चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): गुरुवार को पंजाब के कई हिस्सों में मानसून की ताज़ा बारिश हुई, जिसमें जालंधर में भारी बारिश दर्ज की गई। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सात जिलों में अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। यह एडवाइजरी पठानकोट, होशियारपुर, शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर), फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, पटियाला और एस.ए.एस. नगर (मोहाली) के लिए लागू रहेगी।
मौसम कार्यालय ने चंडीगढ़ में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और दिन के दौरान रुक-रुक कर हल्की बारिश व गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई है।
बारिश के बावजूद बढ़ा तापमान
हालांकि कई इलाकों से बारिश की खबर है, लेकिन राज्य के दिन के तापमान में 2.1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह मौसमी औसत के करीब पहुंच गया है। बठिंडा 39.2°C अधिकतम तापमान के साथ पंजाब का सबसे गर्म शहर बना रहा।
बरनाला में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
पिछले 24 घंटों में राज्य भर में बारिश की गतिविधि अलग-अलग रही। बरनाला में सबसे अधिक 12 मिमी बारिश हुई, इसके बाद अमृतसर में 6 मिमी दर्ज की गई। गुरदासपुर में 2 मिमी, जबकि फतेहगढ़ साहिब और लुधियाना में 1.5-1.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। पठानकोट में केवल नाममात्र (ट्रेस) बारिश की सूचना मिली।
बारिश के पीछे सक्रिय मौसम प्रणालियाँ
मौसम अधिकारियों ने मौसम में इस बदलाव का कारण विभिन्न वायुमंडलीय प्रणालियों के मिश्रण को बताया है। उत्तर भारत में सक्रिय मानसून ट्रफ, पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के बचे हुए प्रभाव और उत्तर प्रदेश व हरियाणा के ऊपर बने एक चक्रवातीय परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) के कारण पंजाब और चंडीगढ़ में नमी बढ़ गई है।
इन परिस्थितियों के चलते कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है, जबकि अगले 24 घंटों के दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।
बिजली की खपत में इजाफा
उमस भरे मौसम ने पंजाब भर में बिजली की खपत को भी बढ़ा दिया है। राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 14,603 मेगावाट तक पहुंच गई। इसमें से 4,683 मेगावाट का उत्पादन पंजाब के भीतर किया गया, जबकि शेष आवश्यकता को केंद्रीय ग्रिड द्वारा आपूर्ति की गई बिजली से पूरा किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि पंजाब को केंद्रीय आवंटन से 9,921 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई, जो कि उसके निर्धारित हिस्से 10,418 मेगावाट से 497 मेगावाट कम थी।
भाखड़ा और पोंग जलाशय सुरक्षित
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हाल ही में हुई बारिश के बावजूद राज्य के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर खतरे के निशान से काफी नीचे बना हुआ है।
भाखड़ा बांध का जलस्तर 1,607.17 फीट मापा गया, जो इसके खतरे के निशान 1,680 फीट से लगभग 72.83 फीट नीचे है। बांध में फिलहाल 46,663 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जबकि 23,269 क्यूसेक पानी नीचे की ओर छोड़ा जा रहा है।
इसी तरह, पोंग बांध का जलस्तर 1,343.6 फीट दर्ज किया गया, जो इसके 1,390 फीट के खतरे के निशान से 46.4 फीट नीचे है। इस जलाशय में 23,380 क्यूसेक पानी आ रहा है और 13,715 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों बांध सुरक्षित सीमाओं के भीतर संचालित हो रहे हैं।
