चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पंजाब भर में मानसूनी गतिविधियों के एक और दौर की भविष्यवाणी की है, जिसके तहत अगले कुछ दिनों में कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश होने की उम्मीद है। मौसम अधिकारियों ने निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि स्थानीय स्तर पर भारी बौछारों से शहरी क्षेत्रों में जलभराव हो सकता है और बरसाती नालों का जल स्तर बढ़ सकता है।
नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार, शिवालिक की पहाड़ियों और जम्मू सीमा से सटे जिलों—जिनमें पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, रूपनगर और मोहाली शामिल हैं—में तेज बारिश होने की अधिक संभावना है। अन्य अधिकांश जिलों में गरज-चमक के साथ रुक-रुक कर बौछारें पड़ने की उम्मीद है।
मौसम और बिजली की स्थिति
लगातार हो रही बारिश ने पंजाब भर में दिन के तापमान को कम करने में मदद की है, जिससे यह मौसमी औसत से नीचे बना हुआ है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में उमस (humidity) का स्तर ऊंचा है, जिससे पारा गिरने के बावजूद स्थिति असुविधाजनक बनी हुई है।
चंडीगढ़ में भी पूरे दिन बादल छाए रहने और रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है। अधिकारियों ने कहा कि शहर में बारिश की गतिविधि असमान रह सकती है, जहाँ कुछ क्षेत्रों में कुछ समय के लिए भारी बारिश हो सकती है जबकि अन्य क्षेत्रों में केवल हल्की बूंदाबांदी देखी जा सकती है।
उमस भरे हालातों के कारण एयर कंडीशनर और कूलिंग उपकरणों का उपयोग बढ़ गया है, जिससे राज्य में बिजली की खपत लगातार ऊंची बनी हुई है। राज्य के बिजली विभाग स्थानीय उत्पादन और राष्ट्रीय ग्रिड से खरीदी गई बिजली के तालमेल से आपूर्ति बनाए हुए हैं।
जलाशयों का बढ़ता जल स्तर और हिमाचल में अलर्ट
| प्रमुख क्षेत्र | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| भाखड़ा और पोंग जलाशय | ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हाल ही में हुई बारिश के कारण पानी की आवक (inflow) बढ़ गई है। जल संसाधन अधिकारियों ने कहा कि जलाशयों का स्तर अपनी अधिकतम भंडारण क्षमता से काफी नीचे है और पानी की निकासी को प्रबंधित किया जा रहा है। |
| हिमाचल प्रदेश (पड़ोसी राज्य) | हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी जारी है। आईएमडी ने 12 जुलाई तक व्यापक बारिश का अनुमान लगाया है। प्रशासन ने कई पहाड़ी जिलों में भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड), चट्टानें गिरने और रास्ते बंद होने की चेतावनी दी है। |
पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सलाह: पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासनों ने यात्रियों से अपनी यात्रा शुरू करने से पहले सड़कों की स्थिति की जांच करने का भी आग्रह किया है, क्योंकि मलबे और उफनती नालियों के कारण प्रमुख राजमार्गों पर पहले से ही रुक-रुक कर व्यवधान आने की खबरें मिली हैं।
मौसम अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा मानसून चरण के अगले कुछ दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय रहने की उम्मीद है, जिसके बाद यह धीरे-धीरे कमजोर होगा, हालांकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश की घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है।
