चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): आने वाले दिनों में पंजाब के बड़े हिस्से में मौसम के मिजाज में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों ने कई जिलों में गरज-चमक, छिटपुट बारिश और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है। मौसम में आ रहा यह बदलाव एक नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) से जुड़ा है, जिसके 18 जून से सक्रिय होने की संभावना है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के 16 जिलों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। इसके साथ ही निवासियों को बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के प्रति सचेत रहने की चेतावनी दी है। मौसम अधिकारियों का कहना है कि कम से कम 22 जून तक रुक-रुक कर बारिश होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी रहेंगी।
इस मौसम प्रणाली का सबसे ज्यादा असर उत्तरी, मध्य और पश्चिमी जिलों में देखने को मिलने की उम्मीद है। पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, फिरोजपुर, फाजिल्का, बठिंडा, मोगा, फरीदकोट, मुक्तसर, बरनाला, मानसा और संगरूर सहित अन्य क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ कुछ समय के लिए बारिश की बौछारें पड़ सकती हैं।
आने वाले इस मौसमी बदलाव का असर राज्य के तापमान पर भी दिखने लगा है। पिछले दिनों की तुलना में दिन के पारे में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। आनंदपुर साहिब में पंजाब का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के औसत तापमान से कम रहा।
मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार, इस महीने पंजाब में बारिश का वितरण असमान रहा है। जहां कुछ जिलों में प्रचुर मात्रा में बौछारें पड़ी हैं, वहीं अन्य जिलों में अब भी पानी की भारी कमी बनी हुई है। 1 जून से 16 जून के बीच, राज्य में कुल मिलाकर लगभग सामान्य बारिश दर्ज की गई है, हालांकि जिलावार आंकड़ों में काफी बड़ा अंतर देखने को मिला है।
इस अवधि के दौरान नवांशहर सबसे अधिक बारिश प्राप्त करने वाले जिलों में शीर्ष पर रहा, जहाँ इसके दीर्घकालिक औसत से काफी अधिक वर्षा दर्ज की गई। तरनतारन, लुधियाना, फिरोजपुर और फाजिल्का में भी अधिशेष (सरप्लस) बारिश दर्ज की गई। दूसरी ओर, बरनाला में सबसे बड़ी कमी देखी गई, जबकि होशियारपुर में भी बारिश का स्तर उम्मीद से कम रहा।
अधिकारी पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले पानी के प्रवाह पर भी पैनी नजर रख रहे हैं। प्रमुख जलाशयों के जलग्रहण (कैचमेंट) क्षेत्रों में हाल ही में हुई बारिश के कारण भाखड़ा बांध के जल स्तर में वृद्धि हुई है, जो इस क्षेत्र के लिए सिंचाई और बिजली उत्पादन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में बादल छाए रहने, मध्यम बारिश और कभी-कभी गरज-चमक का मिलाजुला असर देखा जा सकता है। हालांकि फिलहाल व्यापक रूप से भारी बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन कुछ अलग-अलग स्थानों पर कम समय के लिए तीव्र मौसमी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
मौसम विभाग ने निवासियों को सलाह दी है कि वे गरज-चमक की गतिविधियों के दौरान सतर्क रहें और पेड़ों के नीचे या बिजली के बुनियादी ढांचे के पास शरण लेने से बचें। विशेष रूप से किसानों से आग्रह किया गया है कि वे खेतों में काम शुरू करने से पहले मौसम के पूर्वानुमान की जांच जरूर कर लें।
उत्तर भारत में इस नई मौसम प्रणाली के आगे बढ़ने के साथ, सप्ताह के उत्तरार्ध (आधे भाग के बाद) में पंजाब में मानसून जैसा अधिक सक्रिय दौर देखने को मिलने की उम्मीद है, जिससे कई जिलों में अतिरिक्त बारिश और ठंडक आ सकती है।
