नई दिल्ली(राजीव शर्मा): कृषि विपणन राज्य का विषय है। भारत सरकार नीतिगत उपायों और योजनाओं के माध्यम से राज्यों को कृषि विपणन के सुदृढ़ीकरण तथा किसानों को उचित एवं लाभकारी मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करने में सहायता प्रदान करती रही है।
भारत सरकार ने वास्तविक कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) को वर्चुअल रूप से एकीकृत करते हुए एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार (ई-ट्रेडिंग) पोर्टल, राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) की शुरुआत की है। यह प्लेटफॉर्म पारदर्शी ऑनलाइन बोली, बेहतर मूल्य निर्धारण और बिक्री मूल्य की सीधे बैंक खातों में अदायगी के माध्यम से किसानों को क्रेताओं के एक बड़े समूह तक पहुंच प्रदान करता है। यह प्लेटफॉर्म देश भर के क्रेताओं को ऑनलाइन बोली में भाग लेने में सक्षम बनाकर अंतर-राज्यीय व्यापार को भी सुगम बनाता है। 30 जून, 2026 तक, ई-नाम पर 1.89 करोड़ किसान और 2.78 लाख व्यापारी पंजीकृत हैं। ई-नाम पर अंतर-राज्यीय व्यापार वर्ष 2018-19 में 563 मीट्रिक टन (₹37 लाख) से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 2,984.3 मीट्रिक टन (₹14.28 करोड़) हो गया है, जिसमें ₹83.95 करोड़ मूल्य के 28,566 मीट्रिक टन का संचयी अंतर-राज्यीय व्यापार शामिल है। प्रति लॉट व्यापारियों की औसत बिडिंग की संख्या वर्ष 2016-17 में 2.1 से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 2.8 हो गई है, जो क्रेताओं के बीच बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन एवं संवर्धन हेतु केंद्रीय क्षेत्र की योजना के अंतर्गत, देश भर में 10,000 एफपीओ पंजीकृत किए गए हैं। एफपीओ, इकोनॉमीज ऑफ स्केल का लाभ उठाने और सदस्य किसानों की मोल-भाव करने की क्षमता बढ़ाने के लिए उपज के एकत्रीकरण हेतु किसानों को संगठित करते हैं। वर्ष 2020 में योजना के शुभारंभ के बाद से, एफपीओ का कुल संचयी कारोबार 20,340 करोड़ रुपये को पार कर गया है।
फसलोपरांत प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, भंडारण और मूल्यवर्धन को बेहतर बनाने के लिए, कृषि विपणन इन्फ्रास्ट्रक्चर (एएमआई) योजना के अंतर्गत, पिछले दस वर्षों में 369.18 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता वाली 12,353 भंडारण इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और 6,901 गैर-भंडारण परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) के अंतर्गत, 18,893 गोदामों, 3,110 कोल्ड स्टोर/कोल्ड चेन परियोजनाओं और 2,105 एकीकृत प्राथमिक एवं द्वितीयक प्रसंस्करण इकाइयों को ब्याज अनुदान (इंटरेस्ट सब्वेंशन) सहायता प्रदान की गई है। समेकित बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) घटक के अंतर्गत, पैक हाउस, कोल्ड स्टोरेज, रेफ्रीजिरेटेड वैन, पकाई कक्ष (राइपनिंग चैंबर), प्री-कूलिंग तथा प्रसंस्करण इकाइयों सहित लगभग 1.76 लाख इन्फ्रास्ट्रक्चर इकाइयां निर्मित की गई हैं।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देने हेतु, अन्य बातों के साथ-साथ पोस्ट-हार्वेस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रसंस्करण सुविधाओं के सृजन के लिए केंद्रीय क्षेत्र की व्यापक योजना – प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) का कार्यान्वयन कर रहा है। 30 जून, 2026 तक, 1256 परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं अथवा प्रचालित हैं, जिनसे लगभग 37.76 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।
विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना का कार्यान्वयन सहकारिता मंत्रालय द्वारा पैक्स (पीएसीएस) स्तर पर भंडारण इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए किया जा रहा है, जिससे किसान अपनी उपज का भंडारण कर सकें, मजबूरन बिक्री (डिस्ट्रेस सेल) से बच सकें, लाभकारी बाजारों तक पहुंच में सुधार कर सकें और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकें। 313 पैक्स में निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जिससे 1.80 एलएमटी भंडारण क्षमता का सृजन हुआ है।
नीति आयोग ने अपने वर्ष 2020 और 2025 के मूल्यांकन रिपोर्ट में समेकित कृषि विपणन योजना (आईएसएएम) को बेहतर बाजार इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रतिस्पर्धी बाजारों और किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति के माध्यम से कृषि विपणन को सुदृढ़ करने हेतु एक प्रासंगिक इंटर्वेंशन के रूप में मान्यता प्रदान की है। इस योजना ने बाजार सुधारों, एफपीओ-नेतृत्व वाले एग्रीगेशन, मूल्यवर्धन और पोस्ट-हार्वेस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास को बढ़ावा दिया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्रेडिंग इकाइयों और भंडारण सुविधाओं ने बेहतर प्रदर्शन किया, जहां वे बागवानी क्लस्टरों के साथ एकीकृत थीं तथा सक्रिय एफपीओ एवं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी थीं, जिससे उपयोगिता और उपलब्धता में सुधार हुआ। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि 60 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने आईएसएएम के अंतर्गत पोस्ट-हार्वेस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और फसल प्रसंस्करण सुविधाओं के उपयोग की जानकारी दी है। लाभार्थियों ने मूल्यवर्धन के माध्यम से मूल्य प्राप्ति, उत्पाद की लॉन्गेविटी और मार्केट अपील में सुधार को स्वीकार किया है। मूल्यांकन में पारदर्शी बाजारों, उचित मूल्य निर्धारण, बेहतर कॉन्ट्रैक्ट नेगोशिएशन और इंस्टीट्यूशनल फाइनेंस तक बेहतर पहुंच को बढ़ावा देने में ई-नाम की क्षमता का उल्लेख किया गया है। कुल मिलाकर, आईएसएएम ने कृषि विपणन इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने और बाजार दक्षता में सुधार लाने में योगदान दिया है।
कृषि राज्य का विषय है। भारत सरकार देश भर में उत्पादन, उत्पादकता, किसानों की आय आदि बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्रीय क्षेत्रक और केंद्र प्रायोजित योजनाओं तथा कार्यक्रमों की एक व्यापक शृंखला के माध्यम से राज्यों के प्रयासों में सहायता करती है। इन योजनाओं में कृषि का संपूर्ण स्पेक्ट्रम शामिल है, जिसमें ऋण, बीमा, आय सहायता, इन्फ्रास्ट्रक्चर, फसलें (बागवानी सहित), बीज, मशीनीकरण, विपणन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, किसान समूह, सिंचाई, विस्तार, डिजिटल कृषि तथा फसलों की खरीद शामिल हैं।
यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
