मोगा(गुरप्रीत सिंह): मोगा ने शुक्रवार को प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. नरिंदर सिंह कपानी की 100वीं जन्म जयंती मनाई, जिन्हें व्यापक रूप से ‘फाइबर ऑप्टिक्स के जनक’ के रूप में मान्यता प्राप्त है। इस अवसर पर छात्रों में वैज्ञानिक जिज्ञासा और नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय विज्ञान प्रदर्शनी आयोजित की गई।
31 अक्टूबर 1926 को मोगा में जन्मे कपानी ने फाइबर-ऑप्टिक्स तकनीक में अभूतपूर्व योगदान दिया, जिसने दुनिया भर में सूचना प्रसारण के तरीके को बदल दिया। उनके अग्रणी काम ने उन तकनीकों की नींव रखी, जो आज उच्च गति वाले इंटरनेट, दूरसंचार और आधुनिक डेटा संचार का समर्थन करती हैं। उनका शोध चिकित्सा तकनीक, लेजर अनुप्रयोगों और बायोमेडिकल इंस्ट्रूमेंटेशन तक भी फैला हुआ था।
प्रदर्शनी का उद्घाटन उपायुक्त सागर सेतिया ने किया, जिन्होंने वैज्ञानिक को श्रद्धांजलि दी और उनके गृहनगर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में उनके योगदान को उजागर किया।
सेतिया ने कहा कि कपानी की उपलब्धियां पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती हैं और उनके जीवन ने दिखाया कि वैज्ञानिक शोध समाज में स्थायी बदलाव ला सकता है। मोगा जिले भर के लगभग 40 स्कूल प्रदर्शनी में भाग ले रहे हैं, जो वैज्ञानिक मॉडल, प्रयोगात्मक परियोजनाएं और नवीन विचार प्रस्तुत कर रहे हैं।
कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में से एक गोलिया खुर्द गांव की महिलाओं द्वारा विकसित छोटे रोबोटों की श्रृंखला थी। एक मानवरूपी महिला रोबोट ने प्रवेश द्वार पर आगंतुकों का स्वागत किया, जबकि अन्य स्थानीय रूप से विकसित रोबोटिक रचनाएं गणमान्य अतिथियों के सामने प्रदर्शित की गईं।
उपायुक्त ने यह भी घोषणा की कि डॉ. कपानी की स्मृति में मोगा में जल्द ही एक आधुनिक पुस्तकालय स्थापित किया जाएगा। प्रस्तावित सुविधा का उद्देश्य युवाओं में पढ़ने की आदत, वैज्ञानिक शिक्षा और शोध को बढ़ावा देना है।
कपानी के बेटे राज सिंह कपानी ने संयुक्त राज्य अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्मरणोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए और अपने पिता की विरासत को सम्मानित करने के लिए जिला प्रशासन के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक के जीवन, शोध और प्रमुख उपलब्धियों को दर्शाने वाली एक वृत्तचित्र भी प्रदर्शित की गई, जिससे छात्रों और आगंतुकों को उनकी यात्रा और विज्ञान में उनके योगदान के बारे में जानने का अवसर मिला।
मोगा से वैज्ञानिक पहचान तक
कुंदन कौर और सुंदर सिंह कपानी के बेटे नरिंदर सिंह कपानी ने आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर 1952 में इंपीरियल कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में डॉक्टरल शोध के लिए लंदन चले गए। वहां उन्होंने प्रसिद्ध प्रकाशिकी वैज्ञानिक हेराल्ड हॉपकिंस के अधीन काम किया।
1953 में कपानी ने प्रकाश के ऑप्टिकल फाइबर के एक गुच्छे के माध्यम से संचरण को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया, जो आधुनिक फाइबर-ऑप्टिक्स तकनीक के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बना। इसके बाद उन्होंने 1955 में पीएचडी प्राप्त की।
बाद में उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में एक प्रमुख वैज्ञानिक और उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाई, 1960 में ऑप्टिक्स टेक्नोलॉजी इंक की स्थापना की और बाद में कैपट्रॉन इंक शुरू किया।
उनके वैज्ञानिक कार्य में फाइबर ऑप्टिक्स, लेजर, सौर ऊर्जा, बायोमेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स और प्रदूषण निगरानी सहित कई क्षेत्र शामिल थे। अपने करियर के दौरान उन्होंने 100 से अधिक पेटेंट हासिल किए और 100 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र प्रकाशित किए।
मोगा में जन्म शताब्दी समारोह एक ऐसे वैज्ञानिक को श्रद्धांजलि के रूप में कार्य करता है, जिनकी खोजों ने आधुनिक संचार तकनीक को आकार देने में मदद की और जिनकी विरासत पीढ़ियों में वैज्ञानिक अन्वेषण को प्रेरित करती रहती है।
