अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: वाशिंगटन ने पांच तेल टैंकर तबाह किए, तेहरान ने जॉर्डन पर दागी मिसाइलें

वाशिंगटन/तेहरान (राजीव शर्मा): अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट करने और जवाब में तेहरान द्वारा जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर ताजा मिसाइल हमले के बाद मंगलवार को दोनों देशों के बीच तनाव नए स्तर पर पहुंच गया। छह महीने से अधिक समय से जारी इस संघर्ष में यह एक और बड़ा सैन्य टकराव माना जा रहा है।

हमलों के इस नए दौर ने आशंका बढ़ा दी है कि बार-बार होने वाली सैन्य झड़पें दोनों पक्षों को कूटनीतिक समाधान से और दूर ले जाएंगी, जिससे युद्ध के वैश्विक आर्थिक दुष्प्रभाव और गहरे हो सकते हैं।

जॉर्डन ने मार गिराईं ईरानी मिसाइलें

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी सेना द्वारा अपने तेल टैंकरों पर किए गए हमलों के जवाब में तेहरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं।

जॉर्डन के सशस्त्र बलों ने बताया कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने देश की ओर आ रही 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक दो अन्य मिसाइलें गैर-आबादी वाले इलाकों में जाकर गिरीं।

इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

जॉर्डन इस क्षेत्र में अमेरिका का प्रमुख सहयोगी रहा है और वहां अमेरिकी सैन्य कर्मियों और सुविधाओं के ठिकाने मौजूद हैं। नतीजतन, इस संघर्ष के दौरान जॉर्डन की सीमाओं और सैन्य ठिकानों पर लगातार खतरे मंडराते रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस कथित मिसाइल हमले के संबंध में तुरंत कोई विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किया।

अमेरिकी बलों ने नष्ट किए पांच टैंकर

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि ईरानी तेल जहाजों पर ताजा हमले तब किए गए, जब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले दो दिनों के दौरान दो बार अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने की कोशिश की।

अमेरिकी सेना के अनुसार, अमेरिकी पोत दोनों हमलों से सुरक्षित बच निकला और बिना किसी नुकसान या हताहत के अपनी गश्त जारी रखी।

इसके बाद ईरान से जुड़े पांच टैंकरों को निशाना बनाया गया। सेंट्रल कमांड द्वारा चिन्हित किए गए जहाजों में किविक (Kivik), चारमीनार (Charminar), होराइजन 1 (Horizon 1), रिएस्को (Riesco) और डेरिया (Derya) शामिल हैं। इनमें से चार जहाज ओमान की खाड़ी में थे, जबकि ‘डेरिया’ होर्मुज जलडमरूमध्य के पास खार्ग द्वीप के नजदीक स्थित था।

अमेरिकी सेना का कहना है कि कार्रवाई शुरू करने से पहले जहाजों पर मौजूद चालक दल को चेतावनी देकर जहाज खाली करने के निर्देश दिए गए थे।

उधर, ईरानी सरकारी टेलीविजन ने भी दक्षिणी बंदरगाह जास्क और खार्ग द्वीप के आसपास तेल टैंकरों पर हमलों की पुष्टि की और बताया कि चालक दल के सदस्यों को पहले ही सुरक्षित निकाल लिया गया था।

तेहरान की जहाजरानी उद्योग को चेतावनी

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के पास मौजूद तेल टैंकरों के चालक दल को फौरन अपने जहाज खाली करने की सख्त चेतावनी जारी की है।

ईरान ने दोनों खाड़ी देशों पर आरोप लगाया कि वे अमेरिकी सेना को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की छूट दे रहे हैं और वाशिंगटन के सैन्य अभियानों में मदद कर रहे हैं। तेहरान ने आगाह किया कि अपने तेल टैंकरों की बर्बादी के बाद वह जवाबी कार्रवाई कर सकता है।

इन चेतावनियों ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास वाणिज्यिक मालवाहक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना टकराव का मुख्य केंद्र

इस सामरिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण संघर्ष का सबसे संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा है। इस टकराव से पहले दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था, इसलिए यहां किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए सीधा झटका है।

ईरान ने संकेत दिया है कि वह जलडमरूमध्य के आसपास एक नया ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ (एक्सक्लूजन जोन) तय कर सकता है और चाहता है कि वाणिज्यिक जहाज तेहरान द्वारा निर्धारित मार्ग का ही पालन करें।

दूसरी ओर, ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी ने कच्चे तेल के निर्यात को सीमित कर ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना रखा है। साथ ही, अमेरिकी बल ओमान के नजदीकी वैकल्पिक मार्ग से गुजरने वाले कुछ चुनिंदा जहाजों को सुरक्षा सहायता दे रहे हैं।

सैन्य कार्रवाई के साथ प्रतिबंधों की दोहरी मार

ताजा सैन्य हमलों के साथ-साथ अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंधों की भी घोषणा की है।

ट्रंप प्रशासन ने ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़े नए हिस्सों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें दो दर्जन से अधिक वाणिज्यिक व निजी एयरलाइंस और विदेशी कार्गो सेवा कंपनियां शामिल हैं। इसका मकसद तेहरान की अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक पहुंच को और अधिक सीमित करना है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि वाशिंगटन अमेरिकी नौसैनिक बलों पर हमलों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

इससे पहले शनिवार को भी अमेरिकी बलों ने तीन ईरानी टैंकरों को तबाह किया था, जब रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कथित तौर पर एक अमेरिकी विमानवाहक पोत और विध्वंसक जहाज पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की कोशिश की थी।

कच्चे तेल में उबाल, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव

दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड उछलकर $99.46 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिससे ईंधन की कीमतों और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

ऊर्जा की बढ़ती कीमतें नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप प्रशासन के लिए घरेलू मोर्चे पर राजनीतिक मुश्किलें भी खड़ी कर सकती हैं, खासकर यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है।

इजरायल के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के ईरान विशेषज्ञ डैनी सिट्रिनोविज ने आगाह किया कि केवल सैन्य दबाव के जरिए इस समुद्री विवाद का हल निकलना मुश्किल है।

उन्होंने चेतावनी दी कि हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का यह अंतहीन सिलसिला वाशिंगटन और तेहरान को एक बड़े पूर्णकालिक युद्ध की ओर धकेल सकता है, जिसका खामियाजा पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ेगा।

By Rajeev Sharma

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