यूके वीज़ा बदलाव: भारतीय छात्रों के लिए मिली-जुली खबर; नए नियम नवजात शिशुओं को देंगे कानूनी सुरक्षा, लेकिन कम होगी वर्क वीजा की अवधि

UK Visa

नई दिल्ली (राजीव शर्मा): यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने आव्रजन (इमिग्रेशन) बदलावों के एक नए सेट की घोषणा की है, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों और उनके परिवारों को सीधे प्रभावित करेगा। जहाँ सरकार ने ग्रेजुएट वीजा (Graduate Visa) धारकों के यहाँ पैदा होने वाले बच्चों को कानूनी आव्रजन दर्जा प्राप्त करने की अनुमति देने वाला एक नया प्रावधान पेश किया है, वहीं उसने भविष्य के आवेदकों के लिए पढ़ाई के बाद मिलने वाले वर्क राइट्स (काम करने के अधिकार) की अवधि को कम करने का भी निर्णय लिया है।

संशोधित नियम 9 जुलाई को संसद के समक्ष रखे गए, जो 3 अगस्त 2026 से लागू होंगे। अधिकारियों ने इस कदम को आव्रजन प्रणाली को सुव्यवस्थित करने के साथ-साथ देश में रहने वाले परिवारों के लिए अधिक स्पष्टता सुनिश्चित करने का एक प्रयास बताया है।

यूके में पैदा हुए बच्चों को कानूनी मान्यता

इन बड़े सुधारों में से एक विदेशी छात्रों की लंबे समय से चली आ रही चिंता का समाधान करता है। अपडेटेड ढांचे के तहत, ग्रेजुएट वीजा पर रहने वाले माता-पिता के यहाँ यूके में पैदा होने वाले बच्चे अब डिपेंडेंट (आश्रित) का दर्जा पाने के पात्र होंगे। बच्चे को दी गई अनुमति माता-पिता की आव्रजन अनुमति के समान अवधि के लिए ही वैध रहेगी।

इससे पहले, कई परिवारों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था क्योंकि आव्रजन नियमों में उन बच्चों की स्थिति स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं थी, जो माता-पिता के स्टूडेंट वीजा से ग्रेजुएट वीजा पर शिफ्ट होने के बाद पैदा हुए थे। अधिकारियों का मानना ​​है कि इस संशोधन से प्रशासनिक बाधाएं कम होंगी और प्रभावित परिवारों के लिए यात्रा, दस्तावेज़ीकरण और निवास प्रक्रियाएं आसान हो जाएंगी।

भविष्य के आवेदकों के लिए ग्रेजुएट वीजा की अवधि होगी कम

परिवार-केंद्रित सुधारों के साथ-साथ, यूके सरकार ने पुष्टि की है कि दिसंबर 2026 के बाद अंडरग्रेजुएट (स्नातक) और मास्टर प्रोग्राम पूरा करने वाले छात्रों को मौजूदा दो साल की वैधता के बजाय 18 महीने का ग्रेजुएट वीजा मिलेगा।

  • यह संशोधित समय-सीमा 1 जनवरी 2027 से जमा किए जाने वाले आवेदनों पर लागू होगी।
  • जो छात्र दिसंबर 2026 के अंत से पहले अपना ग्रेजुएट वीजा आवेदन जमा करेंगे, वे मौजूदा दो साल की पोस्ट-स्टडी वर्क अवधि के लिए पात्र बने रहेंगे।
  • वहीं, डॉक्टरेट (पीएचडी) स्नातकों को बिना किसी बदलाव के तीन साल का ग्रेजुएट वीजा मिलता रहेगा।

कुशल रोजगार पर अधिक ध्यान और पंजाब के छात्रों पर प्रभाव

ब्रिटिश सरकार का कहना है कि इस संशोधित नीति का उद्देश्य स्नातकों को लंबे समय तक अस्थायी कार्य अनुमति पर रहने के बजाय जल्द से जल्द कुशल रोजगार (Skilled Employment) में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है। अधिकारियों का तर्क है कि ग्रेजुएट वीजा की अवधि कम होने से पात्र उम्मीदवार अधिक तेजी से स्किल्ड वर्कर वीजा (Skilled Worker Visa) श्रेणी में जाने के लिए प्रेरित होंगे।

भारतीय छात्रों पर असर: इन बदलावों का भारतीय छात्रों, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा के छात्रों पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जो यूके में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं। शिक्षा सलाहकारों (Education advisers) का कहना है कि पढ़ाई के बाद काम करने की कम अवधि मिलने से स्नातकों के पास ऐसा रोजगार सुरक्षित करने के लिए कम समय बचेगा जो प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) आवश्यकताओं को पूरा करता हो, जिससे करियर की योजना बनाना अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा।

जहाँ कई परिवारों ने ग्रेजुएट वीजा अवधि के दौरान पैदा हुए बच्चों को औपचारिक रूप से मान्यता देने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है, वहीं यूके में उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को अब पढ़ाई के बाद की सख्त समय-सीमा को देखते हुए अपनी दीर्घकालिक रोजगार रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

By Rajeev Sharma

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