चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह)):पंजाब के किसान फिर सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले 15 मई को हजारों की तादाद में किसान चंडीगढ़ की ओर कूच करेंगे। यह मार्च शहीद भगत सिंह नेचर पार्क से शुरू होकर राज भवन तक पहुंचेगा। किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि सालों से लटकी मांगों पर सरकारें कान पर जूं तक नहीं रका रही।
बुधवार को हुई किसान संगठनों की बैठक में यह फैसला लिया गया। भाकियू (लखोवाल) के प्रमुख लखोवाल ने केंद्र-राज्य सरकारों पर पंजाब के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि देश की अन्न सुरक्षा में पंजाब का योगदान कमाल का है, फिर भी किसानों को लगातार ठेंगा दिखाया जा रहा। दूसरी ओर, परमिंदर सिंह पलमाजरा और परशोतम सिंह गिल जैसे नेताओं ने सहकारी बैंकों की खराब हालत पर चिंता जताई। किसानों को फसल ऋण समय पर नहीं मिल रहे, राहत योजनाएं अटकी पड़ी हैं और कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा।
किसानों ने बिजली आपूर्ति को लेकर भी आवाज बुलंद की। खरीफ की फसल की बुआई से पहले धान की नर्सरी तैयार करने के लिए रोजाना कम से कम आठ घंटे बिजली जरूरी है। बिजली कटौती से उत्पादन गिर रहा और खर्च चढ़ रहा। इसके अलावा, चंडीगढ़ और पंजाब यूनिवर्सिटी को पंजाब को सौंपने, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के नियमों में बदलाव और नदी जल विवाद के समाधान की मांग तेज हो गई। जल बंटवारे में बहने वाले राज्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, यही नदी का सिद्धांत है।
पर्यावरण को बचाने की मांग भी जोर पकड़ रही। किसान नेता ने फैक्ट्रियों और शहरी निकायों पर नदियों, नहरों व झीलों में गंदा पानी छोड़ने का इल्जाम लगाया। उन्होंने सख्त कार्रवाई की अपील की। संगठनों ने भरोसा दिलाया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन किसानों का गुस्सा अब हद पार कर चुका। पंजाब के कई जिलों से लोग जुटेंगे, जो हाल के दिनों का सबसे बड़ा आंदोलन साबित होगा।
सरकार की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। किसान नेता आशा कर रहे हैं कि मार्च से पहले बातचीत हो जाए, वरना हालात बिगड़ सकते हैं।
