न्यूयॉर्क (राजीव शर्मा): न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत ने भारतीय मूल के गुरमीत सिंह की अमेरिकी नागरिकता रद्द कर दी है, जो बलात्कार और अपहरण के मामले में जेल की सजा काट रहा है। न्याय विभाग की दलील के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया था कि उसने नागरिकता के आवेदन के दौरान अपने गंभीर अपराधों को छिपाया था।
यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट फॉर द ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क ने 26 अगस्त को अपना फैसला सुनाते हुए सिंह को 2011 में हासिल की गई नागरिकता छोड़ने का आदेश दिया।
न्याय विभाग ने कहा कि सिंह ने गलत तरीके से नागरिकता हासिल की थी क्योंकि वह नागरिकता के लिए आवेदन करने से ठीक पहले किए गए गंभीर आपराधिक कृत्यों का खुलासा करने में विफल रहा था।
1992 में विजिटर के तौर पर अमेरिका पहुंचा था
सिंह फरवरी 1992 में अस्थायी विजिटर वीजा पर संयुक्त राज्य अमेरिका आया था। हालांकि शुरुआत में उसे छह महीने से अधिक समय तक रहने की अनुमति नहीं थी, लेकिन वह निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रुका रहा।
आखिरकार, पारिवारिक आधार पर दाखिल की गई आव्रजन वीजा याचिका के माध्यम से वह जून 2000 में कानूनी रूप से स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) बन गया।
जिस घटना के कारण बाद में उसे दोषी ठहराया गया, उस समय सिंह एक टैक्सी ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था।
टैक्सी यात्रा के दौरान महिला पर हमला
अभियोजकों ने बताया कि मई 2011 में सिंह ने एक महिला यात्री को टैक्सी में बैठाया, जो घर जाते समय सो गई थी। न्याय विभाग के अनुसार, वह उसे एक सुनसान जगह पर ले गया।
जब यात्री की आंख खुली, तो उसने पाया कि सिंह उसके गले पर चाकू रखकर उसे काबू में किए हुए था। जांचकर्ताओं ने बताया कि इसके बाद उसने महिला के हाथ-पैर बांधे, मुंह में कपड़ा ठूंसा, आंखों पर पट्टी बांधी और उसका यौन उत्पीड़न किया।
महिला बाद में गाड़ी से भागने में सफल रही और सड़क पर मिले एक व्यक्ति से मदद मांगी।
न्याय विभाग ने कहा कि सिंह ने नागरिकता के लिए आवेदन करते समय इस घटना का खुलासा नहीं किया। इस कथित अपराध के कुछ ही महीनों बाद, 19 अक्टूबर 2011 को वह अमेरिकी नागरिक बन गया।
दोषसिद्धि के बाद जेल की सजा
सिंह को बाद में न्यूयॉर्क में प्रथम श्रेणी के बलात्कार (Rape in the First Degree) और यौन उत्पीड़न के उद्देश्य से किए गए द्वितीय श्रेणी के अपहरण (Kidnapping in the Second Degree) का दोषी ठहराया गया।
दोषी ठहराए जाने के बाद उसे 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई।
इसके बाद संघीय सरकार ने एक दीवानी मामला दायर किया, जिसमें नागरिकता प्रक्रिया के दौरान हासिल की गई उसकी नागरिकता छीनने की मांग की गई। न्याय विभाग ने 2 फरवरी को नागरिकता रद्द करने की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने 26 अगस्त को यह आदेश जारी किया।
अधिकारियों ने नागरिकता प्रणाली की निष्पक्षता पर दिया जोर
अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि अमेरिकी नागरिकता का इस्तेमाल परिणामों से बचने के लिए ढाल के रूप में नहीं किया जा सकता, जब इसे अयोग्य ठहराने वाली जानकारी को छिपाकर हासिल किया गया हो।
सहायक अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शुमेट ने कहा कि सरकार उन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी जो नागरिकता प्रक्रिया के दौरान आव्रजन अधिकारियों को धोखा देते हैं।
अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला जूनियर ने कहा कि यह फैसला उन आवेदकों के लिए एक चेतावनी है जो गलत या अधूरी जानकारी देकर नागरिकता हासिल करने का प्रयास करते हैं।
इस मामले की पैरवी न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के ऑफिस ऑफ इमिग्रेशन लिटिगेशन के क्रिस्टोफर लेयरला और न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले की सहायक अमेरिकी अटॉर्नी लायालिजा सोलोवेचिक ने की।
