खनौरी बॉर्डर पर किसानों का धरना खत्म, दिल्ली-पटियाला हाईवे फिर खुला

हरियाणा-पंजाब सीमा पर खनौरी बॉर्डर को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा किसानों का गतिरोध बुधवार को खत्म हो गया। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने केंद्र सरकार की ओर से बातचीत के लिए मिले निमंत्रण के बाद खनौरी बॉर्डर पर अपना धरना स्थगित कर दिया। किसानों के पीछे हटने के साथ ही दिल्ली-पटियाला नेशनल हाईवे-52 को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई। यह हाईवे पिछले चार दिनों से बंद था, जिसके कारण इस रूट से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था और वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा जा रहा था।

जानकारी के मुताबिक, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने खनौरी-डाटा सिंहवाला बॉर्डर से दिल्ली के जंतर-मंतर तक पैदल मार्च निकालने का ऐलान किया था। किसान 16 अगस्त से इस अभियान के तहत आगे बढ़ना चाहते थे, लेकिन हरियाणा पुलिस और प्रशासन ने पंजाब-हरियाणा सीमा पर भारी सुरक्षा व्यवस्था करते हुए उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इसके बाद किसान बॉर्डर के पास ही धरने पर बैठ गए थे। प्रशासन की ओर से हाईवे पर कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई थी। पत्थरों, लोहे की बैरिकेडिंग, कंटीले तारों और भारी वाहनों के जरिए रास्ता बंद किया गया था। स्थिति पर नजर रखने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी का भी इस्तेमाल किया गया।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बुधवार को बताया कि केंद्र की ओर से बातचीत के लिए निमंत्रण मिलने के बाद प्रस्तावित पैदल यात्रा को फिलहाल स्थगित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान अब खनौरी बॉर्डर से अपने घरों की ओर लौटेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार बातचीत की तय बैठक को रद्द करती है या आगे बढ़ाती है, तो किसान संगठन दोबारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचकर प्रदर्शन कर सकते हैं।

केंद्र सरकार और किसानों के बीच प्रस्तावित बातचीत 4 सितंबर को नई दिल्ली में होने की जानकारी सामने आई है। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर किसान संगठन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ भी किसानों की बैठक कराए जाने की संभावना जताई गई है। हरियाणा सरकार इस बैठक के लिए समन्वय में सहयोग करेगी। इस घटनाक्रम को किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच लंबे अंतराल के बाद दोबारा बातचीत शुरू होने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन कई कृषि मुद्दों को लेकर है। इनमें फसलों की खरीद पर कानूनी न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की गारंटी, किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान और प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि क्षेत्र को लेकर उनकी चिंताएं प्रमुख हैं। किसान संगठनों को आशंका है कि व्यापार समझौते के तहत कृषि और संबंधित क्षेत्रों में आयात बढ़ने से घरेलू किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से किसान केंद्र सरकार के साथ सीधे बातचीत की मांग कर रहे थे।

खनौरी बॉर्डर पर तनाव के बीच प्रशासन ने आसपास के ग्रामीण और संपर्क मार्गों पर भी सुरक्षा बढ़ा दी थी। कई जगहों पर नाके लगाए गए थे और वाहनों की जांच की जा रही थी। हाईवे बंद होने के कारण दिल्ली, पटियाला, संगरूर और जींद की ओर जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ा। अब किसानों के धरने से पीछे हटने के बाद हाईवे पर यातायात बहाल होने की उम्मीद है।

किसानों ने फिलहाल अपना पैदल मार्च टाल दिया है, लेकिन उन्होंने साफ किया है कि उनकी मांगें अभी खत्म नहीं हुई हैं। अब सभी की नजर 4 सितंबर को होने वाली केंद्र और किसान प्रतिनिधियों की प्रस्तावित बैठक पर रहेगी। इस बैठक में किसानों के प्रमुख मुद्दों पर क्या चर्चा होती है और सरकार की ओर से क्या आश्वासन दिया जाता है, यह आगे के आंदोलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

By Gurpreet Singh

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