ईरानी फंड से होगा गल्फ देशों का पुनर्निर्माण! अमेरिका की नई रणनीति पर चर्चा तेज

वॉशिंगटन (राजीव शर्मा):संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार उन सुझावों का आकलन कर रही है जिनमें विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों को गल्फ देशों में हालिया संघर्ष से हुए नुकसान की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए उपयोग करने की बात कही गई है। इस विचार पर वित्त मंत्रालय और अन्य एजेंसियों के बीच कानूनी व वि‍त्तीय पहलुओं की समीक्षा चल रही है।

अधिकारियों ने बताया कि गृहप्रवेशी बातचीत में यह देखा जा रहा है कि क्या प्रतिबंधों के तहत फेंस किए गए बैंक आरक्षित और अन्य विदेशी परिसंपत्तियाँ कानूनी रूप से गल्फ सहयोगियों के इंफ्रास्ट्रक्चर मुआवजे के तौर पर जारी की जा सकती हैं। इस पहल को तब अधिक ध्यान मिला जब क्षेत्रीय तनाव — विशेषकर अरब खाड़ी में ड्रोन और मिसाइल हमलों की श्रृंखला — बढ़ी।

सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी वित्त सचिव ने गल्फ देशों से उन हमलों से हुए आर्थिक नुकसान का विस्तृत आंकलन माँगने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी संभावित मुआवजे का दायरा स्पष्ट किया जा सके। समीक्षा में अलग‑अलग प्रकार की रोक‑थाम वाली परिसंपत्तियों का तकनीकी और कानूनी मूल्यांकन शामिल होगा।

हाल के महीनों में सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और बहरीन में कई हमलों की घटनाएँ सामने आई हैं जिनके लिए तख़्ती तौर पर ईरान‑समर्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया गया है। तनाव तब और बढ़ा जब अमेरिकी बलों ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ के पास कुछ ईरानी ठिकानों को निशाना बताकर संवादात्मक कार्रवाई की, और उसके बाद दोनों तरफ से सीमित हथियारबंद प्रतिसाद दर्ज हुए।

कूटनीतिक चैनलों पर बातचीत अब भी चल रही है, पर तेहरान ने बार‑बार उन जमी हुई निधियों तक पहुँच की मांग फोरम पर रखी है जिनका इस्तेमाल किसी भी समझौते में प्रतिबंधों की रियायत के हिस्से के रूप में किया जा सकता है। वहीं, क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय दलों की मध्यस्थता प्रयासों के बावजूद, हालिया सैन्य करवाईयों ने व्यापक राजनीतिक समाधान की राह को कठिन कर दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका ने ऐसी संपत्तियों का पुनर्निर्देशन किया, तो वह न केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और कानूनी ढांचे में जटिल प्रश्न उठाएगा बल्कि इस कदम के दीर्घकालिक प्रभाव क्षेत्रीय शक्ति‑संतुलन और प्रतिबंध नीति पर भी पड़ेगा। अमेरिकी प्रशासन के भीतर अब विस्तृत कानूनी परामर्श और हितधारकों के आकलन पर निर्भर करेगा कि कोई अंतिम निर्णय कब और कैसे लिया जाए।

By Rajeev Sharma

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