महंगा होगा सोना-चांदी! केंद्र सरकार ने बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाया

नई दिल्ली (राजीव शर्मा):गैर-जरूरी आयातों को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है।

संशोधित दरें 13 मई से लागू हो गई हैं, जिसे वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के माध्यम से लागू किया गया। इनमें सामाजिक कल्याण अधिभार (SWS) और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) दोनों में बढ़ोतरी शामिल है, जिसके कारण कीमती धातुओं पर कुल सीमा शुल्क में तेज बढ़ोतरी हुई है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक जिंस कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

सोने के आयात ने बनाया रिकॉर्ड

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का सोना आयात 71.98 अरब अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। मूल्य में वृद्धि के बावजूद, आयातित सोने की वास्तविक मात्रा लगभग 4.8 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रह गई, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल को दर्शाती है।

सोने की कीमतें वित्त वर्ष 2025 में 76,617 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में लगभग 99,825 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम हो गईं।

घरेलू बुलियन बाजारों में भी नई तेजी देखी गई। दिल्ली में सोना 1,500 रुपये की तेजी के साथ 1,56,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि चांदी 12,000 रुपये उछलकर 2,77,000 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।

विदेशी मुद्रा चिंता से जुड़ा कदम

यह शुल्क वृद्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के बाद आई है, जिसमें उन्होंने नागरिकों से सोने जैसे आयातित सामानों पर अनावश्यक खर्च से बचने, ईंधन की खपत कम करने और विदेशी यात्राओं को टालने का आग्रह किया था, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा की जा सके।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार का यह ताजा फैसला कीमती धातुओं के भारी आयात को हतोत्साहित करने के लिए है, जो देश के व्यापार संतुलन पर काफी असर डालते हैं।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने हाल ही में चल रहे पश्चिम एशिया संघर्ष को “लाइव बैलेंस ऑफ पेमेंट्स स्ट्रेस टेस्ट” करार दिया था और चेतावनी दी थी कि इसका असर महंगाई, रुपये और भारत की चालू खाते की स्थिति पर पड़ सकता है।

भारतीय रुपया इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.63 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे बाहरी आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं।

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा दबाव

भारत का आयात बोझ अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते बढ़ी तेल और उर्वरक लागत के कारण और बढ़ गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य की बंदी ने ऊर्जा आपूर्ति को और जटिल बना दिया है, खासकर तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के लिए, जिसका बड़ा हिस्सा इसी सामरिक मार्ग से भारत पहुंचता है।

अधिकारियों का मानना है कि सोने जैसे गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात में कमी लाकर महंगे ऊर्जा आयात से पैदा हुए दबाव के एक हिस्से की भरपाई की जा सकती है।

उद्योग पर पड़ सकता है असर ऊंचा शुल्क रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, जिसे सरकार द्वारा 2024-25 के बजट में सीमा शुल्क को 6 प्रतिशत करने से लाभ मिला था, ताकि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सके और तस्करी पर लगाम लगाई जा सके।

बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि ताजा बढ़ोतरी खुदरा कीमतों को और ऊपर ले जाएगी और आने वाले त्योहार एवं शादी के मौसम में उपभोक्ता मांग पर असर डाल सकती है।

भारत सोने का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बना हुआ है, जहां मांग मुख्य रूप से आभूषण खरीद और पारंपरिक घरेलू निवेश से संचालित होती है।

By Rajeev Sharma

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