करनाल में हर्ष-बीरबल एनकाउंटर की SIT जांच शुरू, मौके से जुटाए अहम तथ्य

करनाल में बीरू वाल्मीकि हत्याकांड के बाद पुलिस मुठभेड़ में मारे गए हर्ष और बीरबल के एनकाउंटर की जांच अब स्टेट क्राइम ब्रांच हरियाणा को सौंप दी गई है। एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर आईपीएस संजय कुमार की अध्यक्षता में विशेष जांच टीम गठित की गई है। टीम ने वीरवार को उस स्थान का मौका मुआयना किया, जहां पुलिस के अनुसार हर्ष और बीरबल के साथ मुठभेड़ हुई थी।

एसआईटी अब घटनास्थल, पुलिस कार्रवाई और इससे जुड़े हर तथ्य की जांच करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और पुलिस कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

एसआईटी ने घटनास्थल पर की जांच

स्टेट क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर शिवचरण ने बताया कि हर्ष एनकाउंटर मामले में एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर आईपीएस संजय कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई है।

टीम एडीजीपी के सुपरविजन में काम कर रही है। एसआईटी में आईपीएस राजेश कुमार, स्टेट क्राइम ब्रांच हरियाणा गुरुग्राम, डीएसपी पंचकूला रजनीश कुमार, इंस्पेक्टर शिवचरण, एएसआई विनेश और एएसआई विजय शामिल हैं।

इंस्पेक्टर शिवचरण के मुताबिक टीम वीरवार को उस जगह पहुंची, जहां हर्ष एनकाउंटर हुआ था। यहां मौके की स्थिति को समझने के साथ घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू की गई है। एसआईटी जांच के दौरान एक-एक तथ्य को खंगालेगी और इसके आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आएगा, यह जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा।

गोलियों के निशान की जांच करते हुए एसआईटी।

गोलियों के निशान की जांच करते हुए एसआईटी।

5 अगस्त को बीरू की गोली मारकर हत्या

मामले की शुरुआत 5 अगस्त की रात करनाल में बीरू वाल्मीकि की हत्या से हुई थी। हांसी रोड/लव-कुश चौक के आसपास रात करीब 8:30 बजे बीरू स्कूटर से घर की तरफ जा रहा था। इसी दौरान बाइक सवार दो युवकों ने उसका पीछा किया और चलती स्कूटी पर उसके सिर में गोली मार दी। घटना में बीरू की मौत हो गई।

मामले में पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की। नामजद आरोपियों में वंश उर्फ शूटर समाना, योगेश कपूर, कुनाल पाल, निन्जा रंबा, नैंसी जाटनी, संजय और जैल रोड के नाम सामने आए।

परिजन और वाल्मीकि समाज ने लगाया जाम

हत्या के अगले दिन 6 अगस्त को बीरू की पत्नी और परिजन आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़क पर बैठ गए। अंबेडकर चौक पर जाम लगाया गया। वाल्मीकि और दलित समाज में भी घटना को लेकर भारी रोष था। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को कार्रवाई का भरोसा दिया। दूसरी तरफ पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थीं।

इसी रात बीरू हत्याकांड के करीब 27-28 घंटे बाद घोघड़ीपुर/पश्चिमी यमुना नहर क्षेत्र के पास पुलिस की संदिग्धों से मुठभेड़ हुई।

मौके पर पहुंची एसआईटी टीम जानकारी देते हुए।

मौके पर पहुंची एसआईटी टीम जानकारी देते हुए।

पुलिस के अनुसार फायरिंग के बाद हुई जवाबी कार्रवाई

पुलिस के अनुसार बाइक सवार दो युवकों को रोकने का इशारा किया गया था, लेकिन उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान हर्ष निवासी काला माजरा, नीलोखेड़ी और बीरबल निवासी मटरवा खेड़ी, कैथल के रूप में हुई।

पुलिस ने दावा किया कि दोनों बीरू हत्याकांड में गोली चलाने वाले शूटर थे।हालांकि, हर्ष के परिवार और रोड समाज ने एनकाउंटर की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए इसे संदिग्ध बताया और निष्पक्ष जांच की मांग शुरू कर दी।

7 अगस्त से सीबीआई जांच की मांग ने पकड़ा जोर

7 अगस्त को हर्ष के गांव काला माजरा में पंचायत हुई। परिवार और रोड समाज ने एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग उठाई। इसके बाद एनकाउंटर का मामला लगातार सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बनता गया। 9 अगस्त को काला माजरा में पंचायत हुई। इसके बाद 10 अगस्त को करनाल की रोड धर्मशाला में बैठक की गई।

12 अगस्त को कुरुक्षेत्र में बड़ी महापंचायत हुई। इसमें सीबीआई या न्यायिक जांच, पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और करनाल एसपी के तबादले जैसी मांगें उठाई गईं। 13 अगस्त को प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग रखी। मुख्यमंत्री की ओर से 15 अगस्त के बाद उचित कार्रवाई का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई।

जांच के बाद वापस लौटती एसआईटी की टीम।

जांच के बाद वापस लौटती एसआईटी की टीम।

योगेश कपूर की गिरफ्तारी से हत्याकांड में आया नया मोड़

इसी बीच बीरू हत्याकांड में नामजद योगेश कपूर पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। उसका नाम नीलोखेड़ी के एक अन्य गोलीकांड से भी जुड़ा बताया गया और उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी होने की जानकारी सामने आई। वह दुबई चला गया था। 14-15 अगस्त को योगेश दुबई से भारत लौटा और मुंबई एयरपोर्ट पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

इसके बाद करनाल पुलिस उसे लेकर आई। उसे अदालत में पेश कर पुलिस ने करीब एक सप्ताह का रिमांड मांगा। योगेश की गिरफ्तारी इसलिए अहम मानी गई क्योंकि एफआईआर में वह सात नामजद आरोपियों में शामिल था। वहीं हर्ष और बीरबल की मौत हो चुकी थी और बाकी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी का सवाल बना हुआ था।

योगेश ने हत्या में भूमिका से किया इनकार

करनाल पहुंचने के बाद योगेश कपूर ने मीडिया के सामने बीरू की हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया। उसने दावा किया कि बीरू और वंश उर्फ शूटर समाना के बीच इंस्टाग्राम पर विवाद चल रहा था और उसी विवाद के चलते समाना ने हत्या करवाई।

योगेश ने यह भी दावा किया कि हर्ष और बीरबल को हथियार समाना ने उपलब्ध करवाए थे। ये दावे योगेश के बताए गए हैं। इनकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

एनकाउंटर जांच को लेकर बढ़ा दबाव

13 अगस्त के बाद रोड समाज ने हर्ष और बीरबल के एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग और तेज कर दी। कुरुक्षेत्र की महापंचायत में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे। करनाल विधायक जगमोहन आनंद को लेकर भी विवाद सामने आया।

समाज ने विधायक के खिलाफ कार्रवाई और एनकाउंटर की जांच की मांग रखी। विधायक की ओर से कहा गया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

19 अगस्त को सरकार ने लिया जांच का फैसला

19 अगस्त को घटनाक्रम में बड़ा मोड़ आया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर बीरू हत्याकांड के बाद हुए पुलिस एनकाउंटर की जांच एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर संजय कुमार के नेतृत्व में कराने का फैसला लिया गया। पुलिस विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद मामले को स्टेट क्राइम ब्रांच हरियाणा को सौंपते हुए एसआईटी गठित की गई है।

21 अगस्त को वाल्मीकि समाज ने फिर रखीं मांगें

21 अगस्त को सेक्टर-12 स्थित व्यायामशाला पार्क में वाल्मीकि समाज की पंचायत हुई। समाज ने मांग की कि बीरू हत्याकांड में पुलिस की गिरफ्त से बाहर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। योगेश कपूर की गिरफ्तारी के बाद भी छह नामजद आरोपियों के बाहर होने का मुद्दा पंचायत में उठाया गया।

इसके अलावा धमकी देने वालों की जांच और कार्रवाई, धमकी झेल रहे लोगों को सुरक्षा, पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने की मांग भी रखी गई।

प्रदर्शन के बाद 26 अगस्त को लिया फैसला

रोड समाज के प्रधान बलकार सिंह की अध्यक्षता में 24 अगस्त को करनाल में प्रदर्शन किया गया। इसमें हर्ष एनकाउंटर की जांच कराने की मांग प्रमुख रही। इसके बाद 26 अगस्त को समाज की बैठक हुई। बैठक में फैसला लिया गया कि यदि 1 सितंबर तक मामले की जांच शुरू नहीं हुई, तो रोड बहुल्य गांवों में बीजेपी नेताओं और मंत्रियों की एंट्री बैन करने का फैसला लिया जाएगा।

अब सरकार की ओर से जांच के लिए एसआईटी गठित होने के बाद समाज की मुख्य मांग पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

अब एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

हर्ष एनकाउंटर मामले में अब जांच की जिम्मेदारी स्टेट क्राइम ब्रांच की एसआईटी के पास है। टीम में शामिल अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण कर चुके हैं और जांच की शुरुआत कर दी है। एसआईटी पुलिस के बताए घटनाक्रम, मौके की परिस्थितियों और कार्रवाई से जुड़े सभी तथ्यों को जांचेगी।

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आएगा। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि 6 अगस्त को घोघड़ीपुर/पश्चिमी यमुना नहर क्षेत्र में हर्ष और बीरबल के साथ हुई मुठभेड़ की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और पुलिस की कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

By Gurpreet Singh

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