ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण को मिलेगी नई गति

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत, देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आरंभ किया गया था ताकि विभिन्न भाषाओं और लिपियों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांडुलिपि संग्रहों, भंडारों और संरक्षकों की पहचान और दस्तावेजीकरण किया जा सके। तथापि मिशन के तहत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और वास्तिवक पंजीकरण के लिए कोई जिला-वार लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया था। सर्वेक्षण के दौरान, 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई है।

ज्ञान भारतम वेब पोर्टल भारत की पांडुलिपि विरासत तक बुद्धिमत्तापूर्ण पहुंच प्रदान करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सक्षम तकनीकों का उपयोग करता है, जिसमें लार्ज लैंग्वेज स्क्रिप्ट मॉडल (एलएलएसएम), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर), हैंडरिटेन टेक्‍स्‍ट रिकग्निशन (एचटीआर), स्क्रिप्ट रिकग्निशन, सिमेंटिक सर्च और मशीन-सहायता प्राप्त अनुवाद शामिल हैं।

ज्ञान भारतम वेब पोर्टल का एआई-संचालित ज्ञान इंटरफेस ज्ञान मित्रम, पांडुलिपि छवियों, प्रतिलेखों और अनुवादों को एकीकृत करके पांडुलिपियों की बुद्धिमतापूर्ण व्याख्या, प्रासंगिककरण और अन्वेषण में सक्षम करने के लिए एलएलएसएम, ओसीआर, एचटीआर, स्क्रिप्ट रिकग्निशन, सिमेंटिक खोज और मशीन-सहायता प्राप्त अनुवाद का उपयोग करता है।

भारतीयजीपीटी ने ज्ञान भारतम वेब पोर्टल पर “पांडुलिपि से संवादात्मक एआई” की सुविधा उपलब्ध कराई है, जो पांडुलिपि विरासत को एआई-तैयार, मशीन-पठनीय ज्ञान में परिवर्तित करती है और “टॉक टू मैन्युस्क्रिप्ट” सुविधा के माध्यम से टेक्‍स्‍ट, ऑडियो और आवाज-आधारित बातचीत सहित बहुभाषी और बहुआयामी पहुंच प्रदान करती है। इससे भारत की ज्ञान परंपराएं विद्वानों, छात्रों, शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए अधिक सुलभ हो जाती हैं।

पांडुलिपि दर्पण, ज्ञान भारतम वेब पोर्टल पर एक एआई संचालित उपकरण है जो उपयोगकर्ताओं को एक डिजिटाइज्ड पांडुलिपि छवि अपलोड करने या चुनने और एआई-सहायता प्राप्त लिपि पहचान, लिप्यंतरण और अनुवाद तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।

पांडुलिपियों की डिजिटल प्रतियों तक पहुंच लागू कानूनों और संरक्षकों एवं अधिकार धारकों के अधिकारों के अनुसार सुगम बनाई जाती है। जहां भी कानूनी रूप से अनुमत हो, पांडुलिपियों और संबंधित मेटाडेटा को राष्ट्रीय डिजिटल भंडार के माध्यम से सार्वजनिक और अकादमिक अनुसंधान के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है, जबकि संवेदनशील, प्रतिबंधित या अधिकार-संरक्षित सामग्री उचित पहुंच शर्तों के अधीन हो सकती है।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित प्रश्‍न के उत्तर में यह जानकारी दी।

By Rajeev Sharma

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