली मंत्री द्वारा दी गई उस चेतावनी के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि कोयले की नई खेप जल्द नहीं पहुंची तो थर्मल प्लांटों में ईंधन की कमी से गंभीर बिजली संकट खड़ा हो सकता है।
पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि प्लांटों में कोयले की रेक पहुंच तो रही हैं, लेकिन यह आपूर्ति उनकी पूरी दैनिक जरूरत को पूरा करने के लिए नाकाफी है। नतीजतन, बिजली इकाइयां अपनी क्षमता से कम स्तर पर चलने को मजबूर हैं।
उपभोक्ताओं पर पड़ रही सीधी मार
उत्पादन में आई इस गिरावट का सीधा असर राज्य के बिजली वितरण तंत्र पर पड़ रहा है। रात के समय आम उपभोक्ताओं को अधिक कटौती का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि दिन में करीब 400 मेगावाट बिजली देने वाला सौर ऊर्जा तंत्र रात होते ही शून्य पर आ जाता है।
मांग में लगातार जारी तेजी और थर्मल प्लांटों के पूरी तरह पटरी पर न लौटने के कारण पावरकॉम इस घाटे को पूरा करने के लिए पूरी तरह बाहरी खरीद पर निर्भर है। आने वाले दिनों में बिजली कटौती की अवधि और बारंबारता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि कोयले की आपूर्ति कितनी जल्दी सुधरती है और बंद पड़ी यूनिटें कब तक दोबारा चालू हो पाती हैं।
