गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) ने देश के शासन तंत्र में डिजिटल, पारदर्शी और समावेशी सार्वजनिक खरीद को मजबूत किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):देश की शासन प्रणाली प्रौद्योगिकी-आधारित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण की दिशा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान निरंतर बदलाव गवाह बनी है। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) की स्‍थापना 9 अगस्त, 2016 को हुई थी। जेम ने कुशल और अधिक पारदर्शी सार्वजनिक खरीद को सक्षम बनाकर, खरीदारों और विक्रेताओं की व्यापक भागीदारी को बढ़ावा देकर और बेहतर सेवा वितरण परिणामों में योगदान देकर इस बदलाव को आगे बढ़ाया है।

जेम ने एक महत्वपूर्ण शासन सुधार के रूप में परिकल्पित सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया को काफी हद तक मेनुअल तरीके और जटिल प्रक्रिया से बदलकर इसे डिजिटल और डेटा-आधारित प्रणाली में बदल दिया है। जेम ने मानवीय हस्तक्षेप को कम करके, पारदर्शिता बढ़ाकर और सरकारी खरीद के अवसरों तक पहुंच को सरल बनाकर विभिन्न उद्यमों और भौगोलिक क्षेत्रों में व्यापक भागीदारी को संभव बनाया है। यह डिजिटल खरीद के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में लगातार कार्य कर रहा है।

जेम ने सरकारी खरीद बाजारों को सभी तरह के उद्यमों के लिए खोलकर व्यापार करने में सहजता को बेहतर बनाने में भी योगदान दिया है। ऑनलाइन ऑनबोर्डिंग, पारदर्शी बोली तंत्र, डिजिटल अनुबंध प्रबंधन और संपूर्ण खरीद प्रक्रियाओं के माध्यम से जेम ने प्रवेश बाधाओं को कम किया है। इसके साथ ही सरकारी आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवसायों की भागीदारी को सुगम बनाया है।

जेम प्लेटफॉर्म की प्रमुख विशेषता समावेशिता रही है। सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) की भागीदारी में वृद्धि हुई है, पंजीकृत एमएसई की संख्या 2016-17 में 2,396 से बढ़कर वर्तमान में 11.9 लाख से अधिक हो गई है। एमएसई से खरीद 69 करोड़ रुपये से बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जबकि इसी अवधि में ऑर्डर की संख्या 2,994 से बढ़कर 2.17 करोड़ से अधिक हो गई है।

जेम ने परंपरागत रूप से कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों की भागीदारी को भी संभव बनाया है। जेम पर महिला स्वामित्व वाली सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) की संख्या 2016-17 में 268 से बढ़कर 2.16 लाख से अधिक हो गई है। खरीद मूल्य 8 करोड़ रुपये से बढ़कर 93,327 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। स्टार्टअप की भागीदारी 88 से बढ़कर 40,000 से अधिक हो गई है। खरीद मूल्य 2 करोड़ रुपये से बढ़कर 61,400 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसी प्रकार, पंजीकृत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) एमएसई की संख्या 38 से बढ़कर 66,000 से अधिक हो गई है और खरीद मूल्य 21,800 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। ये विकास जेम के माध्यम से सुगम सार्वजनिक खरीद में बढ़ती भागीदारी को दर्शाते हैं।

जेम ने खरीद के अलावा, सार्वजनिक सेवा वितरण सम्‍बंधी आवश्यकताओं, विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र में सहायता प्रदान की है। जेम प्लेटफॉर्म ने 324 करोड़ से अधिक वैक्सीन और 199 करोड़ सिरिंज की खरीद में मदद की है। जेम ने वंदे भारत ट्रेनों के लिए मेडिकल किट, निदान उपकरण और स्वास्थ्य सम्‍बंधी विभिन्न प्रकार की आपूर्ति और सेवाओं की खरीद को भी संभव बनाने में योगदान दिया है।

जेम के विकास में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है। यह प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित उपकरणों, उन्नत विश्लेषण, डिजिटल निगरानी प्रणालियों और पारदर्शी नीलामी तंत्रों से खरीद प्रक्रियाओं में दक्षता, जवाबदेही और उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बना रहा है।

देश के विकसित भारत दृष्टिकोण की ओर बढ़ते हुए जेम नवाचार, बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव और सर्वोत्तम तौर-तरीकों को अपनाकर डिजिटल खरीद प्रणालियों को मजबूत करने पर केंद्रित है। जेम सरकारी संस्थानों, व्यवसायों और उद्यमियों को सहयोग प्रदान करने वाले एक डिजिटल बाज़ार के रूप में कार्य करता है।

जेम स्थानीय उद्यमों को सरकारी मांग से जोड़कर, सार्वजनिक खरीद में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों, सहकारी समितियों और ग्रामीण उद्यमों की भागीदारी को सक्षम बनाकर आत्मनिर्भर भारत सहित व्यापक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में योगदान देता है।

जेम के सीईओ श्री मिहिर कुमार ने कहा कि पिछले बारह वर्षों में, जेम ने एक पारदर्शी, कुशल और समावेशी सार्वजनिक खरीद प्रणाली के निर्माण में योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि जेम ने सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों, स्टार्टअप्स और स्थानीय निर्माताओं सहित उद्यमों की भागीदारी को सक्षम बनाया है। संरचित एवं पारदर्शी तरीके से सरकारी खरीद तक ​​पहुंच मजबूत हुई है। जेम ने सार्वजनिक सेवा वितरण को सहयोग देने के साथ ही आर्थिक अवसरों का विस्तार किया है।

जेम सरकारी संस्थानों में खरीद और सेवा वितरण को सहयोग देने वाले एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य कर रहा है।

By Rajeev Sharma

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