उत्तर पूर्वी क्षेत्र, आइजोल के लिए क्षेत्रीय समीक्षा बैठक: एमडीसीएस बेसलाइन सर्वेक्षण, सुअर पालन पुस्तिका और एएसएफ जागरूकता फिल्म लॉन्च किए गए

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्रालय ने मिजोरम के आइजोल में ‘क्षेत्रीय समीक्षा बैठक: पूर्वोत्तर क्षेत्र 2026’ का आयोजन किया। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्रालय और पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने इस बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन भी उपस्थित थे।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन एवं पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने पीएमएमएसवाई और एफआईडीएफ के अंतर्गत लगभग 32.15 करोड़ रुपये की प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। उन्होंने उत्तर पूर्वी क्षेत्र में आत्मनिर्भर मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने के प्रति सरकार के संकल्प के बारे में बताया। श्री सिंह ने सर्वश्रेष्ठ मत्स्य पालन स्टार्टअप और सहकारी समितियों सहित लाभार्थियों को मत्स्य पालन केसीसी कार्ड और पुरस्कार वितरित किए तथा उनसे बातचीत कर उनकी चुनौतियों को समझा और आगे सहयोग प्रदान किया।

केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र की मत्स्य पालन क्षमता का दोहन करने के लिए राज्यों और हितधारकों से समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया, जिसमें उन्होंने सजावटी मत्स्य पालन में अवसरों पर प्रकाश डाला, क्योंकि यह क्षेत्र निर्यात के प्रमुख वाहक के रूप में उभर रहा है। उन्होंने एकीकृत एक्वापार्क और क्लस्टर विकास के माध्यम से मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर बल दिया, जिसके लिए पहले ही सात क्लस्टर अधिसूचित किए जा चुके हैं। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि के बारे में चर्चा की और एक्वापार्क, क्लस्टर विकास और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ एनएफडीपी के माध्यम से डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया, जिसमें मिजोरम में स्वीकृत 50 करोड़ रुपये का मछली विपणन केंद्र भी शामिल है। उन्होंने राज्यों को स्पष्ट रूपरेखा और समय-सीमा के माध्यम से समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

“उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक” में बहुउद्देशीय डेयरी सहकारी समितियों (एमडीसीएस) के दायरे को बढ़ाने के उद्देश्य से ग्राम स्तरीय आधारभूत सर्वेक्षण लॉन्च किया गया। इसका लक्ष्य उत्तर पूर्वी राज्यों में डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत करना और ग्रामीण डेयरी किसानों के लिए आजीविका के अवसरों को बढ़ाना है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने “गुड हसबेन्ड्री प्रेक्टिसेस इन पिग फार्मिंग” नामक पुस्तिका और अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) अवेयरनेस फिल्म को भी लॉन्च किया। पुस्तिका में वैज्ञानिक तरीके से सूअर पालन, उत्पादकता में सुधार, रोग निवारण, आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों और किसानों के लिए स्थायी आजीविका पर मार्गदर्शन दिया गया है। एएसएफ फिल्म उत्तर पूर्वी क्षेत्र में एएसएफ की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जागरूकता, तैयारी तथा समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देती है।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन मंत्री ने आइजोल में क्षेत्रीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र में पशुधन एवं दुग्ध उत्पादन क्षेत्र की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जो ग्रामीण आजीविका और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है। उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान और लिंग-आधारित वीर्य प्रौद्योगिकी को व्यापक रूप से अपनाने, दुग्ध उत्पादन इंफ्रास्ट्रक्चर और सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने, सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और टीकाकरण अभियानों के माध्यम से रोग नियंत्रण पर बल दिया। उन्होंने परियोजनाओं के समयबद्ध कार्यान्वयन, केंद्रीय निधियों के कुशल उपयोग और पशुधन एवं दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में इस क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर भी बल दिया।

भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने मत्स्य पालन उत्पादकता और स्थिरता को बढ़ाने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, साथ ही मूल्य प्राप्ति में सुधार के लिए रसद, कोल्ड चेन और बाजार संपर्क को मजबूत करने के महत्व पर भी बल दिया।

भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन राज्य मंत्री ने पूर्वोत्तर राज्यों में मजबूत सामुदायिक आधारित इको-सिस्टम, विशेष रूप से महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इन सामुदायिक नेटवर्कों और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रभावी इस्तेमाल पशुपालन क्षेत्र को मजबूत कर सकता है, निर्यात-उन्मुख उत्पादों को बढ़ावा दे सकता है और पूर्वोत्तर में क्षेत्रीय विकास को गति दे सकता है। भारत सरकार में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव
श्री नरेश पाल गंगवार ने अपने मुख्य भाषण में पूर्वोत्तर राज्यों द्वारा विभागीय योजनाओं के प्रभावी पुनर्गठन और अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों से पशु चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर, टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के मानकों को अपनाने का आग्रह किया और एसएएससीआई योजना के माध्यम से पूंजी निवेश के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विभाग अफ्रीकी स्वाइन फीवर (एएसएफ) के लिए टीकों के विकल्पों की खोज कर रहा है।

मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तर पूर्वी क्षेत्र में मत्स्य पालन परियोजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला और लागत मानदंडों को तर्कसंगत बनाकर क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान करने पर जोर दिया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज, विविधीकरण और बहुकृषि के महत्व के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास के लिए आईसीएआर के मजबूत समर्थन पर बल दिया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज, विविधीकरण, क्षमता निर्माण और मूल्यवर्धन पर बल देते हुए सतत विकास और निर्यात क्षमता को बढ़ाने में जलाशयों, पिंजरा संस्कृति, डिजिटलीकरण और निजी भागीदारी की भूमिका के बारे में बताया।

राज्य मत्स्य पालन मंत्रियों ने तालाब विकास, इनपुट समर्थन और वित्तीय सहायता सहित प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला, साथ ही सजावटी मत्स्य पालन की क्षमता और युवा उद्यमशीलता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने एकीकृत खेती को बढ़ावा देने, कौशल और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने के लिए पीएमएमएसवाई इकाई लागतों को संशोधित करने का भी आह्वान किया।

भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की अपर सचिव (पशु एवं दुग्ध) सुश्री वर्षा जोशी ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कोष और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम सहित प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों से पशुपालन एवं दुग्ध उद्योग में इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने और विकास को बढ़ावा देने के लिए एसएएससीआई योजना के अंतर्गत मिलने वाली सहायता का लाभ उठाने का आग्रह किया।

भारत सरकार के मत्स्य विभाग के संयुक्त सचिव श्री सागर मेहरा ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के मत्स्य पालन क्षेत्र की उपलब्धियों और कार्ययोजना को प्रस्तुत किया। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 2,228 करोड़ रुपये के निवेश पर प्रकाश डाला और उत्पादकता वृद्धि, मूल्य श्रृंखला विकास और सतत विकास के लिए प्रमुख प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। एनएफडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बिजय कुमार बेहरा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया, जिसके साथ सत्र का समापन हुआ।

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने राज्य मंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक के बाद मुलको डेयरी का दौरा किया। इस दौरे में मिजो कैफे और पशुपालन एवं डेयरी संगठन (एफपीओ) कार्यालय-सह-बिक्री केंद्र का उद्घाटन, मुलको गाय के घी की लॉन्चिंग, किसानों को तकनीकी सहायता का वितरण और मत्स्य पालन लाभार्थियों, पशुपालन एवं डेयरी संगठनों (एफएफपीओ) तथा सहकारी समितियों को सम्मानित करना शामिल था, साथ ही क्षेत्र की जमीनी स्तर की सफलता की कहानियों को दर्शाया गया।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने अधिक उपज देने वाले पशुओं की संख्या को बढ़ाने के लिए अभियान-आधारित कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं और लिंग-आधारित वीर्य के उपयोग पर जोर दिया, साथ ही निर्धारित समय-सीमा के साथ मिशन-आधारित डेयरी सहकारी समितियों के गठन की घोषणा की। उन्होंने मिजोरम के किसानों को आश्वासन दिया कि विभाग और एनडीडीबी उत्तर पूर्वी क्षेत्र को डेयरी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूर्ण समर्थन प्रदान करेंगे। ये पहलें सहकारी समितियों को मजबूत करने, उत्पादकता बढ़ाने और मिजोरम तथा पूरे उत्तर पूर्वी क्षेत्र के किसानों के लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

By Rajeev Sharma

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