नयी दिल्ली(राजीव शर्मा): साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ अपनी सबसे बड़े समन्वित अभियानों में से एक के हिस्से के रूप में, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 16 राज्यों में 80 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली, जिनमें पंजाब और हरियाणा भी शामिल हैं, एक व्यापक डिजिटल-arrest स्कैम नेटवर्क की चल रही जांच के तहत।
इस राष्ट्रीय अभियान का लक्ष्य क्रमबद्ध साइबरक्राइम इकोसिस्टम था, जिसके कथित तौर पर 200 से अधिक डिजिटल-arrest धोखाधड़ी मामलों से संबंध होने का संदेह है। कार्रवाई के दौरान, एजेंसी ने चेन्नई और कोलकाता से दो लोगों को गिरफ़्तार किया जिन पर शेल कंपनियाँ बनाने और अवैध धन प्रवाह के लिए उपयोग किए गए म्यूल बैंक खातों (mule bank accounts) संचालित करने का संदेह है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर धोखाधड़ी से अर्जित लगभग ₹2 करोड़ की धुलाई के लिए किया गया था।
नकली सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट का पर्दाफाश
जांच में धार तब आई जब CBI ने एक धोखाधड़ीपूर्ण वेबसाइट का खुलासा किया जो भारत के सुप्रीम कोर्ट की अधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती दिखाई देती थी। कथित तौर पर इस नकली पोर्टल का इस्तेमाल साइबर अपराधियों ने पीड़ितों को डराने के लिए किया, नकली नोटिस और आदेश जारी कर कानूनी कार्रवाई तथा डिजिटल हिरासत का भय दिखाया जाता था।
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा दर्ज शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, एजेंसी ने एक मामला दर्ज किया और स्कैम के पीछे के नेटवर्क की विस्तार से जांच शुरू की।
पीड़ितों को फंसाने के लिए जाली दस्तावेज़ों का प्रयोग
अधिकारियों ने कहा कि धोखेबाज़ों ने पीड़ितों का विश्वास हासिल करने के लिए उन्नत तरीकों का सहारा लिया। नेटवर्क ने कथित रूप से जाली दस्तावेज़ अपलोड किए, जिनमें नकली न्यायालय आदेश और कानून-पालन संस्थाओं द्वारा जारी किए जाने का दिखावा किए गए नोटिस शामिल थे, ताकि उनके दावे वैध प्रतीत हों।
उन्नत डिजिटल फोरेंसिक उपकरणों और तकनीकी विश्लेषण का उपयोग कर जांचकर्ताओं ने आपराधिक अवसंरचना के प्रमुख घटकों को ट्रेस किया, जिनमें से कुछ के विदेशों से संबंध होने का संदेह है।
तलाशी के दौरान जब्त साक्ष्य
रेड के दौरान, CBI टीमों ने बड़ी मात्रा में अपराधसंगत सामग्री जब्त की, जिसमें डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन, वित्तीय रिकॉर्ड और बैंकिंग लेनदेन से जुड़े दस्तावेज़ शामिल हैं।
जब्त साक्ष्य अब और संदिग्धों, वित्तीय रास्तों और नेटवर्क के परिचालन की पूरी सीमा की पहचान के लिए फोरेंसिक परीक्षण के अधीन हैं।
अंतरराष्ट्रीय कड़ियाँ संदेहांतर्गत
प्रारम्भिक निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि धोखाधड़ी सिंडिकेट ने केवल भारतीय नागरिकों को ही नहीं, बल्कि कई विदेशी देशों में रहने वाले पीड़ितों को भी निशाना बनाया हो सकता है। CBI सूत्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुगम बनाने के लिए संबंधित विदेशी कानून-पालन एजेंसियों को आधिकारिक चैनलों के माध्यम से सूचित किया जा रहा है।
एजेंसी का मानना है कि यह ऑपरेशन डिजिटल-गिरफ्तार स्कैम का समर्थन करने वाली महत्वपूर्ण अवसंरचना का एक बड़ा हिस्सा उजागर कर चुका है — यह एक प्रकार की साइबर धोखाधड़ी है जिसमें पीड़ितों से कहा जाता है कि वे किसी जांच के दायरे में हैं और गिरफ्तार से बचने के लिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव डाला जाता है।
जांच जारी है
अधिकारियों ने कहा कि जब्त सामग्रियों के फोरेंसिक विश्लेषण के साथ आगे और गिरफ़्तारियाँ और कार्रवाई हो सकती है। CBI व्यापक नेटवर्क को निगलने और साइबर अपराध संचालन में शामिल सभी व्यक्तियों की पहचान करने के लिए अपनी कोशिशें जारी रख रही है।
ताज़ा कार्रवाई डिजिटल-गिरफ्तार स्कैम द्वारा उत्पन्न बढ़ते खतरे को रेखांकित करती है और उन साइबर अपराधियों की बढ़ती जटिलता को उजागर करती है जो भय, तकनीक और जाली आधिकारिक दस्तावेज़ों का दुरुपयोग कर निर्दोष पीड़ितों को ठगते हैं।
