Nepal Floods: अज्ञात शवों को दफनाया जाएगा, भविष्य में पहचान के लिए डीएनए रिकॉर्ड तैयार कर रहा प्रशासन

Nepal Floods

काठमांडू (राजीव शर्मा): नेपाल में इस सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ में मारे गए अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने की तैयारी की जा रही है, क्योंकि बरामद शवों की भारी संख्या और उन्हें सुरक्षित रखने की सीमित सुविधाओं के चलते प्रशासन को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

बुधवार को गांवों और कस्बों में आई बाढ़ के बाद से अब तक 700 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में चितवन शामिल है, जहां से अब तक 233 शव बरामद हुए हैं।

शवों की इतनी बड़ी संख्या के कारण स्थानीय अस्पतालों और अस्थायी शवगृहों पर भारी दबाव पड़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि शवों के क्षत-विक्षत होने और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बढ़ने के कारण उन्हें दफनाना अनिवार्य हो गया है।

प्रत्येक शव को दफनाने से पहले लिया जा रहा है डीएनए

अज्ञात मृतकों को दफनाने के फैसले का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि परिजन बाद में उन पर अपना दावा नहीं कर सकेंगे।

अधिकारी दफनाने से पहले शवों से डीएनए के नमूने एकत्र कर रहे हैं और प्रत्येक शव को एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूनिक आईडी नंबर) आवंटित कर रहे हैं। शव मिलने के स्थान से संबंधित विवरण भी दर्ज किए जा रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि शनिवार दोपहर तक 100 से अधिक शवों की डीएनए प्रोफाइलिंग पूरी कर ली गई थी।

इन रिकॉर्ड्स का उद्देश्य यह है कि यदि परिजन भविष्य में अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश के दौरान डीएनए के नमूने देते हैं, तो प्रशासन उनका मिलान कर सके।

दफनाने के स्थलों का सावधानीपूर्वक दस्तावेजीकरण

प्रशासन दफनाने की प्रक्रिया को इस प्रकार से अंजाम दे रहा है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर शवों को बाहर निकाला (exhumation) जा सके।

लगभग 1.5 मीटर की गहराई तक गड्ढे खोदे जा रहे हैं और दो शवों के बीच लगभग 40 सेंटीमीटर की दूरी रखी जा रही है।

प्रत्येक शव को उसकी पहचान संख्या वाले बैग में रखा जा रहा है। दफनाने के स्थानों पर संबंधित नंबर प्रदर्शित करने वाले कंक्रीट के चबूतरे और साइनबोर्ड भी लगाए जा रहे हैं।

अधिकारी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के माध्यम से दफनाने की पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड करने की योजना बना रहे हैं, साथ ही इन स्थानों को जियो-टैग भी किया जाएगा ताकि भविष्य में उनके सटीक स्थान का पता लगाया जा सके।

डीएनए मिलान प्रणाली का उपयोग कर सकेंगे परिजन

जिन लोगों के रिश्तेदार अब भी लापता हैं, वे निर्धारित अस्पतालों में अपने डीएनए नमूने जमा कर सकेंगे।

इन नमूनों का मिलान अज्ञात शवों से लिए गए आनुवंशिक नमूनों से किया जाएगा। मिलान की पुष्टि होने पर, शव की पहचान संख्या के आधार पर पुलिस को संबंधित दफन रिकॉर्ड खोजने में मदद मिलेगी।

इसके बाद प्रशासन सटीक दफन स्थल की पहचान कर शव के अवशेषों को बाहर निकलवाकर परिजनों को सौंपने की व्यवस्था कर सकता है।

चितवन में शव रखने की जगह का संकट

चितवन बरामद शवों की भारी संख्या से विशेष रूप से प्रभावित हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि शवों को सुरक्षित रखने के लिए एक इमारत का उपयोग अस्थायी रूप से कूलिंग फैसिलिटी (शीत गृह) के रूप में किया गया था, लेकिन अंततः उसकी क्षमता भी समाप्त हो गई।

शवों के तेजी से खराब होने के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कथित तौर पर चेतावनी दी थी कि अपर्याप्त परिस्थितियों में बड़ी संख्या में शवों को रखने से स्वच्छता और संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है।

इसलिए, प्रशासन ने बाद में पहचान की संभावना के लिए विस्तृत रिकॉर्ड बनाए रखते हुए शवों को दफनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

हजारों लोग अब भी लापता

लापता लोगों की संख्या से इस आपदा के भीषण पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है। अधिकारियों का अनुमान है कि सैकड़ों विदेशी नागरिकों सहित 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।

पुलिस ने परिजनों को अपने लापता रिश्तेदारों को खोजने में मदद करने के उद्देश्य से एक वेबसाइट के माध्यम से अज्ञात और लावारिस शवों का विवरण भी उपलब्ध कराया है।

जैसे-जैसे बचाव और राहत अभियान जारी है, नेपाल की यह डीएनए-आधारित पहचान प्रणाली उन परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है, जिनके प्रियजनों के अवशेषों की शुरुआत में पहचान नहीं हो सकी थी।

By Rajeev Sharma

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